द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा पांच बिलियन भोजन वितरण की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए इसे देश के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान बताया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए पांच बिलियन भोजन परोसना एक असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कार्यक्रम की थीम ‘सुपोषित और शिक्षित भारत से विकसित भारत की ओर’ को देश के वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि यह लक्ष्य तभी संभव है जब देश का हर बच्चा स्वस्थ और शिक्षित हो।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि बच्चों के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, अभिभावक, सामाजिक संगठन, कॉर्पोरेट क्षेत्र और नागरिक मिलकर कार्य करते हैं, तभी एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं तथा सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
उन्होंने शिक्षा को व्यक्ति के जीवन में अवसरों को निर्धारित करने वाला प्रमुख माध्यम बताते हुए कहा कि शिक्षा ही सशक्तिकरण और परिवर्तन का आधार है। स्कूल स्तर से ही बच्चों के व्यक्तित्व और क्षमता का विकास प्रारंभ हो जाता है, जहां उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक कौशल और अनुभव प्राप्त होते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यालय बच्चों को जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
राष्ट्रपति ने पिछले 25 वर्षों से अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्था स्कूलों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराकर न केवल कुपोषण की समस्या को कम कर रही है, बल्कि बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित भी कर रही है। यह पहल देश के सामाजिक और शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री पोषण योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि इस योजना के अंतर्गत संचालित विद्यालय भोजन कार्यक्रम ने अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित किया है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, इस योजना से बच्चों के नामांकन, उपस्थिति और स्कूल में बने रहने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही, उनके सीखने के स्तर और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।
उन्होंने यह भी बताया कि अक्षय पात्र फाउंडेशन समग्र शिक्षा अभियान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक सभी बच्चों के लिए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि बच्चों को केवल निशुल्क भोजन के लाभार्थी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वे राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। आज उन्हें प्रदान किया जा रहा पौष्टिक भोजन देश की मानव पूंजी में एक महत्वपूर्ण निवेश है। स्वस्थ, शिक्षित और ऊर्जावान बच्चे ही आने वाले समय में देश के कार्यबल का निर्माण करेंगे और भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।