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भारतीय युवाओं की ऊर्जा एवं क्षमता का उपयोग अमृत काल के लिए किया जाना चाहिएः डॉ. जितेंद्र सिंह

भारतीय अनुसंधान, भारतीय डेटा और भारतीय समस्याओं का भारतीय समाधान वर्तमान समय की मांग हैः डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान, राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले सत्तर वर्षों के दौरान देश में पहली बार रोग निवारक स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कुशल नेतृत्व ही रहा है कि केवल दो साल की अवधि में, भारत ने कोविड से बचाव के लिए दो डीएनए टीके तथा एक नासिका से दिए जाने वाले टीके का उत्पादन किया है। उन्होंने अमृत काल के निर्माता होने के लिए युवाओं की बड़ी भूमिका और जिम्मेदारी निभाने पर बल दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय युवाओं की ऊर्जा एवं क्षमता का उपयोग अमृत काल के लिए किया जाना चाहिए। डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में थायरोकॉन कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए यह बात कही।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू में गवर्नमेंट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के सहयोग से जम्मू डॉ. क्टर फाउंडेशन द्वारा थायरोकॉन पर सीएमई आयोजित करने के लिए जम्मू के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शशि सूदन शर्मा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि थायरोकॉन में अद्यतित जानकारी थायरॉइड के विकारों से ग्रसित रोगियों के लिए नैदानिक प्रबंधन में प्रगति को दर्शाएगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि भारत के अन्य हिस्सों की तरह ही जम्मू और कश्मीर में थायरॉइड विकार एक आम स्वास्थ्य समस्या है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस एंड क्लिनिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जम्मू और कश्मीर में थायरॉइड विकारों का प्रसार लगभग 12.3 प्रतिशत है, जिसमें हाइपोथायरायडिज्म सबसे आम प्रकार की समस्या है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने दो अन्य मुद्दों को भी उठाया, जिनमें से पहला नैदानिक क्षमताओं में वृद्धि के कारण नैदानिक चिकित्सा शिक्षण का बदलाव है। अब जांच की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद ही नैदानिक विवरणों का अनुमान लगाया गया है। दूसरा मुद्दा भारतीय अनुसंधान, भारतीय डाटा और भारतीय समस्याओं के भारतीय समाधान का है। उन्होंने पश्चिम देशों द्वारा भारतीय डाटा का इस्तेमाल करने का भी जिक्र किया। भारत के चिकित्सा स्वास्थ्य मुद्दों के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने के उद्देश्य से अलग-अलग प्रकार के भारतीय डाटा का उपयोग करना वर्तमान समय की आवश्यकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय चिकित्सकीय समाज के बीच एकीकरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय ने हमेशा ही इस क्षेत्र की स्वास्थ्य स्थिति में समग्र सुधार के लिए अग्रणी भूमिका निभाई है। इस तरह के प्रमुख संस्थानों को थायरॉइड रोग का उपचार करने के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान एवं उपचार केंद्र स्थापित करने पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य संसाधनों की कोई कमी नहीं है और नया भारत स्वास्थ्य देखभाल के लिए अवसरों का युग है। यहां पर यह जानकारी देना महत्वपूर्ण कि डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रयासों के फलस्वरूप ही आईआईआईएम जम्मू कैनबिस के पौधे पर आधारित दर्द निवारक और एमडीआर-टीबी जैसी विशेष अनुसंधान परियोजनाओं के लिए जम्मू के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय के साथ सहयोग कर रहा है। उनके कड़े प्रयासों से ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जम्मू ने प्रौद्योगिकी विकास के लिए आईआईटी जम्मू तथा विपणन कार्य के लिए आईआईएम जम्मू के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस अवसर पर उपस्थित अन्य अतिथियों में गेस्ट ऑफ ऑनर एएफएमसी पुणे के निदेशक एवं कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेन्द्र कोतवाल, जम्मू के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय की प्राचार्या व डीन डॉ. शशि सूदन शर्मा, आयोजन अध्यक्ष डॉ. रतन पी. कुडयार, सेवानिवृत्त चिकित्सा विभागाध्यक्ष और निदेशक प्राचार्य एएससीओएमएस तथा आयोजन सचिव जम्मू के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक एंडोक्रिनोलॉजी डॉ. सुमन कोतवाल शामिल थीं।

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