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वस्त्र मंत्रालय के “जीआई एंड बियॉन्ड-2024” शिखर सम्मेलन में भारत की जीआई हथकरघा और हस्तशिल्प विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया

वस्त्र मंत्रालय के हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद (HEPC) के सहयोग से आयोजित “जीआई एंड बियॉन्ड-2024” शिखर सम्मेलन 25 नवम्बर को नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में भारत के भौगोलिक संकेत (GI) टैग वाले हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण करने वाले कारीगरों के असाधारण कौशल और उनके वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला गया।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में माननीय केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने किया। उन्होने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने में जीआई उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डाला और जीआई वस्तुओं के विपणन के लिए विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन जैसी आकर्षक पर्यटन अवधारणाओं पर बल दिया। केन्द्रीय मंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों से 10 कारीगरों को जीआई प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर, श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत को अपना पहला जीआई प्रमाणन 2004 में मिला था और अब हमारा ध्यान कारीगरों की आय बढ़ाने और जीआई टैग वाले उत्पादों को वैश्विक स्तर पर लाने पर है। मंत्री ने आह्वान किया कि हमें जीआई टैग वाले उत्पादों को “गांव से वैश्विक” बनाना चाहिए। श्री सिंह ने जीआई उत्पादों के विपणन के महत्व और प्रचार के लिए हमारे कारीगरों की रचनात्मकता के बारे में दुनिया को बताने और और जीआई टैग वाले उत्पादों को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन मे शामिल करने पर जोर दिया। श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि गुजरात के कच्छ रण उत्सव की तरह राज्यों को जीआई टैग किए गए उत्पादों के प्रचार और विपणन के लिए विशेष व्यापार उत्सव आयोजित करना चाहिए। उन्होने माननीय प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि विकास के साथ-साथ हमें विरासत की भी आवश्यकता है। मंत्री ने कहा कि जीआई टैग हमारी विरासत का प्रतिनिधित्व करता है और जैसे-जैसे हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, हमारी विरासत हमारी पूंजी है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कपड़ा राज्य मंत्री श्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र केवल उद्योग नहीं हैं, बल्कि वे हमारे देश की विविधता, रचनात्मकता और विरासत के प्रमाण हैं। प्रत्येक शिल्प और प्रत्येक कारीगर हमें अपने लोगों और अपनी परंपराओं की कहानी बताते हैं। जीआई सशक्तिकरण का एक साधन है और हमारी विरासत की ढाल और वैश्विक बाजार के लिए एक साधन है।

इस अवसर पर वस्त्र सचिव श्रीमती रचना शाह, हथकरघा विकास आयुक्त डॉ. एम. बीना , हस्तशिल्प विकास आयुक्त सुश्री अमृत राज , वस्त्र आयुक्त सुश्री रूप राशि तथा पेटेंट, ट्रेडमार्क एवं जीआई महानियंत्रक श्री उन्नत पंडित भी उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम में 4 महाद्वीपों के 13 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और लगभग 20 विदेशी खरीदार, 50 निर्यातक और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, 70 जीआई अधिकृत उपयोगकर्ता और राज्य सरकारों सहित विभिन्न विभागों के 40 अधिकारी शामिल हुए। उद्योग के विभिन्न हितधारकों के विविध प्रतिनिधित्व के कारण जीआई-टैग उत्पादों के लिए बाजार की संभावनाओं का विस्तार करने के लिए सार्थक चर्चाओं और सहयोग को बढ़ावा मिला।

व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों पर तकनीकी सत्र में भारत के पारंपरिक वस्त्र और शिल्प की वैश्विक अपील को बढ़ाने के लिए आधुनिक व्यापार प्रथाओं के साथ पारंपरिक हस्तनिर्मित और दस्तकारी कौशल के एकीकरण पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान, विदेशी खरीदारों और घरेलू निर्यातकों ने भौगोलिक संकेत (जीआई) के अधिकृत उपयोगकर्ताओं के साथ बातचीत की। विदेशी खरीदारों ने कार्यक्रम की सराहना की, जिसमें भारत की जातीय हस्तनिर्मित और दस्तकारी परंपरा की कहानी को खूबसूरती से बताया गया। घरेलू निर्यातकों ने कहा कि प्रदर्शित उत्पाद काफी प्रभावशाली और मनमोहक हैं। निर्यातकों और विदेशी खरीदारों ने जीआई उत्पादों की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ावा देने और उसके प्रचार में यथासंभव सहायता देने की इच्छा व्यक्त की।

एक विशेष विषयगत प्रदर्शन में भारत भर के जीआई-टैग वाले हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की एक श्रृंखला प्रदर्शित की गई, जिसमें जीआई धारकों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन में इन कारीगर उत्पादों की क्षेत्रीय विशिष्टता और सांस्कृतिक मूल्य पर प्रकाश डाला गया, जिसे उपस्थित लोगों ने काफी सराहा।

शिखर सम्मेलन का समापन भारत के हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को निरंतर समर्थन देने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जीआई उत्पादों की विरासत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फलती-फूलती रहेगी।

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