महिला श्रम बल सहभागिता दर में निरंतर वृद्धि, बेरोजगारी दर में गिरावट: पीएलएफएस त्रैमासिक बुलेटिन

देश के श्रम बाजार से जुड़े ताजा संकेतकों में सकारात्मक रुझान सामने आया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अक्टूबर-दिसंबर 2025 त्रैमासिक बुलेटिन के अनुसार श्रम बल सहभागिता दर में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में कमी आई है।

यह बुलेटिन देश में रोजगार, कार्यबल संरचना और बेरोजगारी से जुड़े प्रमुख संकेतकों का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

श्रम बल सहभागिता दर में सुधार

अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए समग्र श्रम बल सहभागिता दर 55.8 प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही के 55.1 प्रतिशत से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 58.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में 50.4 प्रतिशत रही।

महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। महिला श्रम बल सहभागिता दर बढ़कर 34.9 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई-सितंबर 2025 में 33.7 प्रतिशत थी। ग्रामीण महिलाओं की सहभागिता 39.4 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग स्थिर रही।

युवा वर्ग (15-29 वर्ष) में श्रम बल सहभागिता दर 41.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो रोजगार के अवसरों में क्रमिक विस्तार का संकेत देती है।

कार्यबल में वृद्धि के संकेत

देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों का श्रमिक जनसंख्या अनुपात बढ़कर 53.1 प्रतिशत हो गया, जो पिछली तिमाही में 52.2 प्रतिशत था। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 56.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 47.1 प्रतिशत दर्ज किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर-दिसंबर 2025 में लगभग 57.4 करोड़ लोग कार्यरत थे, जिनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। पिछली तिमाही में यह संख्या 56.2 करोड़ थी।

बेरोजगारी दर में कमी

बुलेटिन के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की समग्र बेरोजगारी दर घटकर 4.8 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 4.0 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 6.7 प्रतिशत रही।

ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत और ग्रामीण महिलाओं की 3.6 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर 9.0 प्रतिशत रही, जो पुरुषों के 5.9 प्रतिशत से अधिक है।

युवा वर्ग (15-29 वर्ष) में बेरोजगारी दर 14.3 प्रतिशत दर्ज की गई, जो रोजगार सृजन के लिए अभी भी चुनौती की ओर संकेत करती है।

स्वरोजगार का बढ़ता दायरा

रोजगार की प्रकृति का विश्लेषण बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार प्रमुख बना हुआ है। यहां 58.0 प्रतिशत पुरुष और 72.8 प्रतिशत महिला श्रमिक स्वरोजगार में संलग्न हैं। शहरी क्षेत्रों में अधिकांश श्रमिक नियमित वेतन या वेतनभोगी रोजगार में हैं, जहां पुरुषों का 47.4 प्रतिशत और महिलाओं का 54.3 प्रतिशत हिस्सा इस श्रेणी में आता है।

कृषि में ग्रामीण निर्भरता, शहरी क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र का वर्चस्व

उद्योग आधारित वितरण के अनुसार ग्रामीण भारत में कृषि अब भी रोजगार का मुख्य स्रोत है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान 49.4 प्रतिशत ग्रामीण पुरुष और 75.5 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं कृषि क्षेत्र में कार्यरत थीं।

इसके विपरीत शहरी अर्थव्यवस्था में तृतीयक या सेवा क्षेत्र का दबदबा बना रहा, जहां 60.9 प्रतिशत पुरुष और 64.9 प्रतिशत महिलाएं इसी क्षेत्र में कार्यरत पाई गईं।

सर्वेक्षण का दायरा और विश्वसनीयता

यह त्रैमासिक अनुमान देशभर में 5,61,108 व्यक्तियों से एकत्रित आंकड़ों पर आधारित है, जिनमें 3,21,040 ग्रामीण और 2,40,068 शहरी क्षेत्रों से थे।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रमुख श्रम संकेतकों की विश्वसनीयता को रिलेटिव स्टैंडर्ड एरर के माध्यम से मापा गया है, जिससे आंकड़ों की सांख्यिकीय मजबूती सुनिश्चित होती है।

संशोधित सर्वेक्षण पद्धति का प्रभाव

जनवरी 2025 से पीएलएफएस की नमूना पद्धति में बदलाव किया गया है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए उच्च आवृत्ति वाले श्रम संकेतक उपलब्ध कराए जा सकें। अब मासिक और त्रैमासिक दोनों स्तरों पर रोजगार और बेरोजगारी के अनुमान तैयार किए जा रहे हैं, जिससे श्रम बाजार की अधिक सटीक तस्वीर सामने आती है।

स्रोत: पीएलएफएस त्रैमासिक बुलेटिन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »