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प्राच्य विद्या के ज्ञानराशि को आधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़ने से वैश्विक स्तर पर लाभ होगा-अपर मुख्य सचिव(उच्च शिक्षा) डॉ सुधीर एम बोबड़े

वाराणसी  : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय प्राच्य विद्या का केन्द्र है,यहां से प्राच्य विद्या में निहित ज्ञान राशि को आधुनिक तकनिक से जोड़कर अथवा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना चाहिये। यहां से देश को बहुत आस है, इससे विश्व गुरु बनने का सपना पूर्ण होगा। उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में आज उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्यसचिव डॉ सुधीर एम बोबड़े  ने विश्वविद्यालय का समुचित निरीक्षण कर,योग साधना केन्द्र में विश्वविद्यालय का विस्तार से समीक्षा करते हुये उचित दिशा निर्देश देते हुये व्यक्त किया। उन्होने कहा कि पारम्परिक ज्ञान को आधुनिक तकनिक से जोड़ने से लाभ होगा। 

विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ विभिन्न विन्दुओं पर कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी के अध्यक्षता में  अपर मुख्य सचिव डॉ सुधीर  ने सूक्ष्मता से समीक्षा करते हुये विश्वविद्यालय के 67 एकड़ भूमि पर स्थित इस ऐतिहासिक संस्था के बारे जानकारी प्राप्त किया जिसमें व्यवसायिक पाठ्यक्रम  दीन दयाल कौशल केन्द्र,एमजेएमसी,योगा इन डिप्लोमा  एवं हिन्दू अध्ययन एम ए पाठ्यक्रम की स्थिति परखते हुये विश्वविद्यालय में रिक्त शिक्षकों के सापेक्ष शिक्षकों की नियुक्तियां शीघ्र सुचितापूर्ण एवं पारदर्शितापूर्ण कराये जाने का निर्देश दिया,जिससे पठन-पाठन के कार्य सुचारु रूप से चल सकें।

मुख्यसचिव डॉ सुधीर एम बोबड़े  ने विश्वविद्यालय का समुचित निरीक्षण कर,योग साधना केन्द्र में विश्वविद्यालय का विस्तार से समीक्षा करते हुये उचित दिशा निर्देश देते हुये व्यक्त किया।उन्होने कहा कि पारम्परिक ज्ञान को आधुनिक तकनिक से जोड़ने पर आर्थिक समस्या भी दूर होगी। उन्होने बताया कि यह शहर प्रधानमंत्री जी का संसदीय क्षेत्र एवं स्मार्ट सिटी योजनान्तर्गत है यहां के प्राचीन भवन,क्रीड़ा परिसर मे मिनी स्टेडियम एवं ऑडिटोरियम निर्माण आदि के लिये प्रस्ताव बनाकर स्मार्ट सिटी योजना मे प्रस्तुत करने की जरुरत है।

एसीएस डॉ बोबड़े ने नेट मिटरिंग के माध्यम से 40 प्रतिशत विद्युत बिल की बचत होगी। इसके लिये भी प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही संस्कृत प्रशिक्षण केन्द्र को शीघ्र चलाने हेतु मार्ग दर्शन किया गया। आइकेएस केन्द्र के माध्यम से नवाचार करने पर जोर देते हुये इसके माध्यम से नवीन ज्ञान राशि का उदय होगा। पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु सीएसआर फण्ड मे टाटा एवं अन्य प्रतिष्ठानों से परामर्श कर जुड़ने से लाभ मिलेगा।

इसके साथ साथ  यहां पर संचालित विभिन्न विभाग(शिक्षा शास्त्री,ज्योतिष,वेद,व्याकरण,साहित्य,मीमांसा,ग्रन्थालय विज्ञान,वेदान्त आदि ) निर्माण सम्बंधित,जनसूचना,न्यायालयीय प्रकरण,नई शिक्षा निति 2020,आईक़्यूएसी,रुसा,एनएसएस आदि विभागों की विस्तृत समीक्षा कर उचित दिशा निर्देश दिया।

