बढ़ रही हो अविवाहितों में मानसिक समस्याएं तो करें शादी
शादी का बंधन केवल दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि एक संवेगात्मक सम्बल का साधन है। कुछ लोग जीवन भर अविवाहित रहकर किसी विशेष कार्य के लिए स्वयं को समर्पित कर देते हैं। अविवाहित लोग अपने जीवन में अकेलापन महसूस करते हैं, जो मानसिक समस्याएं पैदा करने लगता है। शादीशुदा जीवन में परिवार व बच्चों का साथ भी व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। अविवाहित लोगों में अकेलापन, सामाजिक दबाव व रिश्ते बनाने में कठिनाई जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं। शोधों के अनुसार शादीशुदा लोगों में तनाव व अवसाद का स्तर अविवाहित लोगों की अपेक्षा कम होता है। अविवाहित लोगों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक होता है।

जीवन में अकेली महिलाओं पर शोध दर्शाते हैं कि महिलाऐं स्वास्थ्य समस्याओं, गंभीर चोट, दुर्घटना तथा समायोजन संबंधी कठिनाइयों से जूझती है। उन्हें आर्थिक रूप से प्रतिकूल स्थिति का भी सामना करना पड़ता है। अधिकांश अविवाहित महिलाऐं यौन उत्पीड़न के भय से ग्रस्त रहती हैं जिससे उन्हें कई मनोवैज्ञानिक बीमारी, निराशा, दुश्चिंता, उदासी, अवसाद विकार व अलगाव की भावना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक स्टडी के अनुसार विवाहित लोगों की तुलना में सिंगल लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा 5% ज्यादा होता है।
विश्व में लगभग 47.35 मिलियन पुरुष तथा महिलाओं लगभग 41.81 मिलियन अविवाहित है। पिछले दो दशकों में अविवाहित व्यक्तियों की संख्या लगभग 21 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 35 प्रतिशत हो गई है। एक सर्वे के अनुसार लगभग 23% युवा शादी नहीं करना चाहते हैं। 2019 में पुरुषों की लगभग 26.1% तथा महिलाओं की लगभग 19.9% आबादी शादी नहीं करना चाहती थी। एक तरह से देश के एक चौथाई से ज्यादा युवा लड़के-लड़कियां शादी नहीं करना चाहते। सरकार की एक रिपोर्ट (2019) के अनुसार शादी न करने वाले युवाओं की सबसे अधिक संख्या जम्मू और कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज की गई है।
अविवाहित व्यक्तियों का मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति अलग पाया गया है जहाँ कुछ को अकेलापन व अवसाद का खतरा होता है, वहीं कुछ मजबूत सामाजिक नेटवर्क, स्वतंत्रता व व्यक्तिगत विकास से बेहतर महसूस करते हैं।
एक बात स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह लेख गृहस्थ जीवन में रहने वालों को ध्यान में रखकर लिखित है। बैराग्य धारण करने वालों साधू संतो के लिए अविवाहित जीवन परम आनंद दायक व उत्तम मानसिक स्वास्थ्य का साधन होता है क्योंकि उनकी जीवनशैली, दिनचर्या, सोच विचार, अपेक्षाऐं, इच्छाऐं सामान्य व्यक्ति से अलग होता है।
अविवाहित रहने की प्रवृत्ति में वृद्धि के कारण:-
- आर्थिक स्वतंत्रता
- उच्च शिक्षा
- कैरियर पर अधिक ध्यान
- जीवनशैली में बदलाव
- शादी के बाद की जिम्मेदारियों से बचने की इच्छा
- समाज में बढती स्वीकृत
- लिव इन रिलेशन का बढता प्रचलन
- एकांकी परिवार
- समाजीकरण में दोष
- आत्मनिर्भरता के बढते अवसर
- स्वेच्छाचारिता की बढती सोच
- आधुनिक व सबल होने का दिखावा
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं:-
अकेलापन:- जीवनभर अकेले रहने से अकेलापन महसूस होता है, खासकर जब आसपास के लोग शादीशुदा हों। परिवार का एकांकी होना। अस्वस्थ होने पर देखभाल हेतु लोगों के उपलब्ध न होने पर अविवाहित की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
सामाजिक दबाव:- समाज द्वारा अविवाहित होने पर दबाव देना आम बात है क्योंकि अविवाहित रहना सामाजिक मानक के खिलाफ है जिससे सामाजिक दबाव होता है कि शादी कर लें। जिससे व्यक्ति खुद को अलग-थलग समझने लगता है।
रिश्तों की चिंता:- एक समय के बाद खास कर माता पिता के मृत्यु हो जाने पर कोई साथी न मिलने या गलत साथी मिलने की चिंता सताने लगती है। उम्र ढलने के साथ मित्र व रिश्तेदारों से भी सम्पर्क कम होने लगता है जिससे चिंता और बढ जाती है।
आत्म-सम्मान में कमी:- अकेलापन व सामाजिक दबाव के कारण अविवाहित लोगों के आत्म-सम्मान में कमी आने लगता है जिससे नकारात्मकता बढने लगती है।
अवसाद:- लगातार अकेलापन व निराशा की भावना से अवसाद होता है। व्यक्ति अपने रुचिकर कामों में भी अरुचि रखने लगता है उसका जीवन में उम्मीद कम तथा निराशा बढता है। समय रहते इसका प्रबंध न किया जाए तो व्यक्ति में आत्महत्या के विचार आने लगते हैं तथा आत्महत्या का प्रयास भी व्यक्ति कर सकता है।
वचाव:-
सामाजिक नेटवर्क बनाएं:- दोस्तों, परिवार और समान विचारधारा वाले लोगों के साथ मजबूत संबंध बनाएं। लोगों का सहयोग करें ताकि लोग आप की भी सहायता करें।

