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दूरसंचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का पूर्व शिखर कार्यक्रम आयोजित

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया के सहयोग से बुधवार को नई दिल्ली के पूर्वी किदवई नगर स्थित एसटीपीआई कॉन्फ्रेंस फैसिलिटी में “दूरसंचार में एआई” विषय पर इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का पूर्व शिखर कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारत के दूरसंचार क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग, इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों, नीतिगत पहलुओं और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर विचार विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया।

दूरसंचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का पूर्व शिखर कार्यक्रम आयोजित

कार्यक्रम में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, ओईएम, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और नीति निर्माताओं के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता दूरसंचार नेटवर्क, सेवा वितरण प्रणालियों और ग्राहक जुड़ाव के स्वरूप को बदल रही है। यह आयोजन भारत के एआई संवर्धित डिजिटल अवसंरचना की ओर बढ़ते संक्रमण के दौरान वास्तविक उपयोग मामलों और भविष्य की रणनीतियों को प्रस्तुत करने का अवसर भी बना।

कार्यक्रम का शुभारंभ टीआरएआई के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी, टीआरएआई के सदस्य रितु रंजन मित्तर, टीआरएआई के सदस्य डॉ. एमपी तंगीराला, टीआरएआई के सचिव अतुल कुमार चौधरी, एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार और आईआईटी गांधीनगर के निदेशक प्रोफेसर रजत मूना द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

अपने उद्घाटन संबोधन में एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने एआई आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर बल दिया, जो स्टार्टअप्स, शिक्षा जगत और उद्योग को एक साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि जिसे पहले केवल एक साधारण पाइप माना जाता था, वह अब एक बुद्धिमान पाइप में परिवर्तित हो चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 जिम्मेदार और प्रभावशाली एआई अपनाने के लिए एक समग्र और भविष्योन्मुखी ढांचा प्रदान करेगा।

इसके पश्चात टीआरएआई के सचिव अतुल कुमार चौधरी ने अपने संबोधन में सेवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए उपभोक्ता संरक्षण और नैतिक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना नियामक ढांचे की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार एआई आधारित प्रणालियों का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब पारदर्शिता और जवाबदेही को केंद्र में रखा जाए।

मुख्य अतिथि के रूप में टीआरएआई के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के दूरसंचार विकास के अगले चरण का एक प्रमुख आधार बनने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई अब केवल एक उन्नत अवधारणा नहीं, बल्कि दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक मूलभूत क्षमता बन चुकी है। नेटवर्क स्वचालन से लेकर स्पैम पहचान तक, एआई पहले से ही दूरसंचार सेवाओं के अनुभव और वितरण को व्यापक रूप से प्रभावित कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई अनुप्रयोगों को पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के सिद्धांतों के अनुरूप विकसित और तैनात किया जाना चाहिए, ताकि यह भविष्य में विश्वसनीय और समावेशी बना रहे।

उद्घाटन सत्र का समापन स्मृति चिन्हों के वितरण और गणमान्य अतिथियों के समूह चित्र के साथ हुआ। इसके बाद टीआरएआई के सलाहकार समीर गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वैज्ञानिक ‘जी’ कविता भाटिया, सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. एसपी कोचर, सी डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय और प्रोफेसर रजत मूना ने विशेष संबोधन दिए। वक्ताओं ने स्वदेशी एआई अनुसंधान, सुरक्षित तैनाती और क्षमता निर्माण के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

तकनीकी सत्रों में एआई आधारित दूरसंचार नेटवर्क पर गहन चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता टीआरएआई के सदस्य रितु रंजन मित्तर ने की। इन चर्चाओं में एआई सक्षम प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ट्रैफिक ऑप्टिमाइजेशन और एनोमली डिटेक्शन जैसे उपयोग मामलों पर प्रकाश डाला गया, जो भारत के विस्तारित 5जी और फाइबर आधारित नेटवर्क को अधिक कुशल, आत्मनिर्भर और स्व उपचारात्मक बनाने में सहायक हैं। वक्ताओं ने इंटेलिजेंट नेटवर्क स्लाइसिंग, धोखाधड़ी रोकथाम और एआई नेटिव आर्किटेक्चर के व्यावहारिक उदाहरण भी साझा किए।

दूरसंचार सेवाओं में जिम्मेदार एआई विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता डॉ. एमपी तंगीराला ने की। इस सत्र में उपभोक्ता गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और विश्वास के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा के दौरान यह बताया गया कि एआई आधारित विश्लेषण और अनुशंसा प्रणालियां किस प्रकार अनुकूलित मोबाइल योजनाओं, स्मार्ट डेटा पैक और लक्षित सेवाओं के माध्यम से ग्राहक अनुभव को बेहतर बना रही हैं। साथ ही स्पैम कॉल पहचान, अवांछित संचार फिल्टरिंग और सुरक्षित डिजिटल सामग्री प्रबंधन में एआई की भूमिका पर भी विस्तार से विचार किया गया।

कार्यक्रम में देश भर से आए उद्योग प्रतिनिधियों, स्टार्टअप संस्थापकों, दूरसंचार इंजीनियरों और एआई विशेषज्ञों ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र में एआई अपनाने की भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए। सत्रों का समापन सभी वक्ताओं को पौधे भेंट करने और समूह फोटो के साथ हुआ।

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