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भारत ने CERN के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में सफलता पर मनाया गर्व, ब्रेकथ्रू पुरस्कार 2025 में अहम भूमिका

मौलिक भौतिकी में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक, ब्रेकथ्रू पुरस्कार 2025 से सम्मानित लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) के प्रयोगों में भारत ने एक बार फिर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवाया है। सीईआरएन में संचालित ATLAS, CMS, ALICE और LHCb प्रयोगों के लिए यह पुरस्कार 2015 से 2024 के बीच के Run-2 डेटा पर आधारित महत्वपूर्ण अनुसंधान को मान्यता देता है।

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए 3 मिलियन डॉलर की राशि प्रदान की गई है, जिसका उपयोग सदस्य संस्थानों के पीएच.डी. छात्रों को अनुदान के रूप में किया जाएगा। इससे उभरते वैज्ञानिकों को सीईआरएन में काम करने का अवसर मिलेगा और वे इस ज्ञान को अपने देश लौटकर आगे बढ़ाएंगे।

सर्न में नटराज प्रतिमा

भारत की निर्णायक भूमिका

भारत ने CMS और ALICE प्रयोगों में बौद्धिक, तकनीकी और हार्डवेयर स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दिया। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), बीएआरसी, आईआईटी, आईआईएसईआर, विश्वविद्यालयों और अन्य प्रमुख संस्थानों ने न केवल डिटेक्टरों के विकास में, बल्कि डेटा विश्लेषण, कंप्यूटिंग और ग्लोबल कोलैबोरेशन में भी अग्रणी भूमिका निभाई।

विशेषकर ALICE प्रयोग में भारतीय टीम ने फोटोन मल्टीप्लिसिटी डिटेक्टर (PMD) और म्यूऑन स्पेक्ट्रोमीटर विकसित किए, जो क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा के अध्ययन में सहायक हैं। वहीं CMS प्रयोग में भारत ने ट्रिगर सिस्टम, डेटा अधिग्रहण, और सिलिकॉन प्रीशॉवर डिटेक्टर जैसे अत्याधुनिक घटकों का निर्माण किया।

भारत और CERN का दशकों पुराना रिश्ता

भारत और CERN का वैज्ञानिक सहयोग 1960 के दशक से चला आ रहा है। 1991 में एक औपचारिक वैज्ञानिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए, और 2017 में भारत CERN का एसोसिएट सदस्य बन गया। यह सहयोग त्वरक तकनीक, डेटा प्रोसेसिंग, और मानव संसाधन प्रशिक्षण तक फैला हुआ है।

एएलआईसीई प्रयोग

2004 में भारत ने CERN को शिव नटराज की 2 मीटर ऊंची कांस्य प्रतिमा भेंट की, जो भारतीय संस्कृति और ब्रह्मांडीय विज्ञान के अद्भुत संगम का प्रतीक है।

ब्रेकथ्रू अवार्ड: वैश्विक सम्मान, भारत को गर्व

इस पुरस्कार ने हिग्स बोसोन, मामूली और भारी कणों, क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज्मा और मानक मॉडल से परे भौतिकी की समझ को और मजबूत किया है। भारत की ओर से 110+ पीएचडी थीसिस और 130 से अधिक शोध प्रकाशन Run-2 डेटा पर आधारित हैं, जो देश की प्रतिभा को दर्शाते हैं।

सीएमएस प्रयोग

परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. ए.के. मोहंती ने इस अवसर को “वैज्ञानिक दृढ़ता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उत्सव” बताया, वहीं विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने इसे भारतीय विज्ञान की वैश्विक मान्यता बताया।

आगे की राह: CMS और ALICE में नए योगदान

भारत अब CMS के Phase-2 अपग्रेड और ALICE के FOCAL डिटेक्टर विकास में भी योगदान दे रहा है। इससे मानक मॉडल से परे भौतिकी की खोज में तेजी आएगी और भारतीय वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक शोध का द्वार और अधिक खुलेगा।

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