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बदलता ही नहीं

दो साल से
खरीदकर रखा हूं,
पांच रुपए वाला
नमकीन का एक पैकेट।

ऊपर बाएं कोने में लिखे
‘न्यू पैक’ को
रोज सुबह
बड़े उम्मीद से
निहारता हूं।

न जाने कब
ये ‘ओल्ड पैक’ होगा?
बड़ा जिद्दी हो गया है,
बदलता ही नही,
हमारी धारणाओं की तरह।

दुर्गेश्वर राय शिक्षक एवं साहित्यकार , गोरखपुर
दुर्गेश्वर राय
शिक्षक एवं साहित्यकार , गोरखपुर
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