राज्य
राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ मिलने पर सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को मिली शुभकामनाएं
न्यायधानी बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं समाजसेवी सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ से सम्मानित किए जाने पर विभिन्न क्षेत्रों से लगातार शुभकामनाएं मिल रही हैं। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के गुंटूर निवासी अमृत पाप्पुला ने श्री बैस के निवास पहुंचकर उन्हें सम्मान की इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शहर के ही उद्योगपति प्रभात गुप्ता ने भी मिल कर बधाइयां दी। रेडियंट टैलेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा आयोजित समारोह
प्रेस विज्ञिप्त
राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ मिलने पर सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को मिली शुभकामनाएं
न्यायधानी बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं समाजसेवी सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को राष्ट्रीय सम्मान ‘छत्तीसगढ़ रत्न’ से सम्मानित किए जाने पर विभिन्न क्षेत्रों से लगातार शुभकामनाएं मिल रही हैं। इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के गुंटूर निवासी अमृत पाप्पुला ने श्री बैस के निवास पहुंचकर उन्हें सम्मान की इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शहर के ही उद्योगपति प्रभात गुप्ता ने भी मिल कर बधाइयां दी। रेडियंट टैलेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा आयोजित समारोह
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सेहत
नेत्रदान – मृत्यु के बाद भी जीवन में उजाला बाँटने का महादान
मानव जीवन में आँखों का महत्व शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं, बल्कि संसार की सुंदरता, प्रकृति के रंग, अपनों के चेहरे और जीवन के अनगिनत अनुभवों का द्वार हैं। जो व्यक्ति जन्म से या किसी कारणवश दृष्टिहीन है, उसके लिए प्रकाश का महत्व वही समझ सकता है जिसने अंधकार का अनुभव किया हो। ऐसे में नेत्रदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च सेवा और करुणा का अनुपम उदाहरण है।

मनोरंजन
पुस्तक समीक्षा
‘शांतिदूत गुटर गूँ’ : शांति, प्रेम और सह-अस्तित्व का बाल-संसार
डॉ. विमला भंडारी की पिक्चर बुक ‘शांतिदूत गुटर गूँ’ बालसाहित्य की उस परंपरा में उल्लेखनीय कृति है, जिसमें मनोरंजन, ज्ञान, कल्पना, संवेदना और जीवन-मूल्यों को एक साथ साधने का प्रयास दिखाई देता है। पुस्तक का केंद्रीय पात्र कबूतर है, लेकिन वास्तव में यह केवल कबूतर की कहानी नहीं है। इसके माध्यम से लेखिका ने मनुष्य और प्रकृति के संबंध, प्रेम, करुणा, सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक धारणाओं, वैज्ञानिक तथ्यों, इतिहास, युद्ध और शांति जैसे अनेक विषयों को बच्चों के सामने रोचक ढंग से रखा है। पुस्तक की विशेषता यह है कि कबूतर स्वयं बच्चों- अनु और बसु से संवाद करता है और अपने बारे में कथा-किस्से सुनाते हुए धीरे-धीरे ‘शांतिदूत’ के व्यापक अर्थ तक पहुँचता है। पुस्तक स्वयं इसे सरल और सहज भाषा में बच्चों से संवाद करती हुई कहानियों का संग्रह प्रस्तुत करती है तथा कबूतर को शांति, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक बनाती है।…
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व्यापार/व्यवसाय
InfoComm India 2026 भारत में तेजी से बढ़ते Pro AV और इंटीग्रेटेड एक्सपीरियंस टेक्नोलॉजी क्षेत्र को नई दिशा देगा
भारत का प्रोफेशनल ऑडियोविजुअल (Pro AV) और इंटीग्रेटेड एक्सपीरियंस टेक्नोलॉजी ट्रेडशो – InfoComm India– 16 से 18 सितंबर, 2026 तक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर (JWCC) में वापस लौट रहा है। अब तक के अपने सबसे बड़े संस्करण की दिशा में बढ़ते हुए, InfoComm India 2026 में 300 से अधिक वैश्विक ब्रांड्स, 14,000 से अधिक उद्योग पेशेवर और 80 से अधिक विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा संचालित 40 से अधिक सत्रों वाला एक विस्तारित समिट आयोजित किया जाएगा। यह विस्तार भारत भर में चल रहे एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि कंपनियां स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, इमर्सिव टेक्नोलॉजीज और इंटीग्रेटेड एक्सपीरियंस में निवेश कर रही हैं। InfoComm India देश का एक प्रमुख मंच बन चुका है, जहां टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और खरीदार एक साथ आकर भविष्य की तकनीकी दिशा तय करते हैं।”…
धर्म
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : धर्म, कर्म और मानवता के मार्गदर्शक का महापर्व
भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था के अवसर नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सभ्यता, दर्शन, जीवन-मूल्यों और सामाजिक चेतना के जीवंत प्रतीक भी हैं। इन्हीं महान पर्वों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व हमें उस दिव्य व्यक्तित्व का स्मरण कराता है, जिसने अपने जीवन के प्रत्येक चरण में धर्म, सत्य, प्रेम, करुणा, नीति, कर्तव्य और कर्म का संदेश दिया।
शिक्षा/कैरियर
आखिर टेट परीक्षा का फाटक टूट गया
माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार शिक्षकीय सेवा में बने रहने के लिए बेसिक शिक्षा में कार्यरत सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को दो वर्ष में टेट अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य था। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति का समय पांच वर्ष बचा था, उनको परीक्षा से छूट प्रदान की गई थी। फिर भी, शिक्षक-शिक्षिकाओं की एक बड़ी
खेल
खेलों की उड़ान, विकसित भारत की पहचान
राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक महान खिलाड़ी की स्मृति को नमन करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की खेल-चेतना को जगाने एवं खेल आयामों को नये शिखर देने का दिन है। 29 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिवस हॉकी के महानायक मेजर ध्यानचंद की जयंती से जुड़ा है। खेल किसी राष्ट्र की शक्ति का केवल प्रदर्शन नहीं होते, वे उसके आत्मविश्वास,

