वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के लिए निवेश, साझेदारी और कार्रवाई का आह्वान: भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 का भव्य शुभारंभ

गोवा में भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 का औपचारिक शुभारंभ वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख नीति निर्माताओं और उद्योग नेतृत्व की उपस्थिति में हुआ। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री तथा एडीएनओसी के प्रबंध निदेशक एवं समूह सीईओ सुल्तान अहमद अल जाबेर के मुख्य भाषण और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के स्वागत संबोधन के साथ सम्मेलन की शुरुआत हुई।

वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के लिए निवेश, साझेदारी और कार्रवाई का आह्वान: भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 का भव्य शुभारंभ

इस वैश्विक सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में इस बात पर बल दिया कि भारत ऊर्जा सप्ताह केवल संवाद का मंच नहीं, बल्कि विचारों को ठोस कार्रवाई में, नवाचार को व्यावहारिक कार्यान्वयन में और महत्वाकांक्षाओं को मापनीय परिणामों में बदलने का अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है। ऊर्जा संक्रमण के इस निर्णायक दौर में सम्मेलन की भूमिका नीति, निवेश और प्रौद्योगिकी के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने की है।

ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और न्यायसंगत संक्रमण पर भारत का दृष्टिकोण

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने मुख्य भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और जलवायु न्याय के प्रति भारत की ठोस प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा सप्ताह अल्प समय में एक विश्वसनीय वैश्विक मंच के रूप में उभरा है, जो नीति निर्माताओं, उत्पादकों, उपभोक्ताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निवेशकों को एक साथ लाकर वैश्विक ऊर्जा प्रणाली में आ रहे अभूतपूर्व बदलावों पर साझा समाधान तलाशता है।

श्री पुरी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण का मूल उद्देश्य केवल ऊर्जा स्रोतों को बदलना नहीं, बल्कि ऊर्जा का संवर्धन करना है। उन्होंने तेल, गैस, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन, एलएनजी और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधनों में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार उपलब्धता, किफायत और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत ने सुधार आधारित और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है।

मंत्री ने ऊर्जा अन्वेषण के लिए बड़े तलछटी बेसिनों को खोलने, ओपन एकरेज लाइसेंसिंग नीति और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स की चरणबद्ध बोली प्रक्रिया जैसे सुधारों का उल्लेख किया। इन पहलों का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करना और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने यह भी कहा कि एलपीजी कवरेज का तेज विस्तार, स्वच्छ खाना पकाने की सुविधाएं और ऊर्जा मिश्रण में विविधता भारत की समावेशी विकास और समान ऊर्जा पहुंच के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

वैश्विक ऊर्जा मांग और निवेश पर यूएई का दृष्टिकोण

संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री सुल्तान अहमद अल जाबेर ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक ऊर्जा मांग एक बड़े परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जिसे उभरते बाजारों, डिजिटलीकरण और विभिन्न ऊर्जा प्रणालियों के एकीकरण से गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि भारत इन प्रमुख रुझानों के केंद्र में है और आने वाले दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग को निर्णायक रूप से दिशा देगा।

डॉ. अल जाबेर ने चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा प्रणाली के लिए सबसे बड़ा जोखिम अपर्याप्त निवेश है। उन्होंने सुरक्षा, किफायती दरों और दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा के सभी रूपों में संतुलित निवेश का आह्वान किया। यूएई भारत ऊर्जा साझेदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत के लिए कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में एडीएनओसी की भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही, बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में दीर्घकालिक, विश्वास आधारित और लचीली साझेदारियों के प्रति यूएई की प्रतिबद्धता दोहराई।

मेजबान राज्य गोवा का सतत विकास रोडमैप

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 विचारों को व्यवहारिक समाधानों में बदलने वाला वैश्विक मंच बन चुका है। उन्होंने बताया कि मेजबान राज्य के रूप में गोवा ने सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रस्तुत किया है, जिसमें वर्ष 2050 तक 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने का दीर्घकालिक रोडमैप शामिल है। मुख्यमंत्री ने हरित अर्थव्यवस्था और समुद्री अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन, पर्यावरणीय स्थिरता और समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष बल दिया।

भारत की वैश्विक भूमिका और सहयोग का आह्वान

भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 के उद्घाटन सत्रों में भारत को एक ऐसे अग्रणी और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया गया जो व्यावहारिक, विस्तार योग्य और समावेशी ऊर्जा समाधान देने में सक्षम है। वक्ताओं ने वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को गति देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार और निवेश जुटाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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