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विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य दोहन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम, राजीव रंजन सिंह ने ईईजेड एक्सेस पास का शुभारंभ किया

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 20 फरवरी को गुजरात के वेरावल स्थित केसीसी ग्राउंड में विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल को देश के समुद्री मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक, पारदर्शी और मछुआरा केंद्रित शासन ढांचा लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन, मत्स्य विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी तथा गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। देश के सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 24 मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। दो हजार से अधिक प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि 500 से अधिक स्थानों से ऑनलाइन जुड़ाव दर्ज किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने 24 मत्स्य सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 37 मछुआरों को ईईजेड में मत्स्य दोहन के लिए एक्सेस पास प्रदान किए। साथ ही अपतटीय मत्स्य गतिविधियों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाइफ जैकेट, हाई बीम टॉर्च और जीपीएस उपकरण सहित सुरक्षा किट वितरित किए गए। गुजरात में नवगठित मत्स्य सहकारी समितियों को दो लाख रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि ईईजेड ढांचा व्यापक परामर्श प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया है, जिसमें मछुआरा संगठनों, सहकारी समितियों, राज्यों और वैज्ञानिक संस्थानों की भागीदारी रही है। उन्होंने बताया कि रियलक्राफ्ट पोर्टल पर बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप आगामी महीनों में एक्सेस पास जारी किए जाएंगे। उन्होंने मछुआरों से सहकारी समितियों में संगठित होने और नई व्यवस्था का लाभ उठाने का आह्वान किया।

मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026 की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि ईईजेड या खुले समुद्र में भारतीय पोतों द्वारा पकड़ी गई मछलियां शुल्क मुक्त होंगी। उन्होंने ट्रांसपोंडर आधारित वास्तविक समय ट्रैकिंग, जीवन रक्षक उपकरणों और संभावित मत्स्य क्षेत्र परामर्श जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो सुरक्षा और उत्पादकता दोनों को सुदृढ़ करेंगी। गहरे समुद्र में मत्स्य अवसरों के विस्तार के लिए सहकारिता मंत्रालय के साथ संयुक्त कार्य समूह के गठन पर भी बल दिया गया।

राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि एक्सेस पास प्रणाली पूर्णतः डिजिटल, सरल और पारदर्शी है, जिससे अधिकृत भारतीय मत्स्य जहाजों को अपतटीय जलक्षेत्र में संचालन के लिए स्पष्टता और विश्वास मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए नियम विदेशी मत्स्य जहाजों के भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध सुनिश्चित करते हैं और भारतीय समुद्री संपदा की रक्षा करते हैं।

राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने इसे समुद्री मत्स्य विकास के अगले चरण में प्रवेश का प्रतीक बताया और कहा कि यह विकसित भारत 2047 की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत वेरावल को मत्स्य बंदरगाह क्लस्टर के रूप में नामित किया गया है, जिससे क्षेत्रीय दक्षता और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।

मत्स्य विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बताया कि एक्सेस पास एक पारदर्शी और सुगम ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार भारत का ईईजेड अभी भी कम उपयोग में है, जबकि टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के दोहन की व्यापक संभावना मौजूद है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन प्रजातियों को प्रीमियम मूल्य प्राप्त होता है, जिससे निर्यात और आय दोनों में वृद्धि संभव है। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास, विशेषकर जाखौ में स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाह परियोजना, तथा तटीय राज्यों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर बल दिया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। स्थानीय प्रशासन और मत्स्य सहकारी संगठनों की सक्रिय उपस्थिति ने इस पहल को व्यापक समर्थन प्रदान किया।

पृष्ठभूमि के रूप में देखा जाए तो भारत का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो समुद्री मत्स्य विकास, आजीविका सृजन और निर्यात विस्तार की अपार संभावनाएं समेटे हुए है। वर्तमान में अधिकांश भारतीय मत्स्य गतिविधियां तट से 40 से 50 समुद्री मील तक सीमित हैं, जबकि इससे आगे का विशाल क्षेत्र अभी पूर्ण क्षमता से उपयोग में नहीं लाया गया है। इसी संदर्भ में सरकार ने 4 नवंबर 2025 को “विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन का सतत दोहन, 2025” नियम अधिसूचित किए थे।

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