कंटक पथ पर बढ़ने वाले।
अंधकार से लड़ने वाले।
द्वार खड़ा है प्रमुदित सूरज,
जागें जीवन गढ़ने वाले।।
पंछी नभ में चित्र बनाते।
तरुवर पात हिला हरषाते।
नाचें जलचर दे दे ताली,
जीवन में उत्साह जगाते।।
रजनी कब की है बीत गई।
उठ गरमी बारिश शीत गई।
समय फलक पर लिखना होगा,
मानव मन की मधु प्रीत नई।।
वसुधा अम्बर का प्यार जगा।
अनुबंध लिखा मनुहार पगा।
रवि किरणों से आँख मिली तो,
मुँह छिपा अँधेरा हार भगा।।

शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)