महलों में राग-रास है बाबा।
झोपड़ी बहुत उदास है बाबा।।
सवाल नहीं करे जो सत्ता से।
वह जीवित कहां, लाश है बाबा।।
दलितों के घर कालीन बिछा है।
स्वार्थ सत्ता का खास है बाबा।।
सन्नाटे में तुम सरगम जैसे।
माधुर्य करुणा वास है बाबा।।
केवल हथियार न युद्ध जीतते।
बंधी मुठ्ठियां पास हैं बाबा।।
नहीं ठहरते धन रिश्ते-नाते
संसार चौपर-ताश है बाबा।।
महाभारत युद्ध के पीछे क्या।
असमय हास-परिहास है बाबा।।

शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)