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दीपावली : दीपों का उत्सव

दीपों का उत्सव है आज आओ हम मिल दीप जलाएं तारों से आकाश सजा है हम…

हमर छत्तीसगढ़

महतारी के मया, हमर पहचान। अरपा के धारा, अमृत के खान। धान के कटोरा, हरियर संसार।…

बिलासा अरपा के बेटा मैं हवंव बिलसपुरिहा

बिलासा अरपा के बेटा मैं हवंव बिलसपुरिहा, मोर माटी के महक मं बसथे मोर दुनिया। अरपा…

मरीचिका

कल ज्ञान की खोज में भटकता रहा, हर चेहरे में कोई उत्तर पढ़ता रहा। कल भी…

करवाचौथ : दाम्पत्य प्रेम का मधुर त्योहार

करवाचौथ का ये त्योहार, याद दिलाता है हर बार। पति पत्नी की प्रीति सुदृढ़ हो, सुखमय…

दस शीशों का अभिमान

दस सिर धारे लंकाधीश। ज्ञान-ज्योति के बने प्रतीक॥

अब जाग सखी: प्रमोद दीक्षित मलय

प्रकृति, मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक प्रदूषण पर आधारित यह हिंदी कविता जीवन में प्रेम,…

खुशी बांटते सुरभित उपवन

मन में जब उजियारा भरता। सघन तमस भी हारा करता। नेहिल निर्झर बहते झर-झर, कष्ट कलुष…

पिता और पेड़

द्वार पर खड़ा पेड़ दिखता है अकेला, प्रकृति की साख संजोए, पेड़ कभी अकेला नहीं होता…

पितृपक्ष

शीश झुकाकर नमन करें हम पूर्वजों की पावन आशीषों को जिन्होंने दिखलाया जीवन पथ मिटा के…

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