21 मार्च–विश्व कविता दिवस पर विशेष
प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को समूचा विश्व विश्व कविता दिवस मनाता है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शब्दों की उस अनश्वर ऊर्जा का उत्सव है जो मानव हृदय को हृदय से जोड़ती है। कविता भाषा की सीमाओं से परे जाकर संवेदनाओं का सेतु बनाती है। यह संस्कृति, इतिहास और मानवीय अनुभवों को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाती है।
कविता केवल भावों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भाषाई विविधता की संरक्षक भी है। विश्व में अनेक भाषाएँ विलुप्ति के कगार पर हैं; कविता उन्हें जीवित रखने का सशक्त माध्यम बनती है। लोकगीतों से लेकर महाकाव्यों तक, कविता ने सभ्यताओं के उत्थान-पतन, संघर्ष और स्वप्नों को शब्द दिए हैं।
कहा जाता है कि लगभग 2000 ईसा पूर्व रचित गिलगमेश महाकाव्य लिखित कविता का प्रारंभिक उदाहरण है। समय के साथ कविता के रूप और शिल्प में परिवर्तन आया, पर उसका मूल उद्देश्य वही रहा ,मानव को मानव के निकट लाना।
कविता दिवस शिक्षा में साहित्य की भूमिका को रेखांकित करता है। यह युवाओं को पढ़ने, लिखने और चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है। कविता कल्पना को उड़ान देती है, भाषा को संवेदनशील बनाती है और व्यक्तित्व को परिष्कृत करती है। महान दार्शनिक प्लेटो का कथन है-
“हर दिल एक गीत गाता है, जो तब तक अधूरा रहता है जब तक कोई दूसरा दिल फुसफुसाकर जवाब न दे।”
और भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था—
“कविता सर्वोच्च आनंद या गहनतम दुख को व्यक्त कर सकती है।”
इन कथनों से स्पष्ट है कि कविता मानवीय चेतना की उच्चतम अभिव्यक्ति है। कविता सीमाओं को लांघती है। यह जाति, धर्म, राष्ट्र और भाषा की दीवारों को तोड़कर साझा भावनाओं का संसार रचती है। विश्व कविता दिवस के अवसर पर विश्व भर में काव्य पाठ, गोष्ठियाँ और सम्मान समारोह आयोजित होते हैं, जहाँ स्थापित कवियों को सम्मानित किया जाता है और नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान किया जाता है। यह दिवस हमें स्मरण कराता है कि शब्दों में वह सामर्थ्य है जो समाज को जाग्रत कर सकता है, अन्याय के विरुद्ध स्वर बन सकता है और प्रेम, शांति तथा मानवीय मूल्यों का प्रचार कर सकता है।

