दुनिया जल के वैश्विक दिवालियापन की ओर बढ़ रही है

“जल है तो जीवन है”-यह पंक्ति कोई नारा भर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का शाश्वत सत्य…

“मनुष्य” जल- जन-जमीन- जगत -जंतु – जानवरों का भस्मासुर बन बैठा 

आज मानव-समाज प्रगति के नाम पर प्रकृति का ऐसा विनाश कर रहा है, जो आने वाली…

वैज्ञानिकों ने धातु  प्रदूषण से निपटने में स्पंजी सूक्ष्मजीवों के महत्व को उजागर किया

ताजे पानी के स्पंजी जीव पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण विविध सूक्ष्मजीव समुदाय से…

निर्मल नदियां बहती रहेंगी तो जग-जीवन बचा रहेगा

नदियां भूतल पर प्रवाहित जलस्रोत मात्र नहीं हैं अपितु सभ्यता की जननी हैं, सांस्कृतिक परम्परा का…

ओजोन परतः जीवन की ढाल और उसके संरक्षण का संकल्प

ओजोन परत पृथ्वी पर मानव जीवन की ढाल है, क्योंकि यह समताप मंडलीय परत पृथ्वी को…

मानवाधिकार केवल मनुष्य का ही नहीं वरन सभी जीव जंतुओं का भी है

सभी मनुष्यों में समानता हो, सबको अपने मानव और मानव होने का अधिकार समरूप से प्राप्त…

हवा-पानी की आज़ादी के बिना आज़ादी अधूरी

देश एवं दुनिया के सामने स्वच्छ जल एवं बढ़ते प्रदूषण की समस्या गंभीर से गंभीरतर होती…

वायु प्रदूषण से स्मृति-लोप का बढ़ता खतरा

पर्यावरण की उपेक्षा एवं बढ़ता वायु प्रदूषण मनुष्य स्वास्थ्य के लिये न केवल घातक हो रहा…

प्रकृति पुकार रही हैः अब संरक्षण नहीं, सहभागिता चाहिए

हर वर्ष 28 जुलाई को मनाया जाने वाला विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस हमें प्रकृति, पर्यावरण एवं…

“प्लास्टिक प्रदूषण को मात दो” – एक वैश्विक चुनौती, एक स्थानीय समाधान

हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा…

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