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बिलासपुर में प्रदेश का पहला रामसर साइट बना कोपरा जलाशय

बिलासपुर: न्यायधानी स्थित कोपरा जलाशय को अब छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है। रामसर साइट का दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है जो जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, और पर्यावरणीय महत्व के दृष्टिकोण से वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यह क्षेत्र 209.753 हेक्टेयर में फैला हुआ है।

बिलासपुर में प्रदेश का पहला रामसर साइट बना कोपरा जलाशय

शहर से लगा हुआ कोपरा जलाशय की पारिस्थितिकी

बिलासपुर कोपरा जलाशय की यह सफलता छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। कोपरा जलाशय मुख्य रूप से वर्षा जल और छोटे नालों से भरता है जो स्थानीय ग्रामीणों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ उपजाऊ भूमि वाले कई गांवों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। यह क्षेत्र वर्षभर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों, जलचर जीवों और वनस्पतियों का सुरक्षित आवास बना रहता है। खासकर प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या यहां हर वर्ष उपस्थिति दर्ज की जाती है, जिससे इसकी जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध मानी जाती है। पक्षियों की इसी मौजूदगी को देखते हुए ही इस जलाशय को पक्षियों के लिए संरक्षित करने कई साल से मांग उठ रही थी। विशेषकर पक्षी प्रेमी, जो प्रतिदिन यहां पहुंचते हैं। इतना ही नहीं यहां की अव्यवस्थाएं, अतिक्रमण को लेकर वन अफसरों से लगातार मुलाकात भी करते थे। अब मेहनत रंग लाई है। जलाशय की विशिष्ट पारिस्थितिकी, स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता तथा जल परितंत्र की समृद्धि ने इसे रामसर मान्यता के योग्य बनाया है। कोपरा जलाशय के रामसर साइट घोषित होने से प्रदेश में वेटलैंड संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और इको-टूरिज्म के नए अवसर विकसित होंगे। इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा व विकास को बढ़ावा मिलेगा।

कोपरा में 180 प्रवासी व अप्रवासी पक्षी भरते हैं उड़ान

कोपरा जलाशय प्रवासी व अप्रवासी पक्षियों का पसंदीदा आशियाना है। यहां 180 प्रजातियों के परिंदे उडान भरते हैं। बीते नवंबर माह में पक्षी प्रेमियों ने एक बर्ड वाक का आयोजन किया था। इस दौरान उन्हें नौ प्रजाति के प्रवासी पक्षी नजर आए। इसके अलावा 10 प्रजाति के अप्रवासी पक्षियों का दीदार हुआ। जिन प्रवासी पक्षियों की उन्होंने पहचान की उनमें रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, गैडवाल, यूरेशियन कूट, गर्गेनी, वेस्टर्न हैरियर, ग्रे वैगटेल, व्हाइट-ब्राउड वैगटेल, वेस्टर्न येलो वैगटेल, पैडीफील्ड पिपिट शामिल हैं।

पक्षियों के लिए संरक्षित होने पर अब यह होगा

  • आसपास के क्षेत्र से अतिक्रमण हटाए जाएंगे।
  • मछली पालन बंद होगा।
  • पर्यटकों के लिए वाच टावर बनेगा।
  • इंटरप्रिटिशन सेंटर अस्तित्व में आएगा।
  • कैफेटिरया की सुविधा मिलेगी।
  • गाइड की सुविधा मिलेगी, जो पर्यटकों को पक्षी व जलाशय की विशेषताओं से अवगत कराएंगे।

कोपरा जलाशय की विशेषताएं

कोपरा जलाशय सालों से प्रवासी व अप्रवासी पक्षियों का प्रवास रहा है। हालांकि विकास के दौरान करीब सड़क से लेकर कई निर्माण कार्य हुए। लेकिन, पक्षियों ने माइग्रेशन का रूट नहीं बदला। आज भी शीतकालीन सीजन में सात समुंदर पार कर पक्षी इस ठिकाने पर पहुंचकर सुकून महसूस करते हैं। वर्तमान में कुछ प्रजातियां आ चुकी हैं। प्रवास पक्षी मार्च महीने से अपने स्थानीय ठिकाने पर लौटने लगते हैं।

“कोपरा जलाशय को रामसर दर्जा मिलना “छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047” के अंतर्गत वर्ष 2030 तक प्रदेश के 20 वेटलैंड्स को रामसर साइट घोषित कराने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरक प्रगति है। यह उपलब्धि राज्य की पर्यावरण-संरक्षण नीति और दीर्घकालिक दृष्टि को भी सुदृढ़ करती है।इस वैश्विक मान्यता से प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही, यह वेटलैंड संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को भी और अधिक मजबूत करेगा तथा भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, और इसी सहभागिता से छत्तीसगढ़ सतत विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया जाना पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है। यह उपलब्धि राज्य की समृद्ध जैवविविधता, विविध पक्षी आवासों और सतत जल-संरक्षण प्रयासों को मिली वैश्विक मान्यता का प्रतीक है।

– विष्णूदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

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