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1.5 लाख से ज्यादा लोगों ने आजीवन सीखने और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए ‘शिक्षा संकल्प’ लिया- संजय कुमार


शिक्षा मंत्रालय 19 से 21 जून 2023 तक पुणे, महाराष्ट्र में चौथी और अंतिम शिक्षा कार्य समूह (ईडीडब्ल्यूजी) की बैठक की मेजबानी करेगाइसका विषय ‘मिश्रित शिक्षा के संदर्भ में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान सुनिश्चित करना‘ है और 22 जून 2023 को शिक्षा मंत्रियों की बैठक के साथ इसका समापन होगा।

उच्च शिक्षा सचिव श्री के.संजय मूर्ति,स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव  संजय कुमार और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता सचिव श्री अतुल कुमार तिवारी ने आज प्रेस वार्ता में मीडिया से बातचीत की और पुणे में होने वाली आगामी जी20 चौथी शिक्षा कार्य समूह की बैठक, मंत्रिस्तरीय बैठक, जनभागीदारी कार्यक्रमों और अन्य के बारे में जानकारी दी।

श्री संजय मूर्ति ने बताया कि पिछली बैठकों की तरह ईडीडब्ल्यूजी की मुख्य बैठक से पहले एक सेमिनार होगा और यह मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के प्राथमिकता वाले क्षेत्र पर आधारित होगा। उन्होंने यह भी बताया कि स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, यूएसए, यूएई, सऊदी अरब, चीन और यूके जैसे देशों ने सेमिनार के विषय पर अपनी रुचि जाहिर की है और ये पैनलिस्ट के रूप में हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि जी-20 की ईडीडब्ल्यूजी मीटिंग से पहले उच्च शिक्षा विभाग 16 जून को आईआईएसईआर, पुणे में ईएलएसईवीआईईआर के सहयोग से एक सेमिनार आयोजित कर रहा है। यह सेमिनार ‘एक्सेसिबल साइंस: फोस्टरिंग कोलैबरेशन’ विषय पर केंद्रित होगा। इस आयोजन में वैज्ञानिक समुदाय के विभिन्न हितधारक हिस्सा लेंगे और विज्ञान की सुलभता की सर्वोत्तम प्रथाओं की चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि कैसे अलग-अलग स्थानीय क्षमताओं के साथ अलग-अलग देशों में विज्ञान को सुलभ बनाया जा सकता है और वैश्विक प्रगति में सहयोग के लिए विज्ञान की विधियों के इस्तेमाल के तरीकों पर भी बात होगी।

श्री मूर्ति ने बताया कि शिक्षा कार्य समूह की बैठक मंत्रिस्तरीय बैठक के साथ समाप्त होगी, जिसमें जी-20 सदस्यों और आमंत्रित देशों के शिक्षा मंत्री हिस्सा लेंगे। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में देशों के बीच सर्वोत्तम तरीकों को समाहित कर रिपोर्ट और मंत्रिस्तरीय घोषणा जैसे अंतिम दस्तावेज मंत्रिस्तरीय बैठक में पेश किए जाएंगे। अब तक इन देशों से 14 मंत्रियों ने मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है- यूके, इटली, ब्राजील, चीन, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, ओमान, मॉरीशस, जापान, बांग्लादेश, मिस्र, यूएई और नीदरलैंड्स।

श्री संजय कुमार ने स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। मुख्य कार्यक्रम से पहले सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय, पुणे में 17 से 18 जून तक मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान ‘आजीवन सीखने के लिए जमीन तैयार करने’ को लेकर दो दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन राज्यों की सर्वोत्तम विधियों की पहचान करने और उस पर विचार-विमर्श करने में मदद करेगा, जो युवाओं को मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान प्रदान करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य दो महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन करना है- बहुभाषी समाज के संदर्भ में एफएलएन के लिए अध्यापन के तरीके एवं प्रणाली तथा मिश्रित मोड में शिक्षकों में क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण। अपने अनुभव साझा करने और सीखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है, जिससे संयुक्त पहल, क्रॉस लर्निंग और कार्यान्वयन में चुनौतियों वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके। उन्होंने बताया कि भारत के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों, भारत सरकार के नॉलेज पार्टनर (यूनेस्को और यूनिसेफ) और नागरिक समाज एजेंसियों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

श्री कुमार ने बताया कि इसके साथ-साथ 17 जून को सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय, पुणे में एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा। इस दौरान विशेष रूप से राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और शिक्षा के क्षेत्र की अन्य एजेंसियों द्वारा शिक्षा और एफएलएन, डिजिटल पहल, अनुसंधान एवं कौशल विकास में अपनाई जा रही नवीन प्रथाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में 100 प्रदर्शक हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि जब मूलभूत साक्षरता पूरी होती है तब आजीवन सीखने की शुरुआत होती है।

उन्होंने बताया कि जी-20 की चौथी शिक्षा कार्य समूह की बैठक के मद्देनजर जीवन के हर स्तर के लोगों को शामिल करने के लिए राज्य, जिला, ब्लॉक, पंचायत और स्कूल के स्तर पर 1 जून 2023 से जनभागीदारी कार्यक्रम, कार्यशालाएं, प्रदर्शनी, सेमिनार और सम्मेलन सहित कई तरह की गतिविधियां शुरू की गई हैं। पूरा कार्यक्रम व्यापक सफलता हासिल कर रहा है और इसमें 12वें दिन तक 1.57 करोड़ विद्यार्थियों, 25.46 लाख अध्यापकों और समुदाय के 51.10 लाख लोगों सहित 2.33 करोड़ से ज्यादा लोग भाग ले चुके हैं। यह न केवल अभूतपूर्व है बल्कि जनता के बीच व्यापक रुचि और जुड़ाव को भी दिखाता है।

श्री अतुल कुमार तिवारी ने ओडिशा में जनभागीदारी की सफलता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि चौथी ईडीडब्ल्यूजी बैठक के मद्देनजर वित्तीय साक्षरता जैसे पूर्व निर्धारित 35 विषयों पर आधारित इसी तरह का एक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईटीआई, जेएसएस, पीएमकेके, पॉलिटेक्निक, भारतीय उद्यमिता संस्थान और कुछ स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों जैसे 2300 कौशल आधारित संस्थानों को एमएसडीई ने इस दिशा में संगठित किया है। वेबिनार, कार्यशाला, कौशल प्रश्नोत्तरी से लेकर जागरूकता कार्यक्रम, रैलियों जैसी जनभागीदारी गतिविधियों में देशभर में 10 लाख से ज्यादा भागीदारी देखी गई है तिवारी ने कहा कि एमएसडीई लगातार शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर शिक्षा कार्य समूह की बैठकों के लिए काम कर रहा है।

इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्र की प्रगति में योगदान के लिए आजीवन सीखने और शिक्षा को आगे बढ़ाने के संकल्प के लिए विद्यार्थियों, अध्यापकों और आम लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘माईगव डॉट इन’ पोर्टल पर ‘शिक्षा संकल्प’ शुरू किया है। इसका मकसद कौशल और ज्ञान के लगातार विकास के साथ जिम्मेदार नागरिक तैयार बनाना है। एक हफ्ते से भी कम समय में अब तक 1.5 लाख से ज्यादा लोग शपथ ले चुके हैं।

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