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भारत का क्वांटम भविष्य अमरावती से शुरू, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत राज्य बनेगा रणनीतिक केंद्र: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने अमरावती में “अमरावती क्वांटम वैली” के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल केवल एक इमारत की आधारशिला नहीं, बल्कि भारत के क्वांटम भविष्य की नींव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वांटम प्रौद्योगिकी अब विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नेतृत्व के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है।

भारत का क्वांटम भविष्य अमरावती से शुरू, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत राज्य बनेगा रणनीतिक केंद्र: डॉ. जितेंद्र सिंह

मंत्री ने कहा कि यदि भारत आने वाले दशकों में अपनी संचार प्रणालियों, रक्षा ढांचे, स्वास्थ्य सेवा नवाचार और वैश्विक तकनीकी स्थिति को सुरक्षित रखना चाहता है, तो उसे इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। अमरावती क्वांटम वैली को इसी दृष्टि से विकसित किया जा रहा है, ताकि भारत उभरती प्रौद्योगिकियों की वैश्विक दौड़ में मजबूत स्थान प्राप्त कर सके।

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिक्षा राज्य मंत्री नारा लोकेश, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी सहित अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, राज्य अधिकारी, शिक्षाविद और छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शिलान्यास पट्टिका और अमरावती क्वांटम वैली के लोगो का अनावरण किया गया। साथ ही आईबीएम और टीसीएस की क्वांटम क्लाउड सेवाओं का शुभारंभ, आईबीएम-टीसीएस क्वांटम इनोवेशन सेंटर की स्थापना, क्वांटम टैलेंट हब की घोषणा तथा एसआरएम विश्वविद्यालय द्वारा क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पहलें सामने आईं। नौ उद्योग भागीदारों के साथ हुए समझौता ज्ञापन इस परियोजना को उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के समन्वित सहयोग का उदाहरण बनाते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री नायडू के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वे ऐसे नेता हैं जो भविष्य की संभावनाओं को पहचानते हैं और दीर्घकालिक विकास की दिशा में कार्य करते हैं। उन्होंने हैदराबाद के हाई-टेक सिटी के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित शासन की वह दृष्टि आज आंध्र प्रदेश में तेज प्रगति के रूप में दिखाई दे रही है। मंत्री ने इसे सहकारी संघवाद की सच्ची भावना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित “डबल इंजन” मॉडल का प्रभावी उदाहरण बताया, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर विकास को गति देते हैं।

मंत्री ने हाल ही में विशाखापत्तनम की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय महासागर विज्ञान केंद्र परियोजना की चर्चा की। वर्ष 2006 में शुरू हुई यह परियोजना लगभग दो दशकों तक लंबित रही, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार के कार्यभार संभालने के कुछ ही महीनों के भीतर पूरी हो गई। यह केंद्र भारत के गहन महासागर मिशन के लिए एक प्रमुख आधार बनेगा और देश की नीली अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को मजबूती प्रदान करेगा।

उन्होंने बताया कि भारत आज उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास समर्पित राष्ट्रीय क्वांटम मिशन है। लगभग छह हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ यह मिशन 17 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों में संचालित हो रहा है। इसे चार प्रमुख क्षेत्रों में व्यवस्थित किया गया है, जिनमें क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री और उपकरण शामिल हैं। मिशन के लक्ष्यों में आठ वर्षों के भीतर एक हजार भौतिक क्यूबिट क्षमता वाले क्वांटम कंप्यूटर का विकास, सुरक्षित ग्राउंड-टू-ग्राउंड संचार नेटवर्क की स्थापना, लंबी दूरी के क्वांटम संचार को सक्षम बनाना और दो हजार किलोमीटर तक अंतर-शहरी क्वांटम कुंजी वितरण हासिल करना शामिल है।

छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति की आधारशिला बनने जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि क्वांटम कंप्यूटिंग से लैस भविष्य की दुनिया में पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रणालियां पर्याप्त नहीं होंगी। क्वांटम एन्क्रिप्शन डेटा सुरक्षा को ऐसे स्तर पर पहुंचाएगा, जिसे भेदना लगभग असंभव होगा और इसे डिकोड करने में अत्यधिक समय लग सकता है। रक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में यह तकनीक अभूतपूर्व रणनीतिक बढ़त प्रदान कर सकती है।

स्वास्थ्य सेवा के संदर्भ में उन्होंने सटीक विकिरण चिकित्सा जैसे अनुप्रयोगों का उल्लेख किया, जो ट्यूमर को बिना दुष्प्रभाव के लक्षित कर सकती है, अंगों की गति के अनुसार उपचार को अनुकूलित कर सकती है और रोगियों की तेजी से रिकवरी में सहायक हो सकती है। इसके अतिरिक्त उपग्रह संचार, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना और उन्नत संवेदन प्रणालियों में भी क्वांटम तकनीक महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएगी।

मंत्री ने कहा कि भले ही भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति में अपेक्षाकृत देर से प्रवेश किया था, लेकिन उभरती प्रौद्योगिकियों के मामले में वह यह गलती दोहराने वाला नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र की खोज जैसे क्षेत्रों में समानांतर प्रयासों के माध्यम से भारत खुद को वैश्विक तकनीकी परिवर्तन के अग्रिम पंक्ति में स्थापित कर रहा है। उन्होंने हाल ही में घोषित बायोफार्मा शक्ति पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था तेजी से जैव प्रौद्योगिकी, आनुवंशिक विज्ञान, पुनर्योजी प्रणालियों, सॉफ्टवेयर आधारित ढांचों और क्वांटम कंप्यूटिंग की ओर अग्रसर है।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि देश के कई संस्थानों में क्वांटम प्रौद्योगिकी से संबंधित बी.टेक माइनर पाठ्यक्रम शुरू हो चुके हैं और एम.टेक कार्यक्रमों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी है। उन्होंने आंध्र प्रदेश में प्रशिक्षित शिक्षकों और संस्थागत सहयोग के माध्यम से संरचित क्वांटम अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही उन्नत विनिर्माण सुविधाओं और केंद्रीय अनुसंधान अवसंरचना के निर्माण की जानकारी दी, जो स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और शिक्षण संस्थानों के लिए सुलभ होगी। आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित अनुसंधान पार्क मॉडल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इसे अब देशभर में अपनाया जा रहा है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि अलग-थलग रहकर काम करने का दौर समाप्त हो चुका है और अमरावती क्वांटम वैली की सफलता सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स के एकीकृत प्रयास पर निर्भर करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि पांच वर्ष पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी बढ़ाने जैसे निर्णय सहयोगात्मक विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पहले ही उल्लेखनीय विस्तार करते हुए लगभग आठ अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच चुकी है और आने वाले वर्षों में इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

अपने समापन वक्तव्य में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की क्वांटम यात्रा पवित्र नगर अमरावती से एक नई दिशा प्राप्त कर रही है और आंध्र प्रदेश विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण आधारशिला साबित होगा। उन्होंने राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने वाले राज्यों को केंद्र सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और आंध्र प्रदेश के बीच मजबूत सहयोग भारत को वैश्विक क्वांटम नेतृत्व की ओर तेज गति से अग्रसर करेगा।

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