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नवकार महामंत्र दिवस और महावीर जयंती: आंतरिक जागृति, सत्य और करुणा का राष्ट्रीय आह्वान

भारत 9 अप्रैल को भगवान महावीर के जन्मदिवस महावीर जयंती को श्रद्धा और भक्ति के साथ मना रहा है। यह दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की शिक्षाओं—अहिंसा, सत्य, संयम और आंतरिक शांति—के प्रति समर्पण का प्रतीक है। आज जब दुनिया अनेक संकटों से जूझ रही है, भगवान महावीर का शाश्वत संदेश और भी प्रासंगिक और प्रेरणास्पद बन गया है।

इस वर्ष महावीर जयंती की विशेषता रही नवकार महामंत्र दिवस का उद्घाटन, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समर्पित भाव से संबोधित किया। उन्होंने नवकार मंत्र को केवल धार्मिक जप नहीं, बल्कि भारतीय जीवनदर्शन का आधार बताते हुए कहा—

“नवकार मंत्र केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि हमारी आस्था का मूल और जीवन का सार है।”

प्रधानमंत्री ने अपने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि कैसे गुजरात में जैन आचार्यों के सान्निध्य ने उनके जीवन और सोच को प्रारंभिक उम्र में ही प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म कोई बीती हुई परंपरा नहीं, बल्कि एक जीवंत और अत्यंत प्रासंगिक जीवनशैली है, विशेष रूप से उस भारत के लिए जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सँभालते हुए आगे बढ़ रहा है।

जैसे नई संसद के प्रवेश द्वार पर सम्मेद शिखर का भव्य चित्रण हो, या विदेशों से प्राचीन तीर्थंकर मूर्तियों की वापसी, यह केवल सांस्कृतिक स्मृतियाँ नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक निरंतरता के प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती बताया और उसका समाधान बताया—एक स्थायी जीवनशैली, जिसे जैन समाज सदियों से अपनाता आया है। जैन धर्म के सिद्धांत—सादगी, संयम और प्रकृति के साथ सामंजस्य—आज के वैश्विक विमर्श में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने विशेष रूप से भगवान महावीर की शिक्षाओं को मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment) से जोड़ा।

“परस्परोपग्रहो जीवनम्”

जैन धर्म का यह मूल मंत्र, सभी जीवों की परस्पर निर्भरता, केवल दार्शनिक विचार नहीं, बल्कि आधुनिक पारिस्थितिक संतुलन का भी गहरा सन्देश देता है।

नये भारत के लिए प्रधानमंत्री के नव संकल्प

नवकार मंत्र की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नौ संकल्पों की घोषणा की, जो भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना को नई दिशा देने वाले हैं:

  1. जल संरक्षण: हर बूंद की कीमत समझें और जल बचाने का संकल्प लें।
  2. माँ के नाम पर एक पेड़ लगाएँ: 100 करोड़ पौधे पहले ही लगाए जा चुके हैं, अब हर नागरिक अपनी माँ के नाम एक पेड़ लगाए।
  3. स्वच्छता मिशन: स्वच्छता को व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी बनाएं—हर गली, हर मोहल्ले को स्वच्छ बनाएं।
  4. वोकल फॉर लोकल: स्थानीय उत्पादों को अपनाएं, उन्हें वैश्विक पहचान दें।
  5. भारत की खोज: विदेश जाने से पहले भारत को जानें, उसके राज्यों, भाषाओं, और सांस्कृतिक विविधता को अनुभव करें।
  6. प्राकृतिक खेती को अपनाएँ: रसायनों से मुक्त खेती को बढ़ावा दें और धरती माँ को स्वस्थ रखें।
  7. स्वस्थ जीवनशैली: भारतीय आहार और संयमित जीवन अपनाएं, जिसमें मिलेट्स और तेल की सीमित खपत शामिल हो।
  8. योग और खेल: अपने दैनिक जीवन में योग और खेल को शामिल करें, शारीरिक-मानसिक संतुलन बनाए रखें।
  9. गरीबों की सहायता: ज़रूरतमंदों के लिए सेवा करें—चाहे हाथ बढ़ाकर हो या एक थाली भरकर।

ज्ञान और परंपरा का संरक्षण

सरकार ने जैन धर्म के प्राचीन ग्रंथों, प्राकृत और पाली भाषा में रचित साहित्य को डिजिटलीकरण के माध्यम से सुरक्षित करने की पहल की है। ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत इन अमूल्य धरोहरों को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य हो रहा है।

मार्च 2024 में, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में ‘जैन अध्ययन केंद्र’ की स्थापना के लिए 25 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की। यह केंद्र न केवल अनुसंधान को बढ़ावा देगा बल्कि विश्वभर में जैन सिद्धांतों को जीवनशैली के रूप में प्रचारित करने का मंच बनेगा।

अमर प्रतीक: स्मारक टिकट और सिक्का

अप्रैल 2024 में, भगवान महावीर के 2550वें निर्वाण महोत्सव के उपलक्ष्य में एक स्मारक टिकट और सिक्का जारी कर राष्ट्र ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

जैसे-जैसे भारत विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है, भगवान महावीर का करुणा, संयम और आत्मविजय का संदेश मार्गदर्शक प्रकाश की तरह साथ चल रहा है। नवकार मंत्र की साधना, जैन साधुओं का अनुशासन और जीवन की परस्पर निर्भरता का दर्शन—ये न केवल भारत बल्कि पूरी मानवता को एक शांतिपूर्ण और संतुलित जीवन की ओर ले जाते हैं।

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