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आदतें ही आदमी का व्यक्तित्व बनाती हैं

येस! इट मैटर्स

हर इंसान के जीवन में कुछ अच्छी आदतें होती है और कुछ बुरी आदतें होती हैं । इस से पहले कि मैं आपको अपनी अच्छी और बुरी आदतों के बारे में बताऊँ पहले ये समझते है कि आदतें किस तरह से गहराई पकड़ती है । सोचिए कि आपके सामने टेबल पर बर्फ़ का क्यूब रखा है । कमरे में इतनी ठंडक है कि आप अपनी सांस को देख सकते हैं और यह तापमान पच्चीस डिग्री है । कमरा धीरे-धीरे गरम होने लगता हैण्ण्ण् छब्बीस डिग्रीए सत्ताईस डिग्रीए अट्ठाईस डिग्रीए आपके सामने रखी टेबल पर बर्फ का क्यूब अभी भी है । उनतीस डिग्रीए तीसण्ण्ण् इक्कत्तीसण्ण्ण् एअब तक कुछ नहीं हुआ । फिर बत्तीस डिग्री । बर्फ पिघलने लगती है । इससे पहले एक-एक डिग्री बढ़ने से इतना अंतर नहीं पड़ा था लेकिन इस एक डिग्री ने बड़ा परिवर्तन कर दिया ।

पावेल गर्ग का कहना है की सफलता के पल अक्सर पूर्व के कामों के परिणाम ही होते हैं जो बड़े बदलाव के लिए संभावनाएँ तैयार करते हैं और यह स्थिति हर जगह देखने को मिल जाएगी । कैंसर अपने जीवन का 80 फीसदी भाग तो पता चले बिना ही बिताता है लेकिन फिर कुछ ही माह में शरीर को खत्म कर देता है । बांस पहले पाँच वर्षो में बड़ा हुआ नहीं दिखता है क्योंकि वह जमीन के भीतर जड़ें जमाता रहता है और अगले छह हफ्ते में नब्बे फीट तक बढ़ जाता है ।

इसी प्रकार से आदतें भी तब तक कोई फर्क नहीं डालती है जब तक कि आप एक अहम सीमा को पार नहीं कर जाते और नए स्तर नहीं पा लेते । किसी अनुसंधान या तलाश के आरंभ और मध्य में अक्सर निराशा की खाई होती है । आप सीधी रेखा में प्रगति की आशा करते हैं और पहले दिनए एक हफ्ते और यहाँ तक कि कई माह तक जब बदलाव अप्रभावी दिखते हैं तो आप कुंठित हो सकते हैं । ऐसा नहीं लगता है कि आप कहीं जा रहे हैं । यह मूल कारणों में से एक है कि क्यों स्थाई आदतें बनाना इतना मुश्किल होता है । लोग कुछ छोटे बदलाव करते हैं और उन्हें ठोस नतीजा नहीं मिलता है तो वे इसे रोक देने का फैसला करते हैं । आप सोचते हैं “मैं कई महीने तक हर दिन दौड़ा तो मैंने अपने शरीर में बदलाव क्यों नहीं देखा घ्” जब इस तरह के विचार हावी होते हैंए तो अच्छी आदतों को दरकिनार करने का बहाना मिल जाता हैए लेकिन अर्थपूर्ण बदलाव के लिए अच्छी आदतों को लंबे समय तक बनाए रखना होता है।

एक बच्चा जो 1967 में पैदा हुआए तब उसके पिताजी 58 रुपए महीने की नौकरी करते थे । वह चाहे कितना भी किस्मत वाला होताए शायद भगवान भी उसके सामने प्रकट होकर उससे बोलते कि तू वरदान मांगए क्या मांगता हैए तो भी वह बच्चा हज़ार-दस हज़ार रुपए महीने से ऊपर नहीं मांग सकता था । मगर किस्मत ने उसे इतनी खुशकिस्मती बख्शी कि वह बच्चा आज 300 करोड़ की नेट वर्थ वाली 3 कंपनियों का मालिक है और अपनी टीम को एक करोड़ से ज़्यादा का मासिक वेतन का भुगतान करता है । वह बच्चा मैंए यानि पावेल गर्ग हूँ ।  यह किताब मेरी जीवन यात्रा तथा इसके उतार-चढ़ाव को कुछ पन्नों मे समेटने की कोशिश हैए आशा हैए मैं सफल रहा ।

डायमण्ड बुक्स द्वारा प्रकाशित बुक “येस! इट मैटर्स  जिसके लेखक है पावेल गर्ग । यह बुक्स पावेल गर्ग ने अपने जीवन के घटनाक्रमों को एक किताब का रूप दिया है। पावेल गर्ग का कहना है कि मेरा बहुत पहले से ही मन था कि मैं अपने जीवन के घटनाक्रमों को एक किताब का रूप दूँ मगर कभी समय नही लग पायाए कभी किताब लिखने के प्रोसेस का पता नही लग पाया तो लिख नहीं पायाए फिर 2022 मे डॉण् तिलक तंवर के हौसला अफ़जाई तथा मदद से आखिरकार किताब लिखना शुरू कियाए फाइनल रिजल्ट आपके हाथ में है । मैं डॉण् तिलक तंवर और त्ण्श्रण् आरती मल्होत्रा के पुस्तक लेखन के दौरान दिए योगदान के लिए आभारी हूँ । 

मैं अपने परिवारए मित्रों तथा बिजनेस के सभी साथियों का हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने पग पग पर न केवल मेरा साथ दिया बल्कि जहाँ तक भी संभव हुआए मार्गदर्शन भी किया । सबसे अधिक मैं अस्तित्व के प्रति अनुग्रहित हूँ जिसने एक साधारण मनुष्य को भौतिक जीवन तथा आध्यात्मिकता के सर्वोच्च शिखरों को छूने के काबिल बनाया ।

उमेश कुमार सिंह

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