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महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने न्यूयॉर्क में आयोजित सीएसडब्ल्यू-70 के दौरान महिला नेतृत्व वाले विकास और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया

श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आईबीएसए फंड की भूमिका और महिला सशक्तिकरण तथा वैश्विक दक्षिण भागीदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने 12 मार्च 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 70वें सत्र (सीएसडब्ल्यू-70) के दौरान “महिला नेतृत्व वाला विकास और दक्षिण-दक्षिण सहयोग-आईबीएसए फंड की सफलता की कहानियां” शीर्षक वाले कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस कार्यक्रम में कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ मंत्री और प्रतिनिधि एक साथ आए। प्रतिभागियों में ब्राजील की महिला मामलों की उप मंत्री महामहिम यूटालिया बारबोसा रोड्रिग्स नावेस, दक्षिण अफ्रीका की राष्ट्रपति कार्यालय में महिला, युवा और विकलांग व्यक्तियों के मामलों की मंत्री महामहिम सिंदिसिवे चिकुंगा, यूएनडीपी के प्रशासक श्री अलेक्जेंडर डी क्रू; गाम्बिया की लिंग, बाल और सामाजिक कल्याण मंत्री महामहिम फाटू किंतेह, फिजी की महिला, बाल और सामाजिक सुरक्षा मामलों की कार्यवाहक स्थायी सचिव महामहिम सेलिना कुरुलेका, संयुक्त राष्ट्र में लाइबेरिया के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत लुईस जी. ब्राउन द्वितीय, और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. ​​हरीश शामिल थे।

सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती ठाकुर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व में बहुपक्षीय सहयोग किस तरह से विभिन्न देशों में महिला सशक्तिकरण और सतत् विकास में योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों की संयुक्त पहल, भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) कोष, जिसकी स्थापना 2004 में हुई थी, ने लगभग 40 देशों में 50 से अधिक विकास सहायता परियोजनाओं को सहायता दी है, जो विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने में दक्षिण-दक्षिण सहयोग की मजबूती को दर्शाता है।

मंत्री जी ने इस बात पर बल दिया कि आईबीएसए कोष उन परियोजनाओं पर खास जोर देता है, जो महिलाओं की क्षमताओं और नेतृत्व में इजाफा करती हैं, जोकि भारत के महिला-नेतृत्व वाले विकास के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत समाज में महिलाओं की बहुआयामी भूमिका को मान्यता देता है और राष्ट्रीय पहलों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों के ज़रिए उनके समग्र विकास को लगातार प्राथमिकता देता रहा है।

आईबीएसए ढांचे के तहत समर्थित खास पहलों पर रोशनी डालते हुए, मंत्री जी ने लाइबेरिया में कार्यान्वित की जा रही “सतत् विकास के लिए महिला विधायकों द्वारा आवाज, नेतृत्व और लैंगिक रूप से संवेदनशील शासन को बढ़ावा देना” नामक परियोजना का उल्लेख किया। इस परियोजना का मकसद विधायी और निगरानी प्रक्रियाओं के ज़रिए लैंगिक समानता को बढ़ावा देकर महिला विधायी समूह की भूमिका को बढ़ाते हुए उसे मजबूत करना है। इसमें पेशेवर ज्ञान को मजबूत करने और अन्य देशों में सफल महिला विधायी समूहों के अनुभवों से सीखने को सुगम बनाने के लिए तैयार किए गए क्षमता-निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लैंगिक भेदभाव वाले कानूनों को खत्म करना, प्रस्तावित कानूनी सुधारों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना और लैंगिक रूप से संवेदनशील शासन को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं और पुरुषों के बीच सही तालमेल बिठाना है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं और समावेशी नीति निर्माण को मजबूती मिल सके।

श्रीमती ठाकुर ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के मकसद से शुरू की गई उन पहलों पर भी बात की, जो सतत् विकास लक्ष्य 5 को प्राप्त करने में योगदान देती हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने जॉर्डन में प्रस्तावित एक पुष्पकृषि परियोजना का ज़िक्र किया, जिसका मकसद पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देते हुए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना है।

इस परियोजना का मकसद ताफिलेह संयंत्र से उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल के लिए एक रिवर्स ऑस्मोसिस इकाई स्थापित करना है, जिससे 60 ग्रीनहाउस और पांच हेक्टेयर की नर्सरी में पुष्पकृषि उत्पादन मुमकिन हो सकेगा। इससे 50 महिला-नेतृत्व वाली सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में सहायता मिलने की उम्मीद है, साथ ही 150 महिलाओं को पुष्पकृषि और व्यावसायिक कौशल में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे महिलाओं में जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति भारत की घरेलू प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, मंत्री ने बताया कि भारत सरकार ने शिक्षा, कौशल, डिजिटल सशक्तिकरण और उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के लिए कई पहलों की शुरूआत की है, साथ ही लैंगिक बजट के ज़रिए लगातार नीतिगत समर्थन भी किया है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2025-26 में जेंडर बजटिंग के लिए करीब 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर (5.01 लाख करोड़ रुपये) आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह लैंगिक समानता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने पर सरकार के लगातार फोकस को दिखाता है।

अपने संबोधन के समापन में उन्होंने कहा कि आईबीएसए फंड वैश्विक दक्षिण के सहयोग का एक ठोस उदाहरण है, जो विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं पर सामूहिक रूप से काम करता है। उन्होंने इस तरह की साझेदारियों को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और विश्वास जताया कि भविष्य में वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण और सतत् विकास को बढ़ावा देने के लिए कई और प्रभावशाली पहलें लागू की जाएंगी।

सीएसडब्ल्यू-70 के इतर, मंत्री जी ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति कार्यालय में महिला, युवा और विकलांग व्यक्तियों से जुड़े मामलों की मंत्री महामहिम सिंदिसिवे चिकुंगा के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका संवाद मंच के तहत सहयोग पर चर्चा की, जिसमें गरीबी और भूख उन्मूलन के लिए आईबीएसए कोष भी शामिल है। उन्होंने जी20 और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, खास तौर पर डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के बावत और आगामी जी20 सम्मेलनों में महिला कार्य समूहों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया। चर्चा में महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में भारत द्वारा की गई पहलों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

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