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डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी रुड़की को एशिया का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज बताते हुए किया उच्च स्तरीय अभिनंदन

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कर्मचारी, लोक शिकायत और पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में उच्च स्तरीय शैक्षणिक संबोधन देते हुए इसे एशिया का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज और अनुसंधान, नवाचार एवं सामाजिक जुड़ाव का उत्कृष्ट आदर्श बताया।

आईआईटी रुड़की, जिसे पहले रुड़की विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता था, ने कल जारी राष्ट्रीय संस्थान फ्रेमवर्क (NIF) रैंकिंग में देश में छठा स्थान प्राप्त किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अपनी बहुआयामी अकादमिक संरचना और भौगोलिक स्थिति के लाभ के कारण यह संस्थान हिमालय अध्ययन जैसे क्षेत्रों में पहल कर सकता है, जिनमें आपदा प्रबंधन से लेकर सुगंधित आर्थिक गतिविधियाँ शामिल हैं।

स्टार्टअप और नवाचार में योगदान

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी रुड़की के लगभग 240 स्टार्टअप्स का उल्लेख किया, जो पूरे भारत में पंजीकृत 1.7 लाख स्टार्टअप्स का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “आईआईटी रुड़की के नौ उत्कृष्टता केंद्र, आपदा जोखिम, लचीलापन और सतत विकास में अग्रणी कार्य, तथा ‘वाइब्रेंट विलेजेस’ जैसी स्थानीय समुदायों के साथ गहन सहभागिता इसे एक सच्चा आदर्श बनाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि हिमालय क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह संस्थान न केवल आपदा प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि “शांति काल” में लचीलापन और विकास निर्माण में भी इसकी भूमिका अहम है।

अकादमिक और नेतृत्व उत्कृष्टता

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत और उप-निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह के नेतृत्व तथा वरिष्ठ फैकल्टी के योगदान की सराहना की, जिन्होंने संस्थान को अकादमिक और अनुसंधान उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर किया। उन्होंने इस संस्थान की विरासत को याद करते हुए कहा कि यह भारत का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज होने के बावजूद बिना किसी बदलाव के आईआईटी बन गया, जो इसकी दशकों से अर्जित प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास का दुर्लभ उदाहरण है।

राष्ट्रीय संदर्भ में आईआईटी रुड़की की भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सरकार की दूरदर्शी पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक स्टार्टअप परिदृश्य में उभर रहा है और अब यह विश्व में तीसरे स्थान पर है, जिसमें 1.7 लाख पंजीकृत उद्यम शामिल हैं। इनमें से लगभग आधे उद्यम छोटे शहरों और कस्बों से हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह अवसरों का लोकतंत्रीकरण है और आईआईटी रुड़की जैसी संस्थाएँ इस गति को बढ़ावा दे सकती हैं।”

उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष, नाभिकीय ऊर्जा और हिमालय संसाधनों में नए अवसरों की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि अगली औद्योगिक क्रांति बायोटेक्नोलॉजी-प्रेरित होगी। उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि यह बायोटेक्नोलॉजी और पुनर्जीवक प्रक्रियाओं जैसे नए क्षेत्रों का अन्वेषण करे, जबकि सिविल इंजीनियरिंग और आपदा प्रबंधन में अपनी मजबूती बनाए रखे। उन्होंने हाल ही की सरकारी पहलों जैसे कि लैवेंडर खेती में पर्पल रिवोल्यूशन और Bio-E³ (रोजगार, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था) अंतर्गत नई बायोटेक्नोलॉजी नीतियों का भी उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा और उद्योग मिलकर इन पहलों को साकार कर सकते हैं।

उद्योग-शिक्षा सहयोग और नवाचार प्रेरित उद्यम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुरुआती उद्योग संबंधों और मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए भी आग्रह किया। उन्होंने दीक्षांत प्राप्त छात्रों को सरकारी या कॉर्पोरेट नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय नवाचार-प्रेरित उद्यमों के संचालक बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने याद दिलाया कि भारत की हाल की उपलब्धियाँ—टीका विकास, अंतरिक्ष अन्वेषण और वैश्विक नवाचार रैंकिंग में प्रगति—सरकारी समर्थन, निजी पहल और युवा प्रतिभा के सम्मिलित प्रयास से ही संभव हो सकीं।

“आप सबसे उत्तम समय में जन्मे हैं,” उन्होंने छात्रों से कहा। “आपके भाग्य ने आपको यह विशेष अवसर प्रदान किया है, और मुझे विश्वास है कि आप भारत द्वारा आज प्रस्तुत अवसरों का सर्वोत्तम लाभ उठाएँगे।”

दीक्षांत समारोह में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. बी.वी.आर. मोहन रेड्डी, निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत, उप-निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह, फैकल्टी सदस्य और दीक्षांत प्राप्त छात्र उपस्थित थे।

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