NEW English Version

पूर्वोत्तर भारत: विकास का नया इंजन — मंत्रालय की वार्षिक उपलब्धियों पर रिपोर्ट

भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को “विकास इंजन” के रूप में वर्णित करते हुए, केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने हाल ही में मंत्रालय की एक वर्ष की उपलब्धियों (अगस्त 2024 – सितंबर 2025) पर विस्तृत मीडिया ब्रीफिंग की। इस अवसर पर उनके साथ संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, शिक्षा एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, तथा उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव श्री चंचल कुमार भी उपस्थित रहे।

पूर्वोत्तर भारत: विकास का नया इंजन — मंत्रालय की वार्षिक उपलब्धियों पर रिपोर्ट

श्री सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र में परिवर्तन की अभूतपूर्व गति आई है। मंत्रालय ने “सुधार, पहुंच और परिणाम” के तीन स्तंभों पर कार्य करते हुए इस क्षेत्र को सीमांत स्थिति से निकालकर राष्ट्रीय विकास के अग्रणी क्षेत्र के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर आज एक नए भारत की भावना — सशक्त, जुड़ा हुआ और भविष्य के लिए तैयार — का प्रतीक है।”

आर्थिक उपलब्धियां और विकास का आधार

श्री सिंधिया ने बताया कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र की दशकीय जीडीपी वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इस क्षेत्र की 70 प्रतिशत आबादी 28 वर्ष से कम आयु की है, जो इसे जनसांख्यिकीय रूप से भारत का युवा इंजन बनाती है। उच्च साक्षरता दर, सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक संपदा के साथ, यह क्षेत्र विकास की नई संभावनाओं से परिपूर्ण है।

वित्त वर्ष 2024-25 में मंत्रालय ने 3,447.71 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक व्यय किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 74.4 प्रतिशत वृद्धि और तीन वर्षों में 200 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्शाता है। यह उपलब्धि मंत्रालय के राजकोषीय अनुशासन, डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी वितरण प्रणाली का परिणाम है।

साप्ताहिक समीक्षा, चार किश्तों में निधि आवंटन और “पूर्वोत्तर विकास सेतु पोर्टल” के माध्यम से परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से 97 प्रतिशत परियोजना निरीक्षण कवरेज और 91 प्रतिशत परियोजनाओं की पूर्णता दर हासिल की गई।

शासन सुधार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण

मंत्रालय ने शासन सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। पर्यटन, निवेश, कृषि, खेल, हस्तशिल्प, बुनियादी ढांचा, आर्थिक गलियारा और प्रोटीन आत्मनिर्भरता जैसे आठ प्रमुख क्षेत्रों में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय कार्यबलों का गठन किया गया है। इन कार्यबलों का उद्देश्य अंतर-राज्यीय समन्वय को बढ़ावा देना और नीतिगत तालमेल के माध्यम से विकास को क्षेत्रीय दृष्टिकोण से आगे बढ़ाना है।

साथ ही, मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालयी सुविधा तंत्र के माध्यम से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति दी है — जिनमें शिलांग हवाई अड्डे का विस्तार, सिक्किम में राष्ट्रीय राजमार्ग-10 का वैकल्पिक एलाइनमेंट, और त्रिपुरा के कैलाशहर हवाई अड्डे का विकास शामिल हैं। इन पहलों ने क्षेत्र की सड़क और हवाई संपर्क को सशक्त किया है।

निवेश और औद्योगिक एकीकरण

पूर्वोत्तर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025 को ऐतिहासिक माना जा रहा है। भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित “राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025” में 8 मुख्यमंत्रियों, 8 केंद्रीय मंत्रियों, 100 से अधिक राजदूतों और 108 सार्वजनिक उपक्रमों की भागीदारी रही। इस आयोजन से 4.48 लाख करोड़ रुपये मूल्य के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए — जो पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे बड़ा निवेश संकेतक है।

इसके अलावा, दिसंबर 2024 में आयोजित “अष्टलक्ष्मी महोत्सव” ने सांस्कृतिक एकता और आर्थिक अवसरों को जोड़ा, जिसके दौरान 2,326 करोड़ रुपये के निवेश अवसर सृजित हुए। इसी अवधि में अगरतला में आयोजित “नॉर्थ ईस्ट बैंकर्स कॉन्क्लेव” में 51 नई बैंक शाखाओं, विस्तारित एटीएम नेटवर्क, और एमएसएमई ऋण तक पहुंच के विस्तार की घोषणाएं हुईं।

वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में एनईडीएफआई (North Eastern Development Finance Institution) के माध्यम से 5,300 से अधिक एमएसएमई को सहायता प्रदान की गई, जबकि 766 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाकर स्टार्टअप और उद्यमिता को प्रोत्साहित किया गया।

पर्यटन, संपर्क और वैश्विक पहचान

मंत्रालय ने “इंटीग्रेटेड ब्रांड नॉर्थईस्ट” रणनीति के तहत पूर्वोत्तर को एक वैश्विक पर्यटन और सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य किया है। प्रत्येक राज्य ने अपनी विशिष्ट पहचान को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख उत्पादों को उभारा है — जैसे असम का मूगा सिल्क, मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, मणिपुर का पोलो, सिक्किम की जैविक खेती, और त्रिपुरा का क्वीन पाइनएप्पल।

काजीरंगा, सोहरा, जीरो, थेनजोल, माताबारी, किसामा, नामची और मोइरंग जैसे आठ प्रमुख पर्यटन स्थलों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत विश्व स्तरीय आकर्षण केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में होमस्टे और इको-टूरिज्म मॉडल के विस्तार से ग्रामीण आय में 45 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।

श्री सिंधिया ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में क्षेत्र में हवाई अड्डों की संख्या 9 से बढ़कर 17 हो गई है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में अब 4 हवाई अड्डे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक सभी पूर्वोत्तर राज्यों को रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। साथ ही, कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएँ पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करेंगी।

कृषि, उद्योग और उद्यमिता

पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था को विविधता देने के लिए मंत्रालय ने कृषि और उद्योग आधारित विकास योजनाएँ आरंभ की हैं। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – पाम ऑयल (NMEO–PO) के तहत 47 नर्सरी और 5 बीज उद्यानों की स्थापना की गई है तथा 68,000 हेक्टेयर भूमि को खेती के अंतर्गत लाया गया है।

अगरवुड सेक्टर में निर्यात कोटा में छह गुना वृद्धि हुई है और निर्यात सुविधा पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी व्यापार व्यवस्था विकसित की जा रही है। वहीं, बांस उद्योग के लिए 126.7 करोड़ रुपये की 22 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनसे 2,587 कारीगरों को प्रशिक्षण मिला और अमेज़न जैसे प्लेटफॉर्म से उन्हें बाजार से जोड़ा गया। इन पहलों से रोजगार सृजन, ग्रामीण उद्यमिता और निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »