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केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने की मिशन शक्ति पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता


केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज पश्चिम बंगाल के कोलकाता में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से संबद्ध सांसदों की परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मिशन शक्ति के तीन प्रमुख घटकों- वन स्टॉप सेंटर (ओएससी), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) और संकल्प: महिला सशक्तीकरण केंद्र (एचईडब्ल्यू) पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में दोनों सदनों के सांसद और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सदस्यों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, महिला नेतृत्व वाले विकास और विकसित भारत के संबंध में प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण के लिए सरकार की एकीकृत योजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘संबल‘ उप-योजना के तहत- जिसमें वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और नारी अदालत शामिल हैं – केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता प्रदान करती है। ‘सामर्थ्य‘ उप-योजना के तहत- जिसमें महिला सशक्तीकरण केंद्र, पीएमएमवीवाई, शक्ति सदन, सखी निवास और पालना शामिल हैं – केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में और पूर्वोत्तर एवं विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में वित्त पोषण साझा किया जाता है, जबकि विधानमंडल विहीन केंद्र शासित प्रदेशों को शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण प्राप्त होता है।

वन स्टॉप सेंटर

केंद्रीय मंत्री ने सदस्यों को सूचित किया कि निर्भया कोष के तहत वित्त पोषित और 1 अप्रैल 2015 से कार्यान्वित किए जा रहे वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे एकीकृत सहायता प्रदान करते हैं। इस योजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक ओएससी स्थापित करना है। अब तक 1,033 ओएससी स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 991 कार्यरत हैं और 15.20 लाख से अधिक महिलाओं की सहायता कर चुके हैं।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक ओएससी चिकित्सा सहायता, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से निःशुल्क कानूनी सहायता, संपर्क अधिकारियों के माध्यम से पुलिस सहायता, मनोसामाजिक परामर्श और पांच दिनों तक का अस्थायी आश्रय प्रदान करता है, जिसे 20 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। ओएससी सरकारी अस्पतालों के भीतर या उसके निकट स्थित हैं और बचाव कार्य तथा महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता के लिए ले जाने हेतु उनके पास 24×7 समर्पित वाहन उपलब्ध हैं। केंद्रीय मंत्री ने मिशन शक्ति डैशबोर्ड पर भी प्रकाश डाला, जो एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है और भू-टैगिंग, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और नेविगेशन सुविधाओं के साथ-साथ ओएससी की वास्तविक समय में, राज्यवार और जिलावार निगरानी को सक्षम बनाता है। सभी ओएससी को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल से एकीकृत किया गया है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

पीएमएमवीवाई पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1 जनवरी 2017 से पूरे भारत में लागू इस योजना के तहत पहले बच्चे के जन्म पर मां के आधार-लिंक्ड बैंक या डाकघर खाते में सीधे 5,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में दी जाती है- गर्भावस्था के पंजीकरण और कम से कम एक प्रसवपूर्व जांच पर 3,000 रुपये और प्रसव के पंजीकरण और टीकाकरण के पहले चक्र के पूरा होने पर 2,000 रुपये। जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले लाभ के साथ, एक महिला को औसतन 6,000 रुपये मिलते हैं। बालिका के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के लिए, यदि दूसरा बच्चा लड़की है तो उसके लिए भी 6,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

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उन्होंने सदस्यों को सूचित किया कि पीएमएमवीवाई के तहत 21,343 करोड़ रुपये से अधिक की राशि 4.60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को वितरित की जा चुकी है। हाल के सुधारों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 21 मई 2025 से लागू अनिवार्य आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण ने यह सुनिश्चित किया है कि लाभ केवल वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे; इस प्रणाली के माध्यम से 64.65 लाख लाभार्थियों का नामांकन किया गया है। 1 जुलाई 2025 को शुरू की गई ‘ड्यू लिस्ट’ पहल के तहत, पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा उनके घर-घर जाकर सक्रिय रूप से पहुंचा जाता है, और इसके माध्यम से 36.42 लाख लाभार्थियों को जोड़ा गया है। एक एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित की गई है, जिसके तहत अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा शिकायतों का समाधान 14 दिनों के भीतर किया जाएगा; प्राप्त एक लाख से अधिक शिकायतों में से 87 प्रतिशत से अधिक का समाधान किया जा चुका है। पीएमएमवीवाई पोर्टल पर सर्च एंड ट्रैक सुविधा और टोल-फ्री और बहुभाषी हेल्पलाइन नंबर 1515 का उपयोग पीएमएमवीवाई आवेदन और भुगतान की स्थिति की जांच करने के लिए 22.52 लाख से अधिक बार किया जा चुका है ।

संकल्प: महिलाओं के सशक्तीकरण का केंद्र

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संकल्प: एचईडब्ल्यू, जिसे सामर्थ्य उप-योजना के तहत 1 अप्रैल 2022 को शुरू किया गया था, राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर एक एकल खिड़की के रूप में कार्य करता है। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए उपलब्ध योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी का अभाव दूर करना, उन्हें उनके हक का लाभ उठाने में मार्गदर्शन करना और मंत्रालयों और क्षेत्रों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना है। यह मिशन शक्ति के लिए परियोजना निगरानी इकाई के रूप में भी कार्य करता है और जिला स्तर पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ गतिविधियों का आयोजन करता है। वर्तमान में, देशभर में 36 राज्य एचईडब्ल्यू और 765 जिला एचईडब्ल्यू कार्यरत हैं।

बैठक में उपस्थित माननीय संसद सदस्य सुश्री मंजू शर्मा, सुश्री ज्योति नागनाथ वाघमरे, सुश्री माया चिंतामन और सुश्री स्वाति मालीवाल ने इन योजनाओं की पहुंच और वितरण को मजबूत करने के संबंध में अपने विचार और सुझाव साझा किए।

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राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने सदस्यों के बहुमूल्य सुझावों के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें आश्वासन दिया कि मंत्रालय राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर कार्य  करना जारी रखेगा ताकि मिशन शक्ति के तहत जरूरतमंद हर महिला को सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तीकरण सेवाएं मिल सकें। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए मार्गदर्शक सिद्धांत का पालन कर रहा है कि कल्याण और सहायता कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। साभार : पीआईबी

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