नई दिल्ली: केंद्र सरकार के विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 ने अपने पिछले संस्करण की तुलना में स्वच्छता गतिविधियों के विस्तार और स्क्रैप निपटान से राजस्व अर्जित करने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। 19 अक्टूबर, 2026 तक अभियान के तहत 8,34,509 स्थलों पर स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गईं। यह विशेष अभियान 5.0 की इसी अवधि में दर्ज 2,75,432 स्थलों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। इसी अवधि में स्क्रैप निपटान से 491.28 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 304.72 करोड़ रुपये थी।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए इन उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने स्वच्छता गतिविधियों का दायरा बढ़ाने, अनुपयोगी सामग्री के निपटान और सरकारी कार्यालयों में उपलब्ध स्थान के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया।
स्क्रैप निपटान से राजस्व में वृद्धि
विशेष अभियान 6.0 के तहत 19 अक्टूबर तक स्क्रैप निपटान से 491.28 करोड़ रुपये अर्जित किए गए। विशेष अभियान 5.0 की समान अवधि में यह राशि 304.72 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार राजस्व में लगभग 61 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कार्यालयों और अन्य सरकारी प्रतिष्ठानों में अनुपयोगी सामग्री को हटाकर 116 लाख वर्ग फुट स्थान खाली कराया गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में 113.12 लाख वर्ग फुट स्थान खाली किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि अभियान के तहत स्वच्छता गतिविधियों के साथ उपलब्ध संसाधनों और कार्यालय परिसर के उपयोग पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने अपने कार्यालय परिसर की एक मंजिल पर लगभग 1,200 वर्ग फुट जगह खाली कराई है। इस पहल का उद्देश्य कार्यालय में उपलब्ध स्थान का वास्तविक कार्यात्मक जरूरतों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करना है।
फाइलों के निपटान से आगे बढ़ा अभियान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष स्वच्छता अभियान पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है। शुरुआत में लंबित फाइलों के निपटान और कार्यालयों की साफ-सफाई पर केंद्रित यह पहल अब इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा, ई-कचरे के प्रबंधन, अप्रचलित सामग्रियों की छंटाई और स्क्रैप के निपटान तक विस्तारित हो चुकी है।
उन्होंने मंत्रालयों और विभागों के सचिवों से आग्रह किया कि अभियान को केवल मुख्यालयों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि देशभर में स्थित क्षेत्रीय कार्यालयों और अन्य प्रतिष्ठानों में भी व्यापक स्तर पर लागू किया जाए। उन्होंने एक दिवसीय विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित करने के साथ-साथ कार्यालयों में साफ-सफाई बनाए रखने और अनुपयोगी सामग्री के नियमित निपटान की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में लंबित मामलों और जन शिकायतों का निपटारा, भौतिक एवं इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा तथा कार्यालयों में जगह खाली कर उसका उत्पादक कार्यों के लिए उपयोग शामिल है। इस तरह स्वच्छता अभियान को सरकारी कार्यालयों की प्रशासनिक दक्षता और कार्यप्रणाली में सुधार से भी जोड़ा गया है।
स्कूल शिक्षा विभाग और रेलवे का योगदान
अभियान के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों ने अपनी गतिविधियों के माध्यम से योगदान दिया है। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 4,15,353 स्वच्छता अभियान स्थलों पर गतिविधियां संचालित किए जाने की सूचना दी। वहीं, रेल मंत्रालय ने 19 अक्टूबर, 2026 तक स्क्रैप निपटान से 425.06 करोड़ रुपये अर्जित किए।
ये आंकड़े अभियान में विभिन्न विभागों की भागीदारी और अनुपयोगी सरकारी सामग्री के निपटान के जरिए संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के प्रयासों को दर्शाते हैं।
ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर
समीक्षा बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वच्छता, जिम्मेदार अपशिष्ट निपटान और पुनर्चक्रण के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को प्रोत्साहित करने तथा अपशिष्ट के पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण से संबंधित तकनीकों को सामने लाने की जरूरत बताई।
इसमें प्रयुक्त खाना पकाने के तेल और प्लास्टिक से संबंधित पुन: उपयोग एवं प्रसंस्करण के अनुप्रयोग भी शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य अपशिष्ट को केवल हटाने तक सीमित न रखते हुए उसके सुरक्षित प्रबंधन और उपयोगी संसाधनों में रूपांतरण की संभावनाओं को बढ़ावा देना है।
मंत्रालयों के बीच समन्वय और बेहतर कार्यप्रणाली
समीक्षा बैठक में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर उमेश वी. वाघमारे, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश सुधीर गोखले सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कुछ सचिवों ने बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
डीएआरपीजी की सचिव ने मंत्रालयों, विभागों और उनके क्षेत्रीय प्रतिष्ठानों में अभियान की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने विभागीय कार्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की जानकारी दी। वहीं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कार्यालयों में उपलब्ध स्थान का आकलन करते समय उसकी वास्तविक उपयोगिता और कार्यात्मक जरूरतों को ध्यान में रखने की बात कही।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी सचिवों से कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में स्थान की समीक्षा के दौरान इस दृष्टिकोण को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने सफल पहलों और बेहतर कार्यप्रणालियों को डीएआरपीजी तथा अन्य मंत्रालयों के साथ साझा करने पर भी जोर दिया, ताकि उपयोगी मॉडलों को दूसरे विभागों में अपनाया जा सके।
31 अक्टूबर तक जारी रहेगा अभियान
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 का संचालन 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक किया जा रहा है। 19 अक्टूबर तक के आंकड़े अभियान की प्रगति को दर्शाते हैं, जबकि इसके तहत गतिविधियां महीने के अंत तक जारी रहेंगी।
अभियान की उपलब्धियों का आकलन केवल साफ-सफाई या अनुपयोगी सामग्री हटाने के आधार पर नहीं किया जा रहा है। लंबित मामलों का निपटान, फाइलों की समीक्षा, राजस्व अर्जन, कार्यालयी स्थान का बेहतर उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं। केंद्र सरकार का जोर इन गतिविधियों को नियमित प्रशासनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने पर है, ताकि अभियान समाप्त होने के बाद भी कार्यालयों में स्वच्छता, सुव्यवस्था और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की व्यवस्था बनी रहे।