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मृत्यु के बाद भी 4 लोगों को दी नई जिंदगी

39 वर्षीय व्यक्ति ने मृत्यु के बाद लिवर, किडनी, अग्न्याशय और हृदय दान कर मानवता की नई मिसाल पेश की। भारत में प्रति दस लाख लोगों में महज 0.26 प्रतिशत लोग ही अंगदान करते हैं।

विनीता झा कार्यकारी संपादक

नई दिल्ली- पूर्व दिल्ली में मयूर विहार के 39 वर्षीय मणिकंदन अयप्पन को  धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल हॉस्पिटल के इमर्जेंसी वॉर्ड में ले जाया गया। किसी कारण गिरने से इंटरक्रेनियल रक्तस्राव और दौरे के चलते उनकी मृत्यु हो गई, फिर उनके परिवार को इसके बारे में बताया गया और अंगदान को लेकर सलाह दी गई, जिससे वह अपनी मृत्यु के बाद भी किसी और व्यक्ति को जीवन दे सके। आखिरकार उनके पिता उनके अंगों के दान के लिए तैयार हो गए। डॉक्टरों ने नोटो के अनुसार उसके लिवर, किडनी, अग्न्याशय और हृदय को दान देने के अनुकूल बताया, जो इस प्रकार के अंगों में खराबी के चलते अन्य 4 लोगों को नया जीवन दे सकता था।
28 फरवरी 2023 को जिस युवा लड़की को लीवर दिया गया है वो लगभग 5 वर्षों से लीवर फेलियर की समस्या से ग्रसित थी और उसका जीवन घर के चार दीवारों में ही फंस कर रह गया था। वहीं जिस महिला को किडनी दान किया गया है उसने किडनी फेल होने के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी थी और पिछले 1.5 वर्षों से अस्पताल में डायलिसिस पर थी। अब धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में ट्रांसप्लांट किए गए अंगों से दोनों मरीजों नया जीवन मिलेगा। अन्य अंगों को ट्रैफिक पुलिस, कानून व्यवस्था पुलिस और पूर्वी दिल्ली के अधिकारियों के सहयोग से विभिन्न अस्पतालों में ग्रीन कॉरिडोर की मदद से नोटो के माध्यम से अन्य जगह स्थानांतरित किया गया।
धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के विशेषज्ञों की टीम में डॉ. संजय गोजा (लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन), डॉ. मनीष गर्ग (न्यूरोसर्जन), आशुतोष भारद्वाज (क्रिटिकल केयर), डॉ. शफीक अहमद (यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट) डॉ शामिल हैं। एल के झा (नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट), डॉ. यासिर रिजवी (नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट), डॉ. मनीष टंडन (एनेस्थीसिया), डॉ. महेश (हेपेटोलॉजिस्ट), डॉ. नवीन कुमार (हेपेटोलॉजिस्ट) ने मिल कर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आंकड़ों के मुताबिक हर साल लगभग 1.8 लाख लोग गुर्दे की समस्या से पीड़ित होते हैं, वही गुर्दे के प्रत्यारोपण की संख्या लगभग 6000 तक ही रहती है। भारत में हर साल लगभग 2 लाख लोगों की मृत्यु लीवर फेलियर या लीवर कैंसर से होती है, जिनमें से लगभग 10-15 प्रतिशत को समय पर लिवर ट्रांसप्लांट से बचाया जा सकता है। इसलिए भारत में हर साल करीब 25-30 हजार लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन करीब एक हजार पांच सौ ही हो पाते हैं।
कमांडर नवनीत बाली, रीजनल डायरेक्टर, नारायणा हेल्थ नॉर्थ ने बताया कि हम मणिकंदन और उनके परिवार को इस महान कार्य के लिए सलाम करते हैं। उन्होंने कहा जिस रोगी को किडनी के द्वारा नया जीवन मिला है वह एक वर्ष से भी अधिक समय से डायलिसिस पर था और जिस लड़की को लीवर प्राप्त हुआ है वह लगभग 5 वर्षों से लीवर की बीमारियों से जूझ रही थी। इतने सालों से लीवर फेलियर से पीड़ित एक युवा लड़की को प्रत्यारोपण के माध्यम से अब नया जीवन मिलेगा, प्रत्यारोपण को प्रक्रिया को जा रही है। वह पहले एक सरकारी शिक्षिका थी, जिसे किडनी फेल होने के कारण अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने कहा की अंगदान की महत्ता को समाज में हर किसी को समझना अत्यंत आवश्यक है यदि कोई व्यक्ति अंगदान करता है तो उससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती है और जिस प्रकार से मणिकंदन और उनके परिवार द्वारा यह कार्य किया गया उससे कई लोगों को नया जीवनदान मिलेगा। उन्होंने कहा की प्रत्यारोपण के माध्यम से ठीक होने वाले मरीज भी मणिकंदन का आभार व्यक्त कर रहे हैं।

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