14 मार्च पाई दिवस
हर वर्ष 14 मार्च को विश्वभर में पाई दिवस मनाया जाता है। यह तिथि 3/14 गणितीय स्थिरांक π (3.14) का प्रतीक है। संयोग से यही दिन महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की जयंती भी है, जिसने विज्ञान और गणित की गहराइयों को नई दृष्टि दी। पाई दिवस केवल एक संख्या का उत्सव नहीं, बल्कि मानव बुद्धि, जिज्ञासा और अन्वेषण की निरंतर यात्रा का उत्सव है।
π: एक संख्या, अनंत अर्थ π वह गणितीय स्थिरांक है जो किसी भी वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को व्यक्त करता है। यह लगभग 3.14159… के रूप में जाना जाता है, परंतु इसकी दशमलव विस्तार अनंत और अपरिमेय है।अर्थात् इसे पूर्ण रूप से कभी लिखा नहीं जा सकता। यह तथ्य ही अपने आप में विचारोत्तेजक है। एक साधारण-सी प्रतीत होने वाली संख्या, जो अनंत विस्तार लिए हुए है। यह हमें स्मरण कराती है कि ज्ञान की सीमाएँ नहीं होतीं; जितना अधिक हम समझते हैं, उतना ही और जानने की जिज्ञासा बढ़ती है।

π का ज्ञान प्राचीन मिस्र, बाबुल और भारत की सभ्यताओं तक जाता है। भारतीय गणितज्ञों ने भी इसके मान के सटीक निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।आधुनिक युग में कंप्यूटर तकनीक के माध्यम से π के खरबों अंकों की गणना की जा चुकी है, किंतु व्यवहारिक जीवन में कुछ दशमलव स्थान ही पर्याप्त होते हैं।यह तथ्य बताता है कि गणित केवल सैद्धांतिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन और तकनीक का आधार है। विज्ञान, तकनीक और π वृत्त और गोलाकार संरचनाएँ प्रकृति और मानव निर्मित संरचनाओं में सर्वत्र दिखाई देती हैं,ये पहियों से लेकर ग्रहों की कक्षाओं तक मौजूद है। इंजीनियरिंग, वास्तुकला, भौतिकी, खगोलशास्त्र और कंप्यूटर विज्ञान।इन सभी में π की भूमिका केंद्रीय है।

