वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में दिल्ली के लिए 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का प्रावधान केवल एक आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य की रूपरेखा है। सड़क, रेल परिवहन, मेट्रो विस्तार, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार दिल्ली को एक सुव्यवस्थित, आधुनिक और आदर्श महानगर के रूप में विकसित करना चाहती है। ऐसे समय में जब दिल्ली की भाजपा सरकार अपना एक वर्ष पूर्ण कर रही है, यह स्वाभाविक है कि बीते वर्ष के कामकाज का मूल्यांकन किया जाए और देखा जाए कि तथाकथित “ट्रिपल इंजन सरकार” का लाभ दिल्लीवासियों को कितना और कैसे मिला है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने कार्यकाल के एक वर्ष पूर्ण होने पर सरकार की उपलब्धियों और आगामी संकल्पों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार ने न केवल नई योजनाओं की शुरुआत की, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों की लंबित और अधूरी परियोजनाओं को भी गति दी है। ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’, मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, अधूरी पड़ी आधारभूत परियोजनाओं को पूरा करने की पहल, तथा महिलाओं और छात्रों के लिए नई राहतकारी योजनाओं का खाका-ये सब उनके पहले वर्ष के प्रमुख बिंदु रहे। उनका यह भी कहना है कि ट्रिपल इंजन की व्यवस्था-अर्थात केंद्र, राज्य और नगर निकाय में एक ही राजनीतिक नेतृत्व के कारण विकास कार्यों में समन्वय और गति दोनों आई है।
ट्रिपल इंजन सरकार की अवधारणा का सबसे बड़ा लाभ वित्तीय समन्वय के रूप में सामने आया है। दिल्ली सरकार को अब पूंजीगत व्यय के लिए ऋण अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर उपलब्ध हो रहा है। पहले जहां ब्याज दर 13-14 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी, वहीं अब लगभग सात प्रतिशत पर ऋण मिलना संभव हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा 21 हजार करोड़ रुपये तक की ऋण सीमा निर्धारित किए जाने से आधारभूत ढांचे के विकास में धनाभाव की आशंका कम हुई है। यही नहीं, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन तथा पीएम भीम योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं की समयावधि बढ़वाने में भी दिल्ली सरकार को सफलता मिली है। आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ अब राजधानी के अधिक से अधिक नागरिकों तक पहुंच रहा है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा की ठोस गारंटी मिल रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के संकेत अवश्य दिखाई दिए हैं। मोहल्ला क्लीनिक मॉडल पर उठे प्रश्नों और अधूरी स्वास्थ्य परियोजनाओं के बीच नई सरकार ने अस्पतालों के आधुनिकीकरण, बेड क्षमता बढ़ाने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यदि यह प्रयास निरंतरता से जारी रहा तो दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी के अनुरूप विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार का दावा किया गया है। पिछले वर्षों में शिक्षा मॉडल को लेकर जहां एक ओर प्रशंसा हुई, वहीं भवनों की गुणवत्ता, संसाधनों के उपयोग और परिणामों पर सवाल भी उठे। नई सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह शिक्षा को राजनीतिक विमर्श से ऊपर उठाकर वास्तविक गुणवत्ता सुधार की दिशा में कार्य करे।
परिवहन और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी गति लाने का प्रयास हुआ है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार, बस बेड़े के आधुनिकीकरण और सड़कों के सुधार की योजनाएं केंद्र और राज्य के समन्वय से आगे बढ़ रही हैं। दिल्ली मेट्रो पहले से ही राजधानी की जीवनरेखा रही है, अब किराए में राहत या छात्रों के लिए विशेष प्रावधान जैसे कदम यदि लागू होते हैं तो इससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा। यातायात जाम की समस्या के समाधान के लिए फ्लाईओवर, अंडरपास और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली पर ध्यान देना आवश्यक है। एक वर्ष में कुछ परियोजनाओं को गति मिली है, किंतु राजधानी जैसे विशाल महानगर में ठोस परिणामों के लिए निरंतर प्रयास अपेक्षित हैं।

