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सुखी जीवन का आधार है शाकाहार

प्रस्तुति सोनी राय
एक दिन खाना खाते समय अचानक मेरे दिल में यह ख्याल आया कि मैं इतना मांसाहारी क्यों खा रही हूं? क्या मैं शाकाहारी होकर फिट नहीं रह सकती हूं? तो मेरे दिल से आवाज आई हां, क्यों नहीं? वैसे भी शाकाहारी भोजन में मांसाहारी भोजन की अपेक्षा फैट, सैचुरेटिड फैट, कोलेस्टोल की मात्रा कम होती है, इसलिए शाकाहारों में ओबिसिटी, हार्ट अटैक व उच्च रक्तचाप की संभावना भी कम पाई जाती है। लाल मांस खाने से कोलोन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, हार्ट डिसीज, स्ट्रोक का खतरा अधिक बढ़ जाता है। कैंसर व कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा उस प्रकार के भोजन से अधिक होता है जिसमें सैचुरेटिड फैट अधिक हो और फाइबर की मात्रा कम. क्या आप जानते हैं कि शाकाहारी भोजन से ही विश्व के अधिकतर लोगों को ताकत मिलती है। शाकाहारी भोजन बनाने व पचाने में आसान होता है।
वे लोग जो कि किसी भी प्रकार का मांस या मछली और अण्डे का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें शाकाहारी कहा जाता है। वे लोग फल, सब्जियां, दाल, मेवे, दूध दही आदि का ही सेवन करते हैं। लैक्टो ओवो शाकाहारी लोग वे होते हैं जो कि दुग्ध पदार्थों के साथ-साथ अण्डों का सेवन करते हैं, लेकिन मांस-मछली या किसी भी प्रकार के जीव जंतु का सेवन नहीं करते हैं।
लैक्टो शाकाहारी वे लोग होते हैं जो कि दुग्ध पदार्थों का तो सेवन करते हैं लेकिन अण्डे का नहीं।
ओवो शाकाहारी दुग्ध पदार्थों का इस्तेमाल न करके केवल अण्डे ही खाते हैं।
वे लोग जो कि अण्डे, मांस और मछली को अपने भोजन में शामिल करते हैं, उन्हें मांसाहारी कहा जाता है।
हालांकि, सृष्टि की रचना के साथ ही यह बहस भी चली आ रही है कि शाकाहारी बनना बेहतर है या फिर मांसाहारी होना। वैसे अगर देखा जाए तो दोनों के अपने-अपने फायदे और अपने नुकसान होते हैं। लेकिन अब कई शोधों व अध्ययन से यह साबित हो रहा है कि शाकाहारी होना ही बेहतर है।
पहले के समय में यही माना जाता था कि मांसाहार में अधिक ताकत और उर्जा होती है। इसीलिए अधिकतर लोगों ने मांसाहार को अपना लिया। लेकिन अब चीजें और सोच दोनों ही बदल रहे हैं। वैसे भी, शाकाहार आहार में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो कि हमारे शरीर के विकास के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। साथ ही शरीर में फाइबर की उपयुक्त मात्रा होने से शरीर कई बीमारियों से बचता है।
इसके अलावा मांसाहार का सेवन करने से शरीर में बीमारीयुक्त जीवाणुओं के प्रवेश करने का जोखिम बेहद अधिक रहता है। जबकि शाकाहार खाने वालों को ऐसा कोई खतरा नहीं होता है. एक शोध से यह पता चलता है कि मांसाहार में शाकाहार की अपेक्षा दस प्रतिशत अधिक हाइड्रोक्लोरिक एसिड पाया जाता है. जबकि शरीर के लिए इतना हाइड्रोक्लोरिक एसिड हानिकारक हो सकता है.
शाकाहार लोग अक्सर पतले होते हैं. मांसाहारों की अपेक्षा शाकाहारों में धूम्रपान की आदत भी कम पाई गई है. वैसे भी मानव शरीर की संरचना को इस तरह से बनाया गया है कि वह शाकाहार का उपभोक्ता बनकर रहे. हमारे मोलर दांत हरी पत्तेदार और पौधों से निकलने वाली चीजों को काटने और चबाने के लिए बनाए गए हैं. हमारी पाचन प्रक्रिया भी उसी के अनुरूप है. अगर देखा जाए तो पहले अमेरिका में मांसाहारों की संख्या अधिक थी. लेकिन, वहां अब शाकाहारों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है.
