भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा, रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा तथा भारतीय व्यापार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र सेवा, जवाबदेही, गुणवत्ता और राष्ट्रीय हित के प्रति समर्पण को अपने करियर का केंद्रीय सिद्धांत बनाने की सलाह दी।

चयन के साथ जुड़ी जिम्मेदारी
राष्ट्रपति ने कहा कि इन प्रतिष्ठित सेवाओं में चयन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को स्मरण कराया कि देश के असंख्य युवा इन सेवाओं में आने का सपना देखते हैं, परंतु कुछ ही को यह अवसर मिलता है। ऐसे में वे न केवल प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा और आदर्श भी हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उदाहरण प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी केवल प्रशिक्षण काल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे सेवा काल में साथ चलती है। यदि अधिकारी प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और निष्ठा के साथ कार्य करेंगे तो भारत वैश्विक मंच पर अधिक सक्षम और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित होता रहेगा।
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा: वित्तीय अनुशासन के संरक्षक
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें जनता के विश्वास और वित्तीय विवेक का संरक्षक बताया। उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में जवाबदेही का ढांचा तब अधिक प्रभावी बनता है जब कार्यपालिका और लेखा परीक्षा संस्थानों के बीच संतुलित और सहयोगपूर्ण संबंध हो।
उनके अनुसार, लेखा परीक्षा और कार्यपालिका के बीच प्रभावी साझेदारी सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता और परिणामों की प्रभावशीलता को बढ़ाती है। इससे न केवल संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित होता है, बल्कि नीतिगत उद्देश्यों की प्राप्ति भी सुदृढ़ होती है। राष्ट्रपति ने अधिकारियों से संविधान की भावना तथा सेवा की परंपराओं और मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
भारतीय व्यापार सेवा: राष्ट्रीय हित और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
भारतीय व्यापार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी भूमिका भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय व्यापारिक भागीदार के रूप में स्थापित करने में निर्णायक है। निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजन को गति देना और भारतीय उद्योगों के लिए नवाचार तथा वैश्विक विस्तार का अनुकूल वातावरण तैयार करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नीति निर्णय, प्रत्येक व्यापारिक अवरोध को दूर करने का प्रयास और प्रत्येक समझौता जिसका वे समर्थन करेंगे, वह सीधे तौर पर भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा होगा। अधिकारियों को राष्ट्रीय हित को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक सुदृढ़ता उनके व्यावसायिक निर्णयों से गहराई से जुड़ी है।
रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा: सुरक्षा और तकनीकी उत्कृष्टता
रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा के अधिकारियों से राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी सशस्त्र बलों के लिए विश्व स्तरीय और तकनीकी रूप से उन्नत हथियारों तथा गोला बारूद की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। उनकी भूमिका विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा के संगम पर स्थित है।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे नवाचार आधारित दृष्टिकोण अपनाएं और सशस्त्र बलों को बहु डोमेन एकीकृत संचालन में सक्षम, तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार बल में रूपांतरित करने में योगदान दें। गुणवत्ता आश्वासन की प्रक्रिया में उच्चतम मानकों का पालन ही राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला है।
सेवा भावना से सशक्त होगा भारत
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि इन सेवाओं के अधिकारी जिस जुनून और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हैं, वही शक्ति भारत के भविष्य को दिशा दे सकती है। यदि प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पारदर्शिता, दक्षता और संवेदनशीलता के साथ करेगा तो देश का प्रशासनिक तंत्र और अधिक प्रभावी बनेगा।
राष्ट्रपति भवन में यह संवाद केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि प्रशासनिक सेवा के मूल्यों और दायित्वों की पुनर्पुष्टि का अवसर था। प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए यह संदेश स्पष्ट था कि राष्ट्र सेवा केवल पद की गरिमा नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और आचरण की निरंतर परीक्षा भी है।
भारत के प्रशासनिक, व्यापारिक और रक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने में इन सेवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति के मार्गदर्शन के साथ प्रशिक्षु अधिकारी अब अपने करियर की उस यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं, जहां व्यक्तिगत उपलब्धि से आगे बढ़कर राष्ट्रीय विकास और नागरिक कल्याण सर्वोपरि होगा।