ब्लैक हॉक चॉपर: वाशिंगटन क्रैश और इसकी पूरी कहानी

हाल ही में UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अमेरिकन ईगल फ्लाइट 5342 के बीच रोनाल्ड रीगन वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट के पास हुई टक्कर ने ब्लैक हॉक की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हेलीकॉप्टर 1979 से सेवा में है और इसे सेना की “वर्कहॉर्स” एविएशन मशीन कहा जाता है। यह हेलीकॉप्टर युद्ध और परिवहन मिशनों में अपनी सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है।

ब्लैक हॉक की खासियत और इसके उपयोग

  • अब तक 5,000 से अधिक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर बनाए जा चुके हैं और 36 देशों की सेनाएं इनका इस्तेमाल कर रही हैं।
  • यह एयर असॉल्ट, राहत मिशन और युद्ध अभियानों के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला हेलीकॉप्टर है।
  • मजबूत डिज़ाइन और अत्याधुनिक तकनीक की वजह से यह बेहद सुरक्षित माना जाता है।

ब्लैक हॉक हादसे और सुरक्षा चिंताएं

हालांकि, अपनी बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद ब्लैक हॉक कई घातक दुर्घटनाओं में शामिल रहा है। हाल ही में केंटकी में हुए एक सैन्य प्रशिक्षण हादसे में नौ सैनिकों की मौत हो गई थी।

वाशिंगटन क्रैश: क्या था कारण?

  • सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल डैरिन गॉब ने MSNBC को बताया कि ब्लैक हॉक क्रू को यात्री विमान की उपस्थिति का पता नहीं चला होगा
  • वीडियो फुटेज में भी हेलीकॉप्टर ने अपनी दिशा या ऊंचाई नहीं बदली, जिससे पता चलता है कि क्रू को खतरे का अंदाजा नहीं था।
  • आमतौर पर ऐसे मिशनों में तीन क्रू चीफ होते हैं, लेकिन बुधवार के मिशन में केवल एक ही था, जिससे सतर्कता में कमी आई हो सकती है।

सेना ने उठाए कड़े कदम

केंटकी और अलास्का में अपाचे हेलीकॉप्टरों की दुर्घटनाओं के बाद, अमेरिकी सेना ने सभी एविएशन यूनिट्स को अस्थायी रूप से ग्राउंडेड (रोका) कर दिया है

सेना प्रमुख जेम्स मैककॉन्कविल ने कहा कि यह निर्णय भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बेहद जरूरी था

ब्लैक हॉक बनाम अन्य हेलीकॉप्टर

पिछले दशक में ब्लैक हॉक से जुड़े प्रशिक्षण हादसों में 60 लोगों की मौत हुई, लेकिन फ्लाइट घंटों के अनुपात में अन्य हेलीकॉप्टरों की तुलना में यह कम घातक दुर्घटनाओं में शामिल रहा है

AH-64 अपाचे और CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टरों की तुलना में ब्लैक हॉक कम घातक घटनाओं में शामिल रहा है

ब्लैक हॉक अपनी मजबूती और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है, लेकिन हालिया घटनाएं इसकी सुरक्षा पर सवाल उठा रही हैं। सेना द्वारा उठाए गए कदमों से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकेगा।

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