राज्य
डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय में अष्ट दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ
डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय, सोयेपुर, लालपुर, वाराणसी में महाविद्यालय के बहुउद्देशीय सभागार में अष्ट दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की विषय- वस्तु “संस्कृति से संवाद : भारतीय प्रज्ञा और वैश्विक भविष्य” रखा गया है। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ माँ सरस्वती तथा डॉ. घनश्याम सिंह की प्रतिमा के समक्ष दीपप्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। तदुपरांत छात्र- छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं कुलगीत की प्रस्तुतियाँ दी।
प्रेस विज्ञिप्त
डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय में अष्ट दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ
डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय, सोयेपुर, लालपुर, वाराणसी में महाविद्यालय के बहुउद्देशीय सभागार में अष्ट दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की विषय- वस्तु “संस्कृति से संवाद : भारतीय प्रज्ञा और वैश्विक भविष्य” रखा गया है। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ माँ सरस्वती तथा डॉ. घनश्याम सिंह की प्रतिमा के समक्ष दीपप्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। तदुपरांत छात्र- छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं कुलगीत की प्रस्तुतियाँ दी।
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सेहत
कम उम्र में विवाह: मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव और बचाव की राह
भारतीय समाज में विवाह को केवल दो व्यक्तियों के बीच संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया नहीं माना जाता, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था के रूप में देखा जाता है। विवाह परिवार निर्माण, सामाजिक स्थिरता और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण का माध्यम है। यही कारण है कि विवाह को जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक माना जाता है। हालांकि, जब विवाह उचित आयु से पहले कर दिया जाता है या युवाओं पर कम उम्र में विवाह करने का दबाव बनाया जाता है, तब इसके दूरगामी सामाजिक, आर्थिक और मानसिक प्रभाव सामने आते हैं।

मनोरंजन
पुस्तक समीक्षा
‘शांतिदूत गुटर गूँ’ : शांति, प्रेम और सह-अस्तित्व का बाल-संसार
डॉ. विमला भंडारी की पिक्चर बुक ‘शांतिदूत गुटर गूँ’ बालसाहित्य की उस परंपरा में उल्लेखनीय कृति है, जिसमें मनोरंजन, ज्ञान, कल्पना, संवेदना और जीवन-मूल्यों को एक साथ साधने का प्रयास दिखाई देता है। पुस्तक का केंद्रीय पात्र कबूतर है, लेकिन वास्तव में यह केवल कबूतर की कहानी नहीं है। इसके माध्यम से लेखिका ने मनुष्य और प्रकृति के संबंध, प्रेम, करुणा, सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक धारणाओं, वैज्ञानिक तथ्यों, इतिहास, युद्ध और शांति जैसे अनेक विषयों को बच्चों के सामने रोचक ढंग से रखा है। पुस्तक की विशेषता यह है कि कबूतर स्वयं बच्चों- अनु और बसु से संवाद करता है और अपने बारे में कथा-किस्से सुनाते हुए धीरे-धीरे ‘शांतिदूत’ के व्यापक अर्थ तक पहुँचता है। पुस्तक स्वयं इसे सरल और सहज भाषा में बच्चों से संवाद करती हुई कहानियों का संग्रह प्रस्तुत करती है तथा कबूतर को शांति, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक बनाती है।…
हाल की पोस्ट
व्यापार/व्यवसाय
InfoComm India 2026 भारत में तेजी से बढ़ते Pro AV और इंटीग्रेटेड एक्सपीरियंस टेक्नोलॉजी क्षेत्र को नई दिशा देगा
भारत का प्रोफेशनल ऑडियोविजुअल (Pro AV) और इंटीग्रेटेड एक्सपीरियंस टेक्नोलॉजी ट्रेडशो – InfoComm India– 16 से 18 सितंबर, 2026 तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर (JWCC) में वापस लौट रहा है। अब तक के अपने सबसे बड़े संस्करण की दिशा में बढ़ते हुए, InfoComm India 2026 में 300 से अधिक वैश्विक ब्रांड्स, 14,000 से अधिक उद्योग पेशेवर और 80 से अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा संचालित 40 से अधिक सत्रों वाला एक विस्तारित समिट आयोजित किया जाएगा। यह विस्तार भारत भर में चल रहे एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि कंपनियां स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, इमर्सिव टेक्नोलॉजीज और इंटीग्रेटेड एक्सपीरियंस में निवेश कर रही हैं। InfoComm India देश का एक प्रमुख मंच बन चुका है, जहां टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और खरीदार एक साथ आकर भविष्य की तकनीकी दिशा तय करते हैं।”…
धर्म
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : धर्म, कर्म और मानवता के मार्गदर्शक का महापर्व
भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था के अवसर नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सभ्यता, दर्शन, जीवन-मूल्यों और सामाजिक चेतना के जीवंत प्रतीक भी हैं। इन्हीं महान पर्वों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व हमें उस दिव्य व्यक्तित्व का स्मरण कराता है, जिसने अपने जीवन के प्रत्येक चरण में धर्म, सत्य, प्रेम, करुणा, नीति, कर्तव्य और कर्म का संदेश दिया।
शिक्षा/कैरियर
साक्षरता : अक्षर ज्ञान से आगे, अधिकार और आत्मसम्मान की रोशनी
किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन केवल उसकी ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों, बढ़ती अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक से नहीं किया जा सकता। किसी राष्ट्र की असली ताकत इस बात में निहित होती है कि उसके नागरिक कितने जागरूक, शिक्षित, विवेकशील और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग हैं। इसी दृष्टि से साक्षरता केवल अक्षर पहचानने या पढ़ना-लिखना सीख लेने का नाम नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने की पहली सीढ़ी है।
खेल
खेलों की उड़ान, विकसित भारत की पहचान
राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक महान खिलाड़ी की स्मृति को नमन करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की खेल-चेतना को जगाने एवं खेल आयामों को नये शिखर देने का दिन है। 29 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिवस हॉकी के महानायक मेजर ध्यानचंद की जयंती से जुड़ा है। खेल किसी राष्ट्र की शक्ति का केवल प्रदर्शन नहीं होते, वे उसके आत्मविश्वास,

