केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नए एम्स नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित किया, संस्थागत उत्कृष्टता और समन्वित विकास पर दिया जोर

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने नई दिल्ली में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों के अध्यक्षों और कार्यकारी निदेशकों के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए एम्स नेटवर्क के समन्वित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण विस्तार पर विशेष बल दिया। सम्मेलन का उद्देश्य नवस्थापित एम्स संस्थानों की संस्थागत क्षमताओं का निर्माण, अंतर संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।

अपने मुख्य संबोधन में मंत्री ने कहा कि एम्स नेटवर्क के विस्तार के वर्तमान चरण में यह नेतृत्व सम्मेलन अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोगी देखभाल, शिक्षण और अनुसंधान के बीच संतुलन स्थापित करना अनिवार्य है, जिसमें रोगी केंद्रित दृष्टिकोण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सभी संस्थानों से संरचित रोगी प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने तथा रोगी संतुष्टि को मापनीय रूप से बढ़ाने के लिए ठोस और संस्थागत कदम उठाने का आह्वान किया। मंत्री ने आशा व्यक्त की कि नए एम्स संस्थान पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखते हुए रोगी देखभाल और चिकित्सा शिक्षा में विश्व स्तरीय मानकों को स्थापित करेंगे।

मंत्री ने नए एम्स संस्थानों के विभिन्न विकास चरणों को ध्यान में रखते हुए पारस्परिक सहयोग और सुव्यवस्थित समन्वय को अनिवार्य बताया। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि 20 एम्स संस्थानों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक सहयोगी अनुसंधान संघ की स्थापना की है। उनके अनुसार इस पहल की सफलता संस्थागत नेतृत्व की प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक उत्कृष्टता के संतुलित संयोजन पर निर्भर करेगी।

शासन संबंधी भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रत्येक एम्स का अध्यक्ष मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते हुए मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण प्रदान करता है, जबकि कार्यकारी निदेशक दैनिक प्रशासनिक संचालन के लिए उत्तरदायी होता है। उन्होंने इस कार्यात्मक विभाजन का सम्मान करने और संस्थागत प्रबंधन को सुचारु बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता को बढ़ावा देने का आह्वान किया, ताकि संस्थानों की विश्वसनीयता और जनविश्वास को सुदृढ़ किया जा सके।

तकनीकी उन्नयन पर बल देते हुए मंत्री ने निदान और नैदानिक निर्णय प्रक्रियाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समुचित एकीकरण की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवाओं को नियमित कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग बनाने का सुझाव दिया, जिससे दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें। इसके अतिरिक्त उन्होंने सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों को मजबूत कर एम्स की सार्वजनिक स्वास्थ्य भूमिका को और व्यापक बनाने की आवश्यकता बताई।

मानव संसाधन विकास के संदर्भ में मंत्री ने संकाय भर्ती प्रक्रियाओं को गति देने पर जोर दिया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि गुणवत्ता मानकों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने प्रति वर्ष कम से कम चार साक्षात्कार चक्र आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने हाल के वर्षों में एम्स में संकाय नियुक्तियों में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए इसे सकारात्मक संकेत बताया। नर्सिंग और गैर संकाय कर्मचारियों की भर्ती के लिए एनओआरसीईटी और सामान्य भर्ती परीक्षा जैसी संरचित प्रक्रियाओं को नियमित रूप से आयोजित करने तथा समयबद्ध नियुक्तियों पर विशेष बल दिया गया।

मंत्री ने सभी एम्स संस्थानों में जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी की स्थापना और संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जिससे रोगियों को सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने एम्स और राष्ट्रीय महत्व के अन्य संस्थानों के बीच शिक्षकों और छात्रों के आदान प्रदान के लिए सुव्यवस्थित तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण और नर्सिंग क्षमता निर्माण में एम्स को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

सहयोगात्मक अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय प्रबंधन संस्थानों जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी को प्रोत्साहित करने की बात कही। विशेष रूप से दुर्लभ रोगों, आनुवंशिक विकारों और चिकित्सा प्रौद्योगिकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में बहु विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने चेताया कि एम्स की संख्या में वृद्धि के साथ गुणवत्ता मानकों में किसी प्रकार की गिरावट नहीं होनी चाहिए। एम्स की पहचान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा के लिए है, जिसे बनाए रखना अनिवार्य है।

मंत्री ने जिम्मेदार छात्र नेतृत्व की संस्कृति को विकसित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। उन्होंने संस्थागत नेतृत्व से अपेक्षा की कि वह शैक्षणिक अनुशासन और संस्थागत अखंडता को बनाए रखते हुए सकारात्मक छात्र नेतृत्व को प्रोत्साहित करने के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित करे।

इस अवसर पर मंत्री ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वित्त विभाग द्वारा तैयार “विभिन्न मामलों पर कार्यालय ज्ञापन एवं दिशा निर्देशों का संकलन” शीर्षक प्रकाशन का विमोचन किया। यह संकलन मंत्रालय के अधीन संस्थानों के लिए वित्तीय और प्रशासनिक निर्देशों का त्वरित संदर्भ प्रदान करेगा तथा संस्थागत कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा।

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