प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड और एल्मेंटोज़ रिसर्च के बीच समझौता: पशु पोषण में एएमपी-समृद्ध स्मार्ट प्रोटीन से आत्मनिर्भरता को बल

सरकार के आत्मनिर्भर भारत विज़न तथा पशु पोषण के लिए टिकाऊ और एंटीबायोटिक-फ्री समाधानों को बढ़ावा देने के रणनीतिक उद्देश्य के अनुरूप, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने मेसर्स एल्मेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, भुवनेश्वर के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता “पोल्ट्री, एक्वाकल्चर फ़ीड और पेट फ़ूड के लिए एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड (एएमपी)-समृद्ध, सस्टेनेबल प्रिसिजन स्मार्ट प्रोटीन का विकास और वाणिज्यीकरण” परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने से संबंधित है।

यह पहल भारत में पशु पोषण के क्षेत्र में उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन का वाणिज्यिक स्तर पर उत्पादन शुरू करना है, जो एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड से भरपूर और प्रिसिजन-इंजीनियर्ड फंक्शनल प्रोटीन है। इसे एक स्वामित्व वाले इंसेक्ट बायोमैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से विकसित किया गया है, जो पारंपरिक प्रोटीन स्रोतों का एक प्रभावी विकल्प प्रस्तुत करता है।

ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित एल्मेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड का प्रमोशन डॉ. जयशंकर दास द्वारा किया गया है। कंपनी पोल्ट्री, एक्वाकल्चर और पेट फ़ूड सेक्टर के लिए एंटीबायोटिक-फ्री, टिकाऊ तथा प्रिसिजन प्रोटीन समाधानों पर केंद्रित है। अपने स्वदेशी इंसेक्ट बायोमैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनी ने ELGROW™ स्मार्ट प्रोटीन विकसित किया है, जिसे एंटीबायोटिक ग्रोथ प्रमोटर को प्रतिस्थापित करने, फ़ीड कन्वर्ज़न रेश्यो में सुधार लाने, रोगों की घटनाओं को कम करने और सर्कुलर वेस्ट वैल्यूएशन को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया है।

इस प्रौद्योगिकी की एक विशेषता यह है कि यह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध एग्री-फ़ूड और औद्योगिक अपशिष्ट धाराओं को फ़ीडस्टॉक के रूप में एकीकृत करती है। इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होती हैं, आयात पर निर्भरता घटती है और सर्कुलर इकॉनमी के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलता है। ELGROW™ प्रोटीन मील और एएमपी-समृद्ध स्मार्ट प्रोटीन फ़ॉर्मूलेशन के अलावा, कंपनी ELGROW™ ऑयल का भी उत्पादन करती है, जिसमें लिनोलिक एसिड (ओमेगा-6) सहित आवश्यक फैटी एसिड मौजूद हैं। ये तत्व पोल्ट्री और एक्वाकल्चर में वृद्धि तथा प्रजनन के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

इस परियोजना से बड़े पोल्ट्री और एक्वाकल्चर इंटीग्रेटर्स के साथ-साथ छोटे और मझौले किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। किफायती और प्रदर्शन-आधारित फ़ीड विकल्प उपलब्ध होने से भारतीय कृषि प्रणाली की उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है। साथ ही, यह पहल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, फ़ीड सुरक्षा और बढ़ती निवेश लागत जैसी प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। पर्यावरणीय स्थिरता के संदर्भ में भी यह परियोजना सकारात्मक प्रभाव डालने की क्षमता रखती है।

समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि एल्मेंटोज़ रिसर्च को दिया गया समर्थन, बोर्ड के उस जनादेश को प्रतिबिंबित करता है जिसके तहत इन-हाउस अनुसंधान एवं विकास से विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यीकरण को प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि एंटीबायोटिक-फ्री प्रिसिजन न्यूट्रिशन समाधान खाद्य सुरक्षा, निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता तथा भारत के पशुधन और एक्वाकल्चर क्षेत्रों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं।

मैसर्स एल्मेंटोज़ रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर ने इस सहयोग के लिए प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय सहायता से कंपनी के स्वामित्व वाले इंसेक्ट बायोमैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म का विस्तार संभव होगा। उनके अनुसार, यह परियोजना भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप सतत, किफायती और प्रदर्शन-उन्मुख समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इससे आयातित फ़ीड एडिटिव्स पर निर्भरता कम होगी और राष्ट्रीय फ़ीड सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि पशु पोषण के क्षेत्र में उन्नत जैव-प्रौद्योगिकी आधारित उत्पादों का उपयोग न केवल उत्पादन लागत को संतुलित कर सकता है, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को भी मजबूत बना सकता है। यदि इस परियोजना के अपेक्षित परिणाम सामने आते हैं, तो यह देश में टिकाऊ कृषि और पशुपालन प्रणाली के निर्माण में सहायक सिद्ध हो सकती है।

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