‘देश पुकार रहा है’ : देशप्रेम, बलिदान और प्रेरणा की जीवंत गाथा

जहाँ हर कहानी कहती है—देश सबसे पहले : ‘देश पुकार रहा है’

आज के समय में, जब तेज़ रफ्तार जीवन, तकनीक और व्यक्तिगत व्यस्तताएँ अक्सर हमें सामूहिक सरोकारों से दूर ले जाती हैं, ऐसे दौर में देशप्रेम को संवेदना, प्रेरणा और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करने वाला साहित्य अत्यंत आवश्यक हो जाता है। वरिष्ठ बाल एवं किशोर साहित्यकार प्रकाश मनु की नवीन कृति ‘देश पुकार रहा है’ इसी आवश्यकता की सार्थक पूर्ति करती है। यह पुस्तक केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति कर्तव्य, त्याग और समर्पण की जीवंत पुकार है।

प्रकाश मनु
प्रकाश मनु

प्रकाश मनु हिंदी बाल साहित्य की उस समृद्ध परंपरा के लेखक हैं, जिनकी रचनाओं में कल्पना, भावुकता और जीवन-मूल्य एक साथ स्पंदित होते हैं। उनकी कहानियाँ बच्चों को केवल मनोरंजन नहीं देतीं, बल्कि सोचने, महसूस करने और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक उनकी नई कृति देश पुकार रहा है ((देश-प्रेम की अनूठी गाथाएँ)) में यह गुण और भी प्रखर रूप में सामने आता है, जहाँ लेखक ने देशप्रेम को उपदेशात्मक नहीं, बल्कि संवेदनात्मक और कथात्मक रूप में प्रस्तुत किया है।

पुस्तक की पृष्ठभूमि में लेखक की गहरी चिंता स्पष्ट दिखाई देती है—क्या आज देशभक्ति केवल सरकार की जिम्मेदारी रह गई है? क्या नागरिकों, विशेषकर बच्चों और किशोरों का कोई दायित्व नहीं? इन्हीं प्रश्नों से जन्मी यह कृति देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ती हुई कहानियों की एक प्रभावशाली शृंखला प्रस्तुत करती है।

पुस्तक की पहली और अत्यंत मार्मिक कथा ‘भारत माता की पुकार पर’ स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि में रची गई है। इसमें गांधीजी के शिष्य हीरेन दा और निर्भीक बालिका वनमाला के माध्यम से 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की जीवंत तस्वीर उभरती है। वनमाला का साहस, उसकी वाणी की ललकार, स्वदेशी रेडियो का संचालन और जेल में रहकर भी चेतना जगाने का उसका संकल्प पाठक को भीतर तक झकझोर देता है। यह कथा न केवल इतिहास को जीवित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती।

श पुकार रहा है

‘जब भानुपुरा में लहराया तिरंगा’ और ‘शहीद हरनाम को सलाम’ जैसी कहानियाँ बाल क्रांतिकारियों के अद्भुत साहस और बलिदान को सामने लाती हैं। छोटे-से बच्चे हरींद्र और हरनाम जिस निर्भीकता से अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देते हैं, वह पढ़ते समय रोमांच और गर्व दोनों का अनुभव कराती है। इन कथाओं से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरता है कि स्वतंत्रता संग्राम केवल बड़ों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बच्चों ने भी उसमें अपने प्राणों की आहुति दी।

पुस्तक की विशेषता यह है कि यह केवल अतीत की वीरगाथाओं तक सीमित नहीं रहती। ‘देश के लिए’, ‘बच्चा पार्टी ने कर दिया कमाल’ और ‘और फिर पकड़े गए दुश्मन के जासूस’ जैसी कहानियाँ आज़ाद भारत के बच्चों की सतर्कता, सूझबूझ और देशभक्ति को रेखांकित करती हैं। ये कथाएँ बताती हैं कि देशसेवा केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन में भी सतर्क नागरिक बनकर की जा सकती है।

विज्ञान और कल्पना का सुंदर समन्वय करती कहानियाँ—‘जब मंगल ग्रह पर पड़े भारतवासियों के कदम’, ‘चंद्रलोक पर फहराया तिरंगा’ और ‘चले जब शब्दबेधी तीर’—किशोर पाठकों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं। विज्ञान फंतासी के माध्यम से लेखक यह संदेश देते हैं कि भारत का भविष्य केवल धरती तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तक फैला है, और उसमें भी हमारे बच्चे देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कहानियाँ इस पुस्तक को और भी व्यापक बनाती हैं। ‘सुनो पुकार धरती की’ में गोपा दादी का हरियाली अभियान पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक गाथा है, वहीं ‘स्वच्छता की निर्मल परी है जानकीबाई’ स्वच्छता को जन-आंदोलन में बदलने की प्रेरणा देती है, जिसकी गूँज यूनेस्को तक पहुँचती है। ‘फिर जला घर-घर में ज्ञान का दीया’ शिक्षा और साक्षरता के महत्व को भावपूर्ण ढंग से रेखांकित करती है।

भाषा की दृष्टि से ‘देश पुकार रहा है’ सरल, प्रवाहमयी और प्रभावशाली है। लेखक की शैली ऐसी है कि बच्चे, किशोर, युवा और वयस्क—सभी पाठक इससे समान रूप से जुड़ पाते हैं। हर कहानी के अंत में पाठक के मन में एक प्रश्न, एक संकल्प और एक नई ऊर्जा जन्म लेती है।

समग्र रूप से देखें तो ‘देश पुकार रहा है’ एक ऐसी पुस्तक है, जो देशप्रेम को केवल भावना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक स्कूलों, पुस्तकालयों और हर उस घर में होनी चाहिए, जहाँ बच्चों को केवल सफल नहीं, बल्कि सच्चा नागरिक बनते देखना चाहा जाता है। प्रकाश मनु की यह कृति आने वाली पीढ़ियों में देश के प्रति प्रेम, सम्मान और कर्तव्यबोध जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पुस्तक पढ़ी ही नहीं, बल्कि साझा की जानी चाहिए।

पुस्तक : देश पुकार रहा है (देश-प्रेम की अनूठी गाथाएँ)

लेखक : प्रकाश मनु

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स

उमेश कुमार सिंह
उमेश कुमार सिंह
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