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विशिष्ट इस्पात उत्पादन को मिलेगा नया आयाम: केंद्रीय इस्पात मंत्री ने पीएलआई योजना के तीसरे चरण का किया शुभारंभ

केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने विशिष्ट इस्पात (Specialty Steel) के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई – 1.2) के तीसरे चरण का औपचारिक शुभारंभ किया है। यह योजना भारत को वैश्विक इस्पात उत्पादन के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप यह पहल न केवल इस्पात क्षेत्र में तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देगी, बल्कि रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और उच्च-स्तरीय इस्पात उत्पादन क्षमता के विस्तार में भी योगदान देगी।

पीएलआई योजना की पृष्ठभूमि और अब तक की उपलब्धियाँ

भारत सरकार की विशिष्ट इस्पात के लिए पीएलआई योजना को जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति प्रदान की थी। इस योजना का उद्देश्य इस्पात क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना, उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात उत्पादों का घरेलू निर्माण बढ़ाना और भारत को “इस्पात उत्पादन का वैश्विक केंद्र” बनाना है।

अब तक इस योजना के दो चरण पूरे हो चुके हैं, जिन्होंने 43,874 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित किया है। साथ ही, 30,760 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं। योजना में चिन्हित 14.3 मिलियन टन विशिष्ट इस्पात के अनुमानित उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

सितंबर 2025 तक, पीएलआई योजना के पहले दो चरणों में शामिल कंपनियों ने कुल 22,973 करोड़ रुपये का निवेश किया है और 13,284 रोजगार सृजित किए हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना ने इस्पात क्षेत्र में स्थायी औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति की मजबूत नींव रखी है।

तीसरे चरण (पीएलआई 1.2) का उद्देश्य और दायरा

पीएलआई योजना का तीसरा चरण (PLI 1.2) विशेष रूप से उन उन्नत और रणनीतिक इस्पात उत्पादों पर केंद्रित है जो उच्च तकनीकी मानकों पर आधारित हैं और जिनकी वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। इस चरण के तहत सरकार का उद्देश्य सुपर एलॉय, सीआरजीओ (Cold Rolled Grain Oriented Steel), स्टेनलेस स्टील लॉन्ग और फ्लैट उत्पाद, टाइटेनियम एलॉय, तथा कोटेड स्टील जैसे उच्च-स्तरीय उत्पादों में निवेश आकर्षित करना है।

यह पहल न केवल भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ बनाएगी। इसके साथ ही, यह योजना इस्पात उद्योग में अनुसंधान, नवाचार और उन्नत तकनीकी निर्माण प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करेगी।

तीसरे चरण (पीएलआई 1.2) की प्रमुख विशेषताएँ

  1. आवेदन अवधि
    इस योजना के अंतर्गत आवेदन ऑनलाइन पोर्टल https://plimos.mecon.co.in के माध्यम से आमंत्रित किए जाएंगे। आवेदन की विंडो तीसरे चरण के शुभारंभ की तारीख से 30 दिनों की अवधि तक खुली रहेगी।
  2. पात्रता मानदंड
    वे सभी पंजीकृत कंपनियाँ जो भारत में अधिसूचित इस्पात उत्पादों के पूर्ण विनिर्माण में संलग्न हैं, आवेदन करने के लिए पात्र होंगी। इससे घरेलू विनिर्माण इकाइयों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
  3. उत्पाद कवरेज
    पीएलआई योजना के तीसरे चरण में पांच प्रमुख लक्ष्य खंडों में 22 उत्पाद उप-श्रेणियाँ शामिल हैं। इनमें रणनीतिक इस्पात ग्रेड, वाणिज्यिक ग्रेड (श्रेणी 1 एवं 2) और लेपित/तार उत्पाद जैसे खंड शामिल हैं।
  4. प्रोत्साहन दरें
    प्रोत्साहन की दरें उत्पाद की उप-श्रेणी और उत्पादन वर्ष के आधार पर निर्धारित की गई हैं। यह दर वृद्धिशील बिक्री के 4 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक होगी, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
  5. प्रोत्साहन अवधि
    लाभ वित्त वर्ष 2025-26 से शुरू होकर अधिकतम पाँच वर्षों तक उपलब्ध रहेंगे। इन प्रोत्साहनों का वास्तविक वितरण वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू किया जाएगा।
  6. आधार वर्ष में परिवर्तन
    मौजूदा आर्थिक रुझानों और मूल्य परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए, प्रोत्साहन गणना के लिए आधार वर्ष को 2019-20 से संशोधित कर 2024-25 कर दिया गया है। इससे प्रोत्साहन संरचना अधिक यथार्थवादी और प्रतिस्पर्धात्मक बनेगी।

भारतीय इस्पात उद्योग के लिए संभावित लाभ

पीएलआई योजना का तीसरा चरण भारतीय इस्पात उद्योग के लिए बहुआयामी लाभ लेकर आएगा।

  • यह नए निवेश को आकर्षित करेगा, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
  • उच्च गुणवत्ता वाले विशिष्ट इस्पात उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी।
  • उद्योग में नवाचार और तकनीकी प्रगति को गति मिलेगी, विशेषकर सुपर एलॉय और टाइटेनियम एलॉय जैसे क्षेत्रों में।
  • इससे निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी और भारत वैश्विक इस्पात बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरेगा।
  • ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार सृजन के नए अवसर खुलेंगे, जिससे आर्थिक गतिविधियों में संतुलित विकास होगा।
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