राज्य
सपने में दिखा खजाना, नींव खोदी तो निकलीं मूर्तियां और पुराने सिक्के
अकलतरा थाना क्षेत्र के ग्राम परसाही बाना में हुई इस घटना की खबर फैलते ही पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मिली वस्तुओं को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया है। एक सिक्के पर ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’, ‘एक आना’ और 1818 अंकित होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सिक्कों और मूर्तियों की वास्तविक प्राचीनता तथा धातु की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुरातत्व विभाग की विशेषज्ञ जांच के बाद ही मामले की असलियत सामने आएगी।
प्रेस विज्ञिप्त
सपने में दिखा खजाना, नींव खोदी तो निकलीं मूर्तियां और पुराने सिक्के
अकलतरा थाना क्षेत्र के ग्राम परसाही बाना में हुई इस घटना की खबर फैलते ही पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मिली वस्तुओं को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया है। एक सिक्के पर ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’, ‘एक आना’ और 1818 अंकित होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सिक्कों और मूर्तियों की वास्तविक प्राचीनता तथा धातु की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुरातत्व विभाग की विशेषज्ञ जांच के बाद ही मामले की असलियत सामने आएगी।
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सेहत
मोबाइल की लत बढ़ा रही युवाओं में आत्महत्या का जोखिम, संवाद और संयम से बनेगी राह
आजकल समाचारों में परिवार द्वारा मोबाइल का प्रयोग करने से रोकने/ टोकने पर युवाओं द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने का समाचार अक्सर पढ़ने व सुनने को मिल जाता है। यह स्थिति युवाओं में बढ़ते मोबाइल के लत के कारण हो रहा है। माता-पिता एवं परिवार को सदस्यों को चाहिए कि शुरू से ही मोबाइल के प्रयोग को परिवार में संयमित रखें। यदि परिवार में कोई अत्यधिक मोबाइल का उपयोग करता है तो उसे धीरे-धीरे धैर्य से प्रेम पूर्वक समझाकर मोबाइल उपयोग के समय को कम करते हुए उसे मोबाइल के लत छुटकारा दिलाए आवश्यक हो तो मनोवैज्ञानिक सहायता लें। अचानक से मोबाइल छिनने या मोबाइल का उपयोग बंद करा देने से आत्महत्या के विचार आने के जोखिम बढ़ सकता है।

मनोरंजन
पुस्तक समीक्षा
‘शांतिदूत गुटर गूँ’ : शांति, प्रेम और सह-अस्तित्व का बाल-संसार
डॉ. विमला भंडारी की पिक्चर बुक ‘शांतिदूत गुटर गूँ’ बालसाहित्य की उस परंपरा में उल्लेखनीय कृति है, जिसमें मनोरंजन, ज्ञान, कल्पना, संवेदना और जीवन-मूल्यों को एक साथ साधने का प्रयास दिखाई देता है। पुस्तक का केंद्रीय पात्र कबूतर है, लेकिन वास्तव में यह केवल कबूतर की कहानी नहीं है। इसके माध्यम से लेखिका ने मनुष्य और प्रकृति के संबंध, प्रेम, करुणा, सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक धारणाओं, वैज्ञानिक तथ्यों, इतिहास, युद्ध और शांति जैसे अनेक विषयों को बच्चों के सामने रोचक ढंग से रखा है। पुस्तक की विशेषता यह है कि कबूतर स्वयं बच्चों- अनु और बसु से संवाद करता है और अपने बारे में कथा-किस्से सुनाते हुए धीरे-धीरे ‘शांतिदूत’ के व्यापक अर्थ तक पहुँचता है। पुस्तक स्वयं इसे सरल और सहज भाषा में बच्चों से संवाद करती हुई कहानियों का संग्रह प्रस्तुत करती है तथा कबूतर को शांति, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक बनाती है।…
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व्यापार/व्यवसाय
रूस और चीन के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग एशिया की ऊर्जा वृद्धि के साथ वैश्विक बाजारों को दे रहा नया आकार
एशिया की बढ़ती औद्योगिक क्षमता, ऊर्जा मांग और बुनियादी ढांचे में निवेश वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया आकार दे रहे हैं। चीन वैश्विक ऊर्जा खपत और उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है, जबकि रूस एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता और प्रौद्योगिकी साझेदार बना हुआ है। यह बात रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इगोर सेचिन ने व्लादिवोस्तोक में आयोजित VIII रूसी-चीनी ऊर्जा व्यापार मंच में अपने संबोधन के दौरान कही।…
धर्म
भगवान गणेश : मंगल, समृद्धि और विकसित भारत के प्रेरणास्रोत
भगवान श्री गणेश भारतीय संस्कृति के ऐसे बहुआयामी एवं सर्वस्वीकार्य देवता हैं, जिनका स्मरण किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में किया जाता है। वे केवल विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजित नहीं हैं, बल्कि उनका संपूर्ण व्यक्तित्व ज्ञान, विवेक, दूरदर्शिता, नेतृत्व, धैर्य, आत्मसंयम, संवाद, समावेशिता और कर्मशीलता का अद्भुत संदेश देता है।
शिक्षा/कैरियर
साक्षरता : अक्षर ज्ञान से आगे, अधिकार और आत्मसम्मान की रोशनी
किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन केवल उसकी ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों, बढ़ती अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक से नहीं किया जा सकता। किसी राष्ट्र की असली ताकत इस बात में निहित होती है कि उसके नागरिक कितने जागरूक, शिक्षित, विवेकशील और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग हैं। इसी दृष्टि से साक्षरता केवल अक्षर पहचानने या पढ़ना-लिखना सीख लेने का नाम नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने की पहली सीढ़ी है।
खेल
खेलों की उड़ान, विकसित भारत की पहचान
राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक महान खिलाड़ी की स्मृति को नमन करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की खेल-चेतना को जगाने एवं खेल आयामों को नये शिखर देने का दिन है। 29 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिवस हॉकी के महानायक मेजर ध्यानचंद की जयंती से जुड़ा है। खेल किसी राष्ट्र की शक्ति का केवल प्रदर्शन नहीं होते, वे उसके आत्मविश्वास,

