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कट्टुपल्ली में प्रथम कैडेट प्रशिक्षण पोत ‘कृष्णा’ का जलावतरण

तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित एल एंड टी शिपबिल्डिंग परिसर में भारतीय नौसेना के लिए निर्माणाधीन तीन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों में से प्रथम पोत यार्ड 18003, जिसे ‘कृष्णा’ नाम दिया गया है, का विधिवत जलावतरण किया गया। यह समारोह नौसेना की परंपराओं के अनुरूप आयोजित हुआ, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की उपस्थिति में श्रीमती अनुपमा चौहान ने पोत का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा क्षेत्र से जुड़े गणमान्य प्रतिनिधि तथा मेसर्स एल एंड टी शिपबिल्डिंग, चेन्नई के अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में भारत की प्रगति और नौसेना की प्रशिक्षण क्षमता को सुदृढ़ करने के प्रयासों पर विशेष बल दिया गया।

‘कृष्णा’ को पूर्णतः स्वदेशी रूप से एल एंड टी द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह परियोजना भारतीय नौसेना की दीर्घकालिक प्रशिक्षण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस पोत को वर्ष 2026 के अंत तक भारतीय नौसेना को सौंपा जाएगा।

कैडेट प्रशिक्षण जहाजों का उद्देश्य नौसेना अकादमी में बुनियादी प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद अधिकारी कैडेटों को समुद्री परिवेश में व्यावहारिक और संचालनात्मक प्रशिक्षण प्रदान करना है। इन जहाजों पर महिला कैडेटों सहित अधिकारी प्रशिक्षुओं को नौवहन, समुद्री संचालन, संचार, इंजीनियरिंग तथा सामरिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव कराया जाएगा। साथ ही, मित्र देशों के कैडेटों को भी प्रशिक्षण देने की व्यवस्था होगी, जिससे रक्षा सहयोग और समुद्री कूटनीति को बढ़ावा मिलेगा।

नौसैनिक प्रशिक्षण में समुद्री अनुभव की केंद्रीय भूमिका होती है। आधुनिक नौसेना के लिए केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समुद्री अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क और प्रतिकूल परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता का विकास भी आवश्यक होता है। ‘कृष्णा’ जैसे प्रशिक्षण पोत इस दिशा में एक सशक्त मंच प्रदान करेंगे, जहां भावी अधिकारी वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में सीख और नेतृत्व कौशल का विकास कर सकेंगे।

यह जलावतरण स्वदेशी जहाज निर्माण के क्षेत्र में भारत की निरंतर प्रगति का प्रतीक है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं, जिनमें युद्धपोत, पनडुब्बी, गश्ती पोत और सहायक जहाजों का घरेलू निर्माण शामिल है। ‘कृष्णा’ का निर्माण इस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य रक्षा उत्पादन में आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू औद्योगिक आधार को मजबूत करना है।

यह परियोजना भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण और मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है। स्वदेशी डिजाइन और निर्माण से न केवल तकनीकी क्षमता का विकास होता है, बल्कि रक्षा उद्योग में रोजगार, कौशल विकास और अनुसंधान को भी प्रोत्साहन मिलता है। एल एंड टी शिपबिल्डिंग द्वारा इस पोत का निर्माण निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करता है, जो रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी सहयोग के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

रणनीतिक दृष्टि से यह विकास महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका निरंतर विस्तृत हो रही है। एक सुदृढ़ और प्रशिक्षित नौसेना ही समुद्री हितों की सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की रक्षा और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में प्रभावी भूमिका निभा सकती है। प्रशिक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ करना इस व्यापक समुद्री दृष्टिकोण का अनिवार्य अंग है।

कट्टुपल्ली में ‘कृष्णा’ का जलावतरण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत न केवल अपने रक्षा उपकरणों का स्वदेशी निर्माण कर रहा है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और तकनीकी ढांचा भी विकसित कर रहा है। वर्ष 2026 के अंत तक नौसेना में इसकी औपचारिक शामिलीकरण के बाद यह पोत प्रशिक्षण क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि करेगा और भारत की समुद्री शक्ति को और अधिक संगठित आधार प्रदान करेगा।

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