विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2025 पर कोट्टायम में राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का आयोजन: आपदा एवं आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित चर्चा

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2025 के अवसर पर राष्ट्रीय होम्योपैथी मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (National Homoeopathy Research Institute in Mental Health – NHRIMH), जो आयुष मंत्रालय के अधीन केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) की शीर्ष अनुसंधान संस्था है, द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन 10 और 11 अक्टूबर 2025 को कोट्टायम स्थित एनएचआरआईएमएच सभागार में आयोजित हुआ, जिसका केंद्रीय विषय था — “सेवाओं तक पहुँच: आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य”

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से होम्योपैथी, मानसिक स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और अनुसंधान क्षेत्रों के अग्रणी विशेषज्ञ, विद्वान और चिकित्सक एक साथ एक मंच पर आए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था — आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए एकीकृत और साक्ष्य-आधारित रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में होम्योपैथी की भूमिका को सशक्त रूप से प्रस्तुत करना।

उद्घाटन सत्र और प्रमुख संबोधन

उद्घाटन सत्र में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम के कुलपति डॉ. सी. टी. अरविंद कुमार ने सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने संकटों और आपात स्थितियों में समग्र, व्यक्ति-केंद्रित मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. सुभाष कौशिक, महानिदेशक, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), नई दिल्ली, ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के मनोसामाजिक ढाँचों में होम्योपैथी की उपयोगिता को मजबूत शोध साक्ष्यों के साथ और अधिक एकीकृत करने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से आपदा-पश्चात पुनर्वास और मानसिक दृढ़ता (resilience) निर्माण में होम्योपैथी की भूमिका को रेखांकित किया।

श्री चेतन कुमार मीणा, आईएएस, जिला कलेक्टर, कोट्टायम ने बतौर सम्मानित अतिथि सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने आपदा प्रतिक्रिया रणनीतियों में होम्योपैथी को सम्मिलित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि “एनएचआरआईएमएच जैसे संस्थान मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने और एकीकृत उपचार मॉडल को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।”

डॉ. देबदत्त नायक, सहायक निदेशक (स्वास्थ्य) एवं प्रभारी अधिकारी, एनएचआरआईएमएच, ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब वैश्विक स्तर पर आपदाओं, संघर्षों और महामारी जैसी परिस्थितियों के कारण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की माँग बढ़ रही है। उन्होंने एकीकृत, सुलभ और समावेशी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

समापन सत्र में डॉ. आर. सिथार्थन, प्रधानाचार्य, एनएचआरआईएमएच, कोट्टायम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और आयोजन दल के प्रति आभार व्यक्त किया।

पहले दिन के वैज्ञानिक सत्र

सम्मेलन के पहले दिन आयोजित विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में “आपदा मानसिक स्वास्थ्य: वास्तविक अनुभव और उभरते रुझान”, “जल विज्ञान संबंधी आपदाओं में मनोरोग संकट और सामुदायिक प्रबंधन: वायनाड, केरल का अनुभव”, “आपदा प्रबंधन में होम्योपैथिक दृष्टिकोण”, “संकट की स्थितियों में मजबूती और पुनर्निर्माण”, “होम्योपैथी में N-of-1 परीक्षण एवं ट्रांसलेशनल नेटवर्क”, तथा “एडीएचडी में भावनात्मक असंतुलन और उसका होम्योपैथिक उपचार” जैसे विषयों पर गहन चर्चाएँ हुईं।

विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आपदाओं के दौरान उत्पन्न मानसिक स्वास्थ्य संकटों के समाधान में होम्योपैथी जैसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियाँ प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं, बशर्ते उन्हें साक्ष्य-आधारित अनुसंधान से और अधिक सुदृढ़ किया जाए।

दूसरे दिन की चर्चाएँ और अनुसंधान प्रस्तुतियाँ

सम्मेलन के दूसरे दिन मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान में क्रियाविधि संबंधी ढाँचे, नैदानिक और प्रयोगशाला-आधारित मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन, आघात और मनोरोग आपात स्थितियों के प्रति मानवीय प्रतिक्रिया, तथा पीटीएसडी, एडीएचडी, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार, मनोरोग संबंधी विकारों और मादक द्रव्यों से मुक्ति के केस-आधारित अध्ययन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।

एनएचआरआईएमएच के स्नातकोत्तर शोधार्थियों ने अपने शोध-प्रबंधों में द्विध्रुवी विकार, इंटरनेट की लत, सिज़ोफ्रेनिया, प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार, जुनूनी-बाध्यकारी विकार (OCD), शराब पर निर्भरता, भांग के सेवन से उत्पन्न विकार, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार तथा पार्किंसंस रोग से संबंधित अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

इन प्रस्तुतियों में व्यक्तिगत होम्योपैथिक उपचार पद्धति के माध्यम से तीव्र मनोरोग लक्षणों के प्रबंधन के केस स्टडीज़ भी शामिल थीं, जिन्होंने उपस्थित विशेषज्ञों को व्यावहारिक अनुसंधान के नए दृष्टिकोण प्रदान किए।

विशेष व्याख्यान और सहयोग की दिशा

डॉ. के. सी. मुरलीधरन, सहायक निदेशक (स्वास्थ्य) एवं प्रशासन प्रभारी, CCRH, नई दिल्ली, ने “समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की उभरती भूमिका” विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए अंतर-विषयक सहयोग (interdisciplinary collaboration) और समुदाय-स्तरीय हस्तक्षेप आवश्यक हैं।

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