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वाइस एडमिरल के.के. नैयर स्मारक व्याख्यान 2026: समुद्री चेतना और विकसित भारत की दिशा में सशक्त संवाद

राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर वाइस एडमिरल के.के. नैयर स्मारक व्याख्यान का 2026 संस्करण नई दिल्ली स्थित फाउंडेशन परिसर में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। यह वार्षिक व्याख्यान वाइस एडमिरल के.के. नैयर की दूरदर्शी सोच, रणनीतिक नेतृत्व और भारत में समुद्री विमर्श को नई दिशा देने में उनके ऐतिहासिक योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।

वाइस एडमिरल के.के. नैयर स्मारक व्याख्यान 2026: समुद्री चेतना और विकसित भारत की दिशा में सशक्त संवाद

वाइस एडमिरल नैयर केवल एक विशिष्ट नौसेना अधिकारी ही नहीं थे, बल्कि वे भारत में समुद्री चेतना के पुनर्जागरण के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने उस दौर में समुद्री शक्ति और सामरिक सोच के महत्व को रेखांकित किया, जब राष्ट्रीय विमर्श में समुद्री आयाम अपेक्षाकृत उपेक्षित था। राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने इसे देश के अग्रणी समुद्री थिंक टैंक के रूप में स्थापित करने की ठोस नींव रखी। साथ ही विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की स्थापना में भी उनकी केंद्रीय भूमिका रही, जिसने भारत की रणनीतिक बहस को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख और राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने वाइस एडमिरल नैयर के व्यक्तित्व और उनके बौद्धिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने संस्थागत सोच और नीति निर्माण के बीच सेतु स्थापित किया। एडमिरल सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में समुद्री शक्ति किसी भी राष्ट्र की समग्र राष्ट्रीय शक्ति का अभिन्न अंग बन चुकी है।

इसके उपरांत भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने मुख्य भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने वाइस एडमिरल नैयर की विरासत को भारत की समुद्री रणनीति के विकास से जोड़ते हुए कहा कि आज जब हिंद प्रशांत क्षेत्र वैश्विक भू राजनीति का केंद्र बन चुका है, तब समुद्री चेतना का विस्तार और भी अधिक आवश्यक हो गया है। उन्होंने राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि यह संस्थान अनुसंधान, विश्लेषण और नीति समर्थन के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रगति से जुड़े समुद्री मुद्दों पर सार्थक दिशा प्रदान कर रहा है।

एडमिरल त्रिपाठी ने भारतीय नौसेना की दोहरी जिम्मेदारी को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक ओर उसे वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार भी करना है। उन्होंने यह उल्लेख किया कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारतीय नौसेना की बढ़ती स्वीकृति अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में 70 से अधिक देशों की भागीदारी से स्पष्ट होती है। इन देशों में से अनेक मिलान बहुराष्ट्रीय अभ्यास के 13वें संस्करण और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी के प्रमुखों के 9वें सम्मेलन में भी भाग लेंगे, जिसकी अध्यक्षता भारत करेगा। यह भारत की समुद्री कूटनीति और सामरिक सहयोग की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है।

इस अवसर पर इंफोसिस के संस्थापक श्री एन.आर. नारायण मूर्ति ने स्मृति व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसका विषय था सेवामय जीवन को श्रद्धांजलि। श्री मूर्ति ने अपने उद्बोधन में वाइस एडमिरल नैयर के व्यक्तित्व को सेवा, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री शक्ति और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा के बीच गहरा संबंध है। उनके अनुसार भारत का आर्थिक और सामरिक भविष्य समुद्रों से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।

श्री मूर्ति ने भारतीय नौसेना को केवल तटरेखा की रक्षक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटर, समुद्री व्यापार की संरक्षक और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने वाली संस्था के रूप में वर्णित किया। उन्होंने आधुनिक युद्ध और सुरक्षा परिवेश में प्रौद्योगिकी की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर क्षमताओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में तकनीकी श्रेष्ठता ही सामरिक बढ़त का आधार बनेगी।

अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय नौसेना द्वारा अपनाए गए मूल्यों अनुशासन, साहस, टीम वर्क, ईमानदारी और राष्ट्रीय गौरव को भारत की प्रगति के लिए प्रेरक तत्व बताया। उन्होंने कहा कि यदि ये मूल्य राष्ट्रीय जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी समान रूप से आत्मसात किए जाएं, तो विकसित भारत का लक्ष्य अधिक सुदृढ़ आधार पर आगे बढ़ सकता है।

कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी, राजनयिक समुदाय के सदस्य, शिक्षाविद, रणनीतिक विश्लेषक, नीति विशेषज्ञ तथा वाइस एडमिरल नैयर के परिवारजन और सहयोगी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विचार विमर्श का स्वर गंभीर और दूरदर्शी रहा, जिसमें समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री कानून और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन अपने अनुसंधान, प्रकाशनों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से समुद्री जागरूकता को सुदृढ़ करने और नीतिगत बहस को समृद्ध बनाने का कार्य निरंतर कर रहा है। फाउंडेशन का उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्र के सुरक्षित, सतत और समावेशी विकास के लिए ठोस बौद्धिक आधार तैयार करना है। वाइस एडमिरल के.के. नैयर की विरासत इसी दृष्टि में निहित है कि भारत अपनी समुद्री पहचान को पुनर्परिभाषित करे और वैश्विक व्यवस्था में एक सशक्त, उत्तरदायी समुद्री राष्ट्र के रूप में उभरे।

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