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ सुधीर एम बोबड़े  ने  सरस्वती भवन मे रखे 96 हज़ार से अधिक दुर्लभ पाण्डुलिपियों को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुये इसमें स्वर्णपत्र आच्छादित, लाक्षपत्र पर कमवाचा, स्वर्णाक्षरयुक्त रास पंचाध्यायी संरक्षित हैं. इसके साथ ही वेद, कर्मकांड, वेदांत, सांख्य योग, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, मीमांसा, न्याय वैशेषिक, साहित्य, व्याकरण और आयुर्वेद की दुर्लभ पांडुलिपियों रखी गई हैं।उन्होने कहा कि इस विश्वविद्यालय की यह अमूल्य निधि है इसमें भारतीय ज्ञान परम्परा के अमूल्य राशि है।इसके संरक्षण के सम्पूर्ण प्रयास करने की जरुरत है,उत्तर प्रदेश सरकार भी सहयोग करती रहेगी।

कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी के साथ उत्तर प्रदेश सरकार के एसीएस डॉ सुधीर एम बोबड़े ने *मुख्य भवन*- ऐतिहासिक मुख्य भवन को देखकर भावविह्वल होकर उसकी सूक्ष्मता से अवलोकन कर कहा कि यह धरोहर अद्भुत है।

वेधशाला में जाकर वहाँ के प्रयोग के बारे ज्योतिष शास्त्र के सहायक आचार्य डॉ राजा पाठक ने विस्तृत जानकारी ,ग्रह,नक्षत्र आदि के बारे में दिया। वेद भवन मे जाकर वेद के विभिन्न कुण्ड को देखे,जिसमें वहाँ के आचार्य प्रो महेंद्र पान्डेय ने वेद के सम्पूर्ण ज्ञान पर प्रकाश डाला। उस दौरान महिला छात्रावास,श्रमण विद्या संकाय,संस्कृत प्रशिक्षण केन्द्र आदि का निरीक्षण किया। 

अपरमुख्य सचिव डॉ सुधीर एम बोबड़े  ने परिसर के स्वच्छता का भी संज्ञान लेते हुये उसकी बारीकियों को भी देखते हुये सम्बंधित अधिकारियों  को उचित निर्देश दिये। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के  अपरमुख्यसचिव डॉ सुधीर एम बोबड़े  के आगमन पर पूर्वांह 9:30 बजे कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत और अभिनंदन किया।उस दौरान कुलसचिव प्रो रामकिशोर त्रिपाठी ,प्रो विजय कुमार पान्डेय,प्रो दिनेश कुमार गर्ग आदि ने भी पुष्पगुच्छ एवं मंगलाचरण के साथ स्वागत किया।

उस समय कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी,कुलसचिव प्रो रामकिशोर त्रिपाठी,उप सचिव एसपी मिश्र,क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ ज्ञान प्रकाश,वित्त अधिकारी जनार्दन पान्डेय,छात्रकल्याण संकायध्यक्ष प्रो हरिशंकर पान्डेय,प्रो हरिप्रसाद अधिकारी,प्रो विधु द्विवेदी,प्रो शम्भु नाथ शुक्ल, विनयाधिकरी प्रो दिनेश कुमार गर्ग,परीक्षा नियन्त्रक प्रो राजनाथ,प्रो हीरक कान्त चक्रवर्ती,प्रो कमला कान्त त्रिपाठी,प्रो राघवेंद्र पान्डेय,प्रो विजय कुमार पान्डेय,डॉ विद्या चन्द्रा ,डॉ विशाखा शुक्ला,डॉ मधुसूदन मिश्र,डॉ राजा पाठक,सहायक कुलसचिव केसलाल,सहायक अभियंता रामविजय सिंह,सहायक कुलसचिव चन्द्र नाथ  आदि उपस्थित थे।

शशींद्र मिश्र , जनसंपर्क अधिकारी

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