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दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत: अधूरी सुविधाएं, दवाओं की कमी और सरकारी वादे

स्वास्थ्य किसी भी देश के विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। दिल्ली, जो भारत की राजधानी है, यहां की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं। लेकिन Comptroller and Auditor General (CAG) की हालिया रिपोर्ट ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है।

यह रिपोर्ट 2016-17 से 2021-22 तक की अवधि को कवर करती है और इसमें दिल्ली सरकार द्वारा संचालित माध्यमिक और तृतीयक अस्पतालों की स्थिति की समीक्षा की गई है।

मानव संसाधन की कमी

स्वास्थ्य सेवाओं में पर्याप्त मानव संसाधन होना अनिवार्य है, लेकिन दिल्ली में चिकित्सा स्टाफ की भारी कमी देखी गई।

  • मार्च 2022 तक, स्वास्थ्य विभाग में 21% पद खाली थे।
  • शिक्षण विशेषज्ञों की 30%, गैर-शिक्षण विशेषज्ञों की 28%, और चिकित्सकों की 9% कमी थी।
  • नर्सों की 21% और पैरामेडिकल स्टाफ की 38% कमी पाई गई।

इन आँकड़ों से साफ पता चलता है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को डॉक्टरों और स्टाफ की कमी का सामना करना पड़ता है।

जरूरी दवाओं और उपकरणों की किल्लत

सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी पाई गई।

  • दिल्ली सरकार द्वारा Essential Drug List (EDL) को हर साल अपडेट किया जाना चाहिए था, लेकिन पिछले 10 सालों में केवल तीन बार इसे अपडेट किया गया।
  • 2016-22 के बीच, अस्पतालों को अपनी आवश्यक दवाओं का 33 से 47% तक बाजार से खरीदनी पड़ी, क्योंकि दिल्ली सरकार का Central Procurement Agency (CPA) इन्हें समय पर उपलब्ध कराने में विफल रहा।
  • अस्पतालों में मशीनें खरीदकर बेकार पड़ी रहीं, उदाहरण के लिए ₹45.98 लाख के पैथोलॉजी उपकरण 2018 में खरीदे गए लेकिन कभी इस्तेमाल नहीं हुए।

आयुष्मान भारत योजना से वंचित दिल्ली

भारत सरकार की आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) पूरे देश में लागू हो चुकी है, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसे अब तक लागू नहीं किया है।

इस कारण गरीब परिवारों को इस योजना के तहत ₹5 लाख प्रति वर्ष तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है।

अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं:

  • आपातकालीन सेवाएं (Emergency Services) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पाई गई।
  • CATS एंबुलेंस सेवा में भी गड़बड़ियां मिलीं, कई एंबुलेंस जरूरी उपकरणों के बिना ही चल रही थीं।
  • रक्त बैंक सुविधाएं: चार सरकारी अस्पतालों में से केवल लोक नायक अस्पताल में ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा उपलब्ध थी।

गरीब मरीजों के लिए मुफ्त इलाज में अनदेखी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2007 में फैसला दिया था कि जिन निजी अस्पतालों को सस्ती सरकारी ज़मीन दी गई है, वे अपनी OPD सुविधाओं का 25% और IPD बेड का 10% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मरीजों के लिए आरक्षित करें।

लेकिन रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि:

  • 47 में से 19 सरकारी अस्पतालों ने अब तक रेफरल केंद्र ही स्थापित नहीं किए हैं।
  • EWS मरीजों की शिकायतों को दर्ज करने और निपटाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।

स्वास्थ्य योजनाओं का अधूरा कार्यान्वयन

दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है:

  1. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) के तहत सिर्फ 30% गर्भवती महिलाओं को मुफ्त आहार और जांच की सुविधा दी गई।
  2. टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की स्थिति खराब पाई गई, जागरूकता अभियान सही ढंग से नहीं चलाया गया।
  3. परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत पुरुष नसबंदी का लक्ष्य केवल 41% ही हासिल हुआ।
  4. नर्सिंग स्टाफ और फार्मासिस्टों के लिए नियामक निकायों (Delhi Nursing Council, Pharmacy Council) को समय पर पुनर्गठित नहीं किया गया।

दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाती है तो जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा।

Source: CAG Report

Full Report:

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