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जीएनएलयू–पीडीयूएनएएसएस–ईपीएफओ का संयुक्त प्रशिक्षण मॉडल: प्रशासनिक दक्षता और विधिक समझ की सुदृढ़ आधारशिला

गांधीनगर स्थित गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (जीएनएलयू) में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के प्रवर्तन/लेखा अधिकारियों के छठे बैच के चार सप्ताह के प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 26 दिसंबर 2025 को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन ईपीएफओ की राष्ट्रीय अकादमी—पंडित दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस)—के सहयोग से आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण का उद्देश्य नव-नियुक्त अधिकारियों को विधिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक दृष्टि से सक्षम बनाना था, ताकि वे सामाजिक सुरक्षा के दायित्वों का निर्वहन प्रभावी, निष्पक्ष और उत्तरदायी ढंग से कर सकें।

जीएनएलयू–पीडीयूएनएएसएस–ईपीएफओ का संयुक्त प्रशिक्षण मॉडल: प्रशासनिक दक्षता और विधिक समझ की सुदृढ़ आधारशिला

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में श्री रिजवान उद्दीन, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त–I एवं मुख्य शिक्षण अधिकारी (सीएलओ), पीडीयूएनएएसएस उपस्थित रहे। उनके साथ जीएनएलयू के कुलसचिव डॉ. नितिन मलिक भी मंचासीन थे। कार्यक्रम का संचालन संस्थागत गरिमा और अकादमिक अनुशासन के अनुरूप किया गया।

प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम की संरचना और दायरा

यह चार सप्ताह का प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 दिसंबर 2025 को प्रारंभ हुआ, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 62 प्रवर्तन/लेखा अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 81 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 121.5 घंटे का सघन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का संचालन 26 संसाधन व्यक्तियों द्वारा किया गया, जिनमें ईपीएफओ के अनुभवी अधिकारी, विधि विशेषज्ञ और विषय विशेषज्ञ शामिल थे। यह विविधतापूर्ण संसाधन संरचना प्रशिक्षण को व्यवहारिक, अद्यतन और सेवा-उन्मुख बनाने में सहायक रही।

प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया था कि अधिकारियों को विधिक सिद्धांतों के साथ-साथ उनके प्रशासनिक अनुप्रयोगों की भी स्पष्ट समझ प्राप्त हो सके। इसमें आपराधिक कानून, नागरिक कानून, साक्ष्य अधिनियम, संवैधानिक प्रावधान, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत, अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों की भूमिका और अधिकार, पीओएसएच अधिनियम, साइबर कानून, खरीद प्रबंधन, राजभाषा, अनुबंध कानून, व्याख्या के नियम, श्रम कानून, नए श्रम संहिता, पेशेवर शिष्टाचार तथा व्यक्तिगत आचरण एवं प्रस्तुति जैसे विषयों को सम्मिलित किया गया। इस व्यापक पाठ्यक्रम ने अधिकारियों को बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान किया, जो उनके भावी दायित्वों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

समापन दिवस के विशेष सत्र और विधिक विमर्श

प्रशिक्षण के अंतिम दिन श्री रिजवान उद्दीन, आरपीएफसी–I ने दो विशेष सत्रों में प्रशिक्षार्थियों को संबोधित किया। इन सत्रों में उन्होंने संविदा कर्मचारियों के संदर्भ में प्रधान नियोक्ताओं की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया। यह विवेचन दो महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों—एचएसडब्ल्यूसीएल बनाम आरपीएफसी (कलकत्ता उच्च न्यायालय) तथा एफसीआई बनाम आरपीएफसी (दिल्ली उच्च न्यायालय)—के माध्यम से किया गया। इन निर्णयों के व्यावहारिक निहितार्थों को समझाते हुए उन्होंने अधिकारियों को प्रवर्तन कार्यवाही में विधिक सावधानी, तर्कसंगत निर्णय और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

जीएनएलयू के कुलसचिव डॉ. नितिन मलिक ने अपने संबोधन में पाठ्यक्रम समन्वयक श्री हार्दिक पारिख के प्रयासों की सराहना की और प्रशिक्षार्थियों के अनुशासन, सहभागिता और सीखने की प्रतिबद्धता को प्रशंसनीय बताया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी खुले और अनौपचारिक संवाद के माध्यम से प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम की प्रभावशीलता और सुधार की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श संभव हुआ। श्री हार्दिक पारिख ने 26 दिनों के प्रशिक्षण की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए सत्रों, सहभागिता और सीखने के परिणामों का समग्र विवरण दिया।

एनआईडी गांधीनगर में प्रेरक संवाद: लक्ष्य निर्धारण पर विशेष सत्र

इसी क्रम में, 26 दिसंबर को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी), गांधीनगर में स्नातकोत्तर छात्रों के लिए “लक्ष्य निर्धारण के माध्यम से प्रेरणा” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। यह सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। वक्ता श्री रिजवान उद्दीन ने सफलता और असफलता के यथार्थ, चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों के चयन, उन्हें प्राप्त करने की रणनीति, तथा अनुशासन, इच्छाशक्ति, दृष्टिकोण, विश्वास, समन्वय और निरंतरता जैसे मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की। एनआईडी के प्रमुख अधिकारी डॉ. भाविन कोठारी ने सत्र का संचालन किया। इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि अकादमिक उत्कृष्टता के साथ जीवन कौशल और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण ही दीर्घकालिक सफलता का आधार बनते हैं।

राष्ट्रीय हित, सेवा-उन्मुखता और विधिक संवेदनशीलता पर बल

प्रशिक्षण के समापन सत्र में अधिकारियों को राष्ट्रीय हित में कार्य करने, ग्राहक-केंद्रित सेवा वितरण अपनाने और अर्जित ज्ञान का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। श्री रिजवान उद्दीन ने इस बात पर विशेष बल दिया कि ईपीएफओ जैसे संस्थान में कार्य करते समय अधिकारियों को निर्णायक, सेवा-उन्मुख, उत्तरदायी और सहयोगी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने सरकारी सेवाओं में कानून की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि न्याय के हित में हितधारकों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करना ही प्रशासनिक दायित्वों का मूल उद्देश्य है।

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