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भारत ने 100 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की

भारत ने 100 गीगावाट स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता को पार करके एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है, जिससे अक्षय ऊर्जा में वैश्विक अग्रणी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि स्वच्छ, हरित भविष्य के लिए देश की प्रतिबद्धता का प्रमाण है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के अपने महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस वर्षों में भारत की ऊर्जा यात्रा ऐतिहासिक और प्रेरणादायक रही है। सौर पैनल, सौर पार्क और रूफटॉप सौर परियोजनाओं जैसी पहलों में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। परिणामस्वरूप, आज भारत ने 100 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है। हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भारत न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि विश्व को एक नई राह भी दिखा रहा है।

केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि स्वच्छ और हरित भविष्य के प्रति अथक प्रतिबद्धता से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना रूफटॉप सौर ऊर्जा को एक वास्तविकता बना रही है और यह स्थायी ऊर्जा में एक गेम-चेंजर है, जो हर घर को स्वच्छ ऊर्जा से सशक्त बनाती है।

सौर ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि

भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र ने पिछले एक दशक में क्षमता में असाधारण 3450 प्रतिशत की वृद्धि देखी है, जो वर्ष 2014 में 2.82 गीगावाट से बढ़कर वर्ष 2025 में 100 गीगावाट हो गई है। 31 जनवरी, 2025 तक, भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता 100.33 गीगावाट है, जिसमें 84.10 गीगावाट कार्यान्वयन के अधीन है और अतिरिक्त 47.49 गीगावाट प्रस्ताव के अधीन है। देश की हाइब्रिड और चौबीसों घंटे चलने वाली (आरटीसी) अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, 64.67 गीगावाट की परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं और प्रस्ताव दी जा चुकी हैं, जिससे सौर और हाइब्रिड परियोजनाओं की कुल संख्या 296.59 गीगावाट हो गई है।

भारत की अक्षय ऊर्जा वृद्धि में सौर ऊर्जा का प्रमुख योगदान है, जो कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता का 47 प्रतिशत है। वर्ष 2024 में रिकॉर्ड तोड़ 24.5 गीगावाट सौर क्षमता बढ़ाई गई, जो वर्ष 2023 की तुलना में सौर प्रतिष्ठानों में दो गुना से अधिक वृद्धि को दर्शाती है। पिछले साल भी 18.5 गीगावाट उपयोगिता-पैमाने की सौर क्षमता की स्थापना देखी गई, जो वर्ष 2023 की तुलना में लगभग 2.8 गुना वृद्धि है। राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से हैं, जो भारत की कुल उपयोगिता-पैमाने की सौर प्रतिष्ठानों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

भारत में रूफटॉप सोलर सेक्टर में वर्ष 2024 में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिसमें 4.59 गीगावॉट की नई क्षमता स्थापित की गई, जो वर्ष 2023 की तुलना में 53 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इस वृद्धि का एक प्रमुख कारक वर्ष 2024 में शुरू की गई पीएम सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना है, जो अब 9 लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के करीब है, जिससे देश भर के घरों में स्वच्छ ऊर्जा समाधान अपनाने में मदद मिल रही है।

भारत ने सौर विनिर्माण में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्ष 2014 में देश में केवल 2 गीगावॉट की सीमित सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता थी। पिछले एक दशक में, यह वर्ष 2024 में बढ़कर 60 गीगावॉट हो गई है, जिसने भारत को सौर विनिर्माण में विश्व अग्रणी के रूप में स्थापित किया है। निरंतर नीति समर्थन के साथ, भारत वर्ष 2030 तक 100 गीगावॉट की सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता हासिल करने की राह पर है।

केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी के मार्गदर्शन में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रमुख पहलों को लागू कर रहा है। सौर ऊर्जा में 100 गीगावाट की यह उपलब्धि एक अक्षय ऊर्जा महाशक्ति के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करती है, जो लाखों लोगों के लिए स्वच्छ, सतत और सस्ती ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करते हुए एक आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य को आकार प्रदान करती है।

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