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प्लास्टिक मुक्त भारत की ओर सशक्त कदम : शहरों, पहाड़ों और द्वीपों से उठ रही स्थिरता की प्रेरणादायक लहर

तेजी से बढ़ते प्लास्टिक कचरे की चुनौती का सामना कर रहा भारत अब न केवल समाधान ढूंढ रहा है, बल्कि इस संकट को सुनहरे अवसर में बदलने की दिशा में अग्रसर है। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत देश भर में एक के बाद एक नवाचारों और जनभागीदारी से ओतप्रोत पहलें सामने आ रही हैं, जो न केवल पर्यावरण के संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि स्थायी भविष्य की नींव भी रख रही हैं।

त्रिपुरा के कमालपुर नगर पंचायत की मिसाल

कमालपुर नगर पंचायत, त्रिपुरा में एकल-उपयोग प्लास्टिक पर निर्भरता खत्म करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। यहां पीबीएटी (PBAT) से बने कम्पोस्टेबल बैग्स को एक टिकाऊ विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये बायोडिग्रेडेबल, रसायन-मुक्त बैग 180 दिनों के भीतर पर्यावरण में विघटित हो जाते हैं और सीआईपीईटी से प्रमाणित भी हैं। पारंपरिक प्लास्टिक के विपरीत, जो सदियों तक मिट्टी और जल को प्रदूषित करता है, ये बैग स्थिरता और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कदम हैं। इन बैग्स की कीमत थोक में ₹145 और खुदरा में ₹160 प्रति किलोग्राम है। नगर पंचायत लोगों को जागरूक कर इन्हें अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

त्रिची में कपड़े के थैलों की वापसी

त्रिची सिटी कॉरपोरेशन ने जीआईजेड इंडिया के सहयोग से एक लक्षित अभियान चलाया, जिसमें तेन्नूर, केके नगर और वोरैयूर जैसे किसान बाजारों में 220 विक्रेताओं को जोड़ा गया। उन्हें एसयूपी (सिंगल यूज प्लास्टिक) के खतरों के बारे में जानकारी दी गई और थुनिप्पई थिरुविझाई नामक पहल के तहत पुन: प्रयोज्य कपड़े के थैलों को बढ़ावा दिया गया। इसके नतीजे भी प्रभावशाली रहे — तेन्नूर में एक साल में 2,200 किलोग्राम, केके नगर में चार महीनों में 620 किलोग्राम और वोरैयूर में छह महीनों में 300 किलोग्राम प्लास्टिक का प्रयोग टल गया।

केदारनाथ में डिजिटल जमा-रिफंड सिस्टम (DRS)

चार धाम यात्रा के प्रमुख स्थलों में से एक केदारनाथ में मई 2022 से लागू की गई डिजिटल डिपॉज़िट रिफंड प्रणाली (DRS) एक अनोखी मिसाल बनकर उभरी है। दुकानदारों को प्लास्टिक की बोतलों और मल्टी-लेयर्ड पैकेजिंग (MLP) पर ₹10 जमा कराना होता है, जिसे QR कोड आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से ग्राहक को वापस किया जाता है। प्रयुक्त बोतलें और पैकेजिंग निर्धारित बिंदुओं या रिवर्स वेंडिंग मशीनों पर जमा की जाती हैं और फिर उन्हें रीसाइक्लिंग केंद्रों तक पहुँचाया जाता है। यह पहल अब गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ तक विस्तारित हो चुकी है। अब तक 20 लाख प्लास्टिक बोतलें रीसाइकिल की गई हैं, जिससे 66 मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन रोका गया और 110 से अधिक रोजगार सृजित हुए। इससे अनौपचारिक कचरा श्रमिकों की आय में 37.5% की वृद्धि भी हुई है।

अंडमान-निकोबार में बाय-बैक मॉडल

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्लास्टिक दूध पाउच के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक बाय-बैक योजना शुरू की गई। इसके तहत उपभोक्ताओं को इस्तेमाल किए गए पाउच के बदले ताज़ा दूध या छूट दी जाती है। यह योजना एएनआईआईडीसीओ और एसवीपीएमसी के सहयोग से संचालित हुई। इसके माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाकर पुनर्चक्रण और जिम्मेदार निपटान की संस्कृति को बढ़ावा दिया गया। नवंबर 2024 तक 17,600 पाउच एकत्र किए गए, जिनके बदले में 352 लीटर दूध वितरित किया गया।

पटियाला में बहुस्तरीय प्लास्टिक से चिपबोर्ड निर्माण

पटियाला में स्थापित प्लास्टिक रीसाइक्लिंग सुविधा (PRF) ने बहुस्तरीय प्लास्टिक (MLP) को चिपबोर्ड में बदलने का अभिनव तरीका अपनाया है। यह प्रक्रिया गर्म और ठंडे दबाव तकनीक पर आधारित है, जिससे बनाए गए बोर्ड प्लाईवुड का पर्यावरणीय विकल्प बनकर उभरे हैं। इनका प्रयोग फर्नीचर, छत निर्माण और अस्थायी ढांचों में किया जाता है। इस केंद्र की 10 टन दैनिक प्रसंस्करण क्षमता है, जो प्रतिदिन 75 से 100 चिपबोर्ड तैयार करता है। यह पहल न केवल लैंडफिल को कम करती है, बल्कि उद्योगों में स्थिरता की संस्कृति भी गढ़ती है।

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