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वाराणसी में “विकसित भारत” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न, समन्वित विकास मॉडल पर जोर

वाराणसी। डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय, सोयेपुर, लालपुर, वाराणसी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और तकनीक: विकसित भारत की ओर एक मार्ग” का सफल समापन हुआ। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित इस संगोष्ठी में देशभर के विद्वानों ने “विकसित भारत” के निर्माण में बहुआयामी समन्वय की आवश्यकता पर गहन विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं संस्थापक को पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। संस्थान के प्रबंधक नागेश्वर सिंह एवं प्रशासक संजीव सिंह ने अतिथियों का स्वागत स्मृति-चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर किया। प्लेनरी सत्र का संचालन डॉ. रचना पांडे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योति द्वारा प्रस्तुत किया गया।

मुख्य वक्ता प्रो. रवींद्र जयभाये (सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय एवं इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ज्योग्राफी) ने शहरीकरण और जैव-विविधता के मध्य संतुलन की चुनौती को रेखांकित करते हुए सतत विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। प्रो. एस. बी. सिंह ने ग्रामीण-आधारित विकास मॉडल को भारतीय संदर्भ में अधिक प्रासंगिक बताते हुए अन्ना हजारे एवं राजेंद्र सिंह के उदाहरण प्रस्तुत किए। विशिष्ट अतिथि प्रो. होसला प्रसाद ने नवीकरणीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को आर्थिक विकास की आधारशिला बताया।

समापन समारोह कि अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने किया उन्हों कहा कि…केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जबकि प्रो. तारेश्वर सिंह ने वैश्विक ऊष्मीकरण और जनसंख्या वृद्धि के पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

प्रो. आर. पी. द्विवेदी ने भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान और प्राचीन ग्रंथों की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक होगी जब उसे भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा जाए। प्रो. उमा शंकर सिंह ने शिक्षा, परिवार, तकनीक और समाज के बीच संतुलन को समग्र विकास की अनिवार्य शर्त बताया।

समापन सत्र का संचालन डॉ. विपुल शुक्ला ने किया। धन्यवाद ज्ञापन भूगोल विभाग की सुश्री खुशबू सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि संगोष्ठी का प्रतिवेदन डॉ. अलका वर्मा ने प्रस्तुत किया। संगोष्ठी के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. आनंद सिंह, सह-संयोजक डॉ. स्मिता सिंह आयोजन सचिव डॉ. मुकेश विश्वकर्मा एवं  सहित भूगोल विभाग व महाविद्यालय के समस्त शिक्षको का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से सार्थक रही, बल्कि इसने स्पष्ट किया कि “विकसित भारत” के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आयामों का संतुलित एवं समन्वित विकास अत्यंत आवश्यक है। एवीके न्यूज सर्विस

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