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इलेक्ट्रिक साइकिलों के प्रयोग से माइक्रोमोबिलिटी को बढ़ावा के लिए आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में ई-साइकिलों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया


ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में किफायती, सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन के महत्व पर जोर दिया

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल ) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) के सहयोग से आज इलेक्ट्रिक साइकिलों के प्रयोग से माइक्रोमोबिलिटी को बढ़ावा देने पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का मुख्य विषय था “इलेक्ट्रिक साइकिलें ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाती हैं” और इसमें ग्रामीण गतिशीलता बढ़ाने, आजीविका को मजबूत करने और सतत विकास को समर्थन देने में इलेक्ट्रिक माइक्रोमोबिलिटी समाधानों की भूमिका का विश्लेषण किया गया।

यह कार्यशाला केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान की उपस्थिति में आयोजित की गई थी और इसमें केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम), उद्योग प्रतिनिधियों, विकास भागीदारों, अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के वरिष्ठ अधिकारियों और महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों ने भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए महोदय ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में किफायती, सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन के महत्व पर जोर दिया और इलेक्ट्रिक माइक्रोमोबिलिटी समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए मंत्रालयों, राज्यों, उद्योग और विकास भागीदारों के बीच संस्थागत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर परिवहन आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखपति दीदी कार्यक्रम जैसी पहलों से लाभान्वित होने वाली महिलाओं के लिए।

इस कार्यक्रम के दौरान, पायलट राज्यों से प्राप्त साक्ष्य और कार्यान्वयन संबंधी सीखों को दस्तावेजीकृत करते हुए, सामाजिक और परिवर्तनकारी ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण- (एसटीआरईई) प्रभाव आकलन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। पायलट राज्यों की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इलेक्ट्रिक माइक्रोमोबिलिटी समाधानों को अपनाने और बढ़ावा देने में उनकी भूमिका के लिए ऊर्जा चैंपियन के रूप में सम्मानित किया गया।

इलेक्ट्रिक साइकिलों के प्रयोग से माइक्रोबिलिटी को बढ़ावा देने पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रिक साइकिलों का उपयोग ग्रामीण उद्यमियों के लिए सतत परिवहन की यह पहल समयोचित और प्रभावशाली है, जिसमें ग्रामीण उद्यमियों की गतिशीलता में सुधार करने के साथ-साथ सतत और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन समाधानों में योगदान देने की क्षमता है। बेहतर गतिशीलता आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखपति दीदी कार्यक्रम जैसी पहलों से जुड़ी महिलाओं के लिए।

कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण “अपनी इलेक्ट्रिक साइकिल को जानें” का लाइव प्रदर्शन था, जिसमें कार्गो इलेक्ट्रिक साइकिलों और उनके आजीविका-उन्मुख उपयोगों को प्रदर्शित किया गया। मंत्री ने पायलट राज्यों की स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिला लाभार्थियों से बातचीत करके उत्पाद की कार्यक्षमता, प्रासंगिक उपयुक्तता और जमीनी स्तर पर इसके उपयोगों को समझा।

यह राष्ट्रीय कार्यशाला इलेक्ट्रिक साइकिल के प्रयोग से ग्रामीण उद्यमियों के लिए सतत परिवहन पायलट परियोजना से प्राप्त सीखों पर आधारित है, जिसे सीईएसएल ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ साझेदारी में बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में लागू किया था। इस पायलट परियोजना ने प्रदर्शित किया कि किफायती और विश्वसनीय इलेक्ट्रिक कार्गो साइकिलों तक पहुंच शारीरिक श्रम को कम कर सकती है, बाजारों और सेवाओं तक पहुंच में सुधार कर सकती है और महिलाओं के नेतृत्व वाली आजीविका गतिविधियों को सक्षम बना सकती है।

इस कार्यक्रम में तीन विषयगत पैनल चर्चाएं शामिल थीं:

  • पहले पैनल में भारत के इलेक्ट्रिक साइकिल इकोसिस्टम को विस्तार देने के अवसरों का पता लगाया गया, जिसमें विनिर्माण, मांग सृजन और ग्रामीण सेवा नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • दूसरे पैनल में किफायती और विश्वसनीय इलेक्ट्रिक माइक्रोमोबिलिटी समाधानों को सक्षम बनाने के लिए मंत्रालयों के बीच नीतिगत समन्वय पर चर्चा की गई।
  • तीसरे पैनल ने ग्रामीण आजीविका, जलवायु कार्रवाई और टिकाऊ ग्रामीण परिवर्तनों में इलेक्ट्रिक साइकिलों की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसमें राज्यों ने प्रारंभिक कार्यान्वयन के अनुभवों को साझा किया।

राष्ट्रीय कार्यशाला ने समावेशी आजीविका, महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत के लिए बढ़ते, जन-केंद्रित समाधान के रूप में इलेक्ट्रिक साइकिल की क्षमता पर प्रकाश डाला।

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