अमेरिकन डाइटिक एसोसिएशन के अनुसार एक ऐसा शाकाहार जिसमें भरपूर पौष्टिक तत्व मौजूद हों, शरीर के लिए बेहद स्वास्थ्यवर्धक होता है और हमें कई प्रकार के रोगों से भी बचाता है. साथ ही शरीर को कई रोगों से लडने की ताकत भी देता है। गौरतलब है कि उत्तरी अमेरिका शाकाहार सोसाइटी ने शाकाहारी जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1977 में 1 अक्टूबर के दिन को शाकाहार दिवस बनाए जाने की शुरुआत की थी। शाकाहारी के पक्ष में यह बात भी साबित होती है कि इसके जरिये प्रकृति व पर्यावरण को नुकसान की बजाय लाभ ही होता है। खाने के लिए पशुओं की सप्लाई में बड़े पैमाने पर जमीन, खाद्यान्न पदार्थों बिजली और पानी की आवश्यकता होगी।
वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जलवायु परिवर्तन को रोकने, प्रदूषण के स्तर को कम करने, जंगलों को काटे जाने से रोकने और दुनियाभर से भुखमरी को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर शाकाहारी खाना खाया जाना जरूरी है। दरअसल, भारत शाकाहार का जन्मस्थान रहा है और विश्व शाकाहार दिवस के मौके पर हमें शाकाहारी होने पर विचार करना चाहिए। इससे हानिकारक गैसों का उत्पादन रुकेगा और जलवायु परिवर्तन भी रुकेगा। साथ ही हम सब लोग चुस्त दुरुस्त रहेंगे। हालांकि इसका कतई मतलब यह नहीं है कि अगर आप शाकाहारी हैं तो आप बिल्कुल स्वस्थ हैं। अगर आप सच में फिट रहना चाहते हैं, अपनी हड्डियों को मजबूत रखना चाहते हैं और रोगमुक्त रहना चाहते हैं तो आप को अपने आहार को भली भांति प्लान करना होगा। शाकाहारी आहार में निम्रलिखित चीजों को शामिल करना चाहिए।
आयरन-
आयरन के लिए चना, गुड़, मूंगफली, मुनक्का, राजमा, दाल, सोयाबीन, टोफू व ब्रोकोली आदि का सेवन करना चाहिए। साथ ही विटामिन सी के स्त्रोत जैसे टमाटर, नींबू, मौसमी, संतरा आदि से शरीर को आयरन सम्मिलित करने में मदद मिलती है।
कैल्शियम-
कैल्शियम प्राप्त करने के लिए आप को दूध व दही का सेवन करना चाहिए। टोफू, सोयामिल्क, हरी सब्जियों से भी आप अपना कैल्शियम भंडार भर सकते हैं।
प्रोटीन-
प्रोटीन के लिए अनाज, दूध, दही, दालें, राजमा, टोफू, बींस, अनाज, सोयाबीन आदि को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है।
विटामिन 12-
यह शरीर के लिए बेहद आवश्यक तत्व है और इसके कुछ सीमित ही शाकाहार स्त्रोत हैं जैसे सोया मिल्क और फोर्टिफाइड ब्रेकफास्ट सीरियल्स आदि।
जिंक-
इसके लिए आप को दुग्ध पदार्थों के साथ-साथ सोया, नट्स, टोफू आदि लेना चाहिए।
भरपूर अनाज का सेवन करें जैसे ब्राउन ब्रेड, ब्राउन चावल. हर प्रकार का अनाज भी खाने में शामिल करना चाहिए।
विभिन्न प्रकार की चीजों का सेवन करें।
दुग्ध पदार्थों में भी लो फैट चीजों का ही सेवन करें उच्च फैट वाली चीजें या मीठे का कम इस्तेमाल करें।

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