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बिलासपुर में रैन बसेरा तो है बेघर फिर भी  ठंड में ठिठुर रहे

बिलासपुर। शहर में बेघर और बेसहारा लोगों को ठंड से बचने के लिए व्यापार विहार क्षेत्र में सर्वसुविधायुक्त रैन बसेरा चनाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नगर निगम द्वारा निर्मित यह रैन बसेरा प्रचार-प्रसार और पहुंच के अभाव में खाली पड़ा है, जबकि शहर के प्रमुख इलाकों में सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे ठंड में रात गुजारने की मजबूर हैं।

बेघरों की हकीकत में कट रही रातें फुटपाथों पर

जमीनी पड़ताल में पुराना बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हाईटेक बस स्टैंड के आसपास बड़ी संख्या में बेघर लोग फुटपाथी, दुकानों के सटर और खाली जगहों पर सोते मिले। छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग ठंड से कापते हुए दिखाई दिए। अधिकांश लोगों के पास न तो गर्म कपड़े हैं और न ही ओढ़ने बिछाने की कोई व्यवस्था कई लोग जलते अलाव के सहारे पूरी रात बिताने को मजबूर हैं। बीते दिनों ठंड बढ़ने के बावजूद नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम सामने नहीं आई है।

 शहर में सैकड़ो बेघर

शहर में अनुमानित 500 से अधिक ऐसे लोग हैं, जिनके पास सिर छुपाने के लिए स्थायी छत नहीं है। दिन में ये लोग मजदूरी या छोटे घंटे काम कर जीवन यापन करते हैं और रात होते ही जहां जगह मिल जाए, वहीं सो जाते हैं।दूसरी ओर व्यापार विहार स्थित रैन बसेरा लगभग खाली पड़ा रहता है। वही मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि स्टेशन और बस स्टैंड पर जानकारी देने के लिए गई तैनात किए गए हैं, लेकिन दूरी अधिक होने और सही जानकारी न मिलने के कारण जरूरतमंद वहीं तक की पहुंच पा रहे। वर्तमान में रात के ममय महज 25 से 30 लोग ही रैन बसेरे का उपयोग कर पा रहे हैं।

रैन बसेरा की हकीकत

आधार विहार कोष में बना सर्वसुविधायुक्त रैन बसेरा कागजों में तो यहाँ के लिए राहत का साधन है, लेकिन वास्तव में यह राहत जमीन तक नहीं पहुंच पा रही। पर्याप्त प्रसार प्रसार-प्रसार और सीधी पहुंच की व्यवस्था न होने से जरूरतमंद लोग इसकी जानकारी के अभाव में सड़को पर ही ठंड झेलने को मजबूर है

प्रशासन पर सवाल

जब शहर में रैन बसेरा मौजूद है, तो फिर बेघर लोगों को सड़कों पर रात क्यों गुजारनी पड़ रही है? जरूरत है की प्रशासन खूद पहल कर बेघर लोगों को खोजे उन्हें रैन बसेरे तक पहुंचाने और ठंड से बचाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

कागजों में तो बेघरों के लिए राहत

व्यधार विहार में बना सर्वसुविधायुक्त रैन बसेरा कागजों में तो बेघर लोगों के लिए राहत का साधन है, लेकिन व्यवहार में कोई राहत नहीं। कुल मिलाकर लिखा पढी और जमीनी स्तर पर  जमीन आसमान का अंतर दिख रहा है। बेघर लोगों तक नहीं पहुंच पा रही सुविधाएं,और व्यवस्था के अभाव लोग में सड़कों पर ही ठंड झेलने को मजबूर है। जिम्मेदार अपने-अपने घरों में रजाई तानकर सोए पड़े हैं।

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