राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विशेष प्रतिवेदकों एवं विशेष मॉनिटरों की बैठक आयोजित की

देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली में अपने नव नियुक्त विशेष प्रतिवेदकों और विशेष मॉनिटरों की एक व्यापक बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में आयोग की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना, निगरानी और रिपोर्टिंग की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाना तथा मैदानी स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप को बढ़ावा देना रहा।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विशेष प्रतिवेदकों एवं विशेष मॉनिटरों की बैठक आयोजित की

बैठक की अध्यक्षता करते हुए एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने विशेष प्रतिवेदकों और विशेष मॉनिटरों के सामाजिक हितों के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयोग का लक्ष्य केवल नीतिगत विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विकास और अधिकारों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आयोग के लिए ये अधिकारी ‘मैदानी सिपाही’ के रूप में कार्य करते हैं और छोटे लेकिन ठोस सुधारात्मक कदम भी मानवाधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि किसी हस्तक्षेप से एक परिवार को भी राहत मिलती है, तो वही इस नियुक्ति का उद्देश्य पूरा करता है।

अध्यक्ष महोदय ने यह भी रेखांकित किया कि विशेष प्रतिवेदकों और विशेष मॉनिटरों की नियुक्ति एक सख्त, पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से की गई है। क्षेत्रीय विशेषज्ञता, विषयगत ज्ञान और रुचि के क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए इन नियुक्तियों का उद्देश्य निगरानी, रिपोर्टिंग और परामर्श की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने संस्थागत सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जनसेवा के प्रति आयोग की प्रतिबद्धता को दोहराया।

एनएचआरसी की सदस्य विजया भारती सयानी ने अपने संबोधन में कहा कि विशेष प्रतिवेदक और विशेष मॉनिटर के रूप में नियुक्ति केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक गहरी नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दौरों और अवलोकनों से यह स्पष्ट होता है कि कई गंभीर और लगातार बनी रहने वाली समस्याएं अब भी समाधान की प्रतीक्षा कर रही हैं। इनमें जेलों और संस्थानों में भीड़भाड़, चिकित्सा लापरवाही, लैंगिक एवं बाल संवेदनशीलता का अभाव, शिकायत निवारण में देरी और अनुवर्ती कार्रवाई की कमी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिवेदन केवल दस्तावेजीकरण तक सीमित न रहकर जवाबदेही का प्रभावी माध्यम बनना चाहिए, ताकि निगरानी से वास्तविक सुधारात्मक कार्रवाई, संस्थागत सुधार और कमजोर वर्गों की परिस्थितियों में मापनीय परिवर्तन संभव हो सके।

बैठक के उद्घाटन सत्र में एनएचआरसी के महासचिव श्री भरत लाल ने विशेष प्रतिवेदकों और विशेष मॉनिटरों की अवधारणा तथा मानवाधिकार संरक्षण में उनकी केंद्रीय भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी आयोग की अंतरात्मा के रक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जिनका दायित्व गलत कार्यों, लापरवाही या निष्क्रियता की पहचान करना है। उन्होंने नव नियुक्त अधिकारियों से अगले छह महीनों के लिए एक सहयोगात्मक कार्य योजना तैयार करने का आग्रह किया, जिसमें प्रमुख मानवाधिकार मुद्दों और संबंधित क्षेत्रीय दौरों को प्राथमिकता दी जाए।

महासचिव ने यह भी कहा कि विशेष प्रतिवेदकों और मॉनिटरों के दौरों से प्राप्त तथ्य और अनुभव आयोग को सरकार के लिए ठोस परामर्श और नीतिगत सिफारिशें देने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने डेटा आधारित हस्तक्षेप, स्वतः संज्ञान, नीतिगत सुधार और जन जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया। इस संदर्भ में उन्होंने भिक्षावृत्ति पर जारी एनएचआरसी परामर्श तथा ट्रांसजेंडर अधिनियम और मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की समीक्षा जैसे प्रयासों का उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने आयोग की प्रचार गतिविधियों को मजबूत करने और नागरिकों तक पहुंच बढ़ाने के लिए हाल ही में लॉन्च किए गए मोबाइल ऐप सहित विभिन्न संपर्क माध्यमों को लोकप्रिय बनाने का अनुरोध किया।

एनएचआरसी के संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार ने आयोग के मानवाधिकार ढांचे, संगठनात्मक संरचना, शिकायत प्रबंधन प्रणाली, परामर्श प्रक्रिया, कोर ग्रुप, दिशा निर्देश और विशेष प्रतिवेदकों तथा विशेष मॉनिटरों के कार्य दायित्वों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति का उद्देश्य नव नियुक्त अधिकारियों को आयोग की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और उनके कार्य को अधिक प्रभावी बनाना था।

बैठक के दौरान सभी विशेष प्रतिवेदकों और विशेष मॉनिटरों ने मानवाधिकार और मानवीय गरिमा को बनाए रखने से संबंधित अपने विचार और सुझाव साझा किए। उन्होंने अपने पूर्व अनुभवों के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की, जहां सामूहिक प्रयासों और समन्वित कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में कुल 30 विशेष प्रतिवेदकों और विशेष मॉनिटरों ने भाग लिया। इनमें पूर्व सिविल सेवक, पूर्व कानून प्रवर्तन अधिकारी, नागरिक समाज और अकादमिक क्षेत्र के प्रतिनिधि, विविध लैंगिक पहचानों से जुड़े व्यक्ति तथा दिव्यांग समुदाय के प्रतिनिधि शामिल थे। यह विविधता आयोग की समावेशी दृष्टि और व्यापक मानवाधिकार एजेंडे को प्रतिबिंबित करती है।

बैठक में महानिदेशक (जांच) श्रीमती अनुपमा नीलेकर चंद्र, रजिस्ट्रार (कानून) श्री जोगिंदर सिंह, संयुक्त सचिव श्रीमती सैदिंगपुई छकछुक, प्रस्तुतकर्ता अधिकारी श्री गौरव गर्ग, डीआईजी, लेफ्टिनेंट कर्नल वीरेंद्र सिंह (निदेशक), उप सचिव श्री संजय कुमार, उप रजिस्ट्रार सहित आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

विशेष प्रतिवेदकों और विशेष मॉनिटरों की नियुक्ति सूची

23 दिसंबर 2025 से प्रभावी तीन वर्षों की अवधि के लिए विशेष प्रतिवेदकों तथा 2 जनवरी 2026 से प्रभावी तीन वर्षों की अवधि के लिए विशेष मॉनिटरों की नियुक्ति की गई है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य देश भर में मानवाधिकार संरक्षण के प्रयासों को और अधिक मजबूत करना है। नियुक्त व्यक्तियों की विस्तृत सूची आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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