केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित व्यापार सुगमता उपायों को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने नई दिल्ली में पात्र उत्पादक आयातकों (Eligible Manufacturer Importers – EMI) के लिए ड्यूटी डेफरमेंट स्कीम पर एक महत्वपूर्ण हाइब्रिड आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योग जगत और व्यापारिक हितधारकों को योजना की कार्यप्रणाली, लाभों और अनुपालन ढांचे के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना था।

कार्यक्रम में सीमा शुल्क प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न व्यापार संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और हितधारकों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से श्री योगेंद्र गर्ग (सदस्य, सीमा शुल्क, सीबीआईसी), श्री मनीष कुमार (मुख्य आयुक्त, दिल्ली सीमा शुल्क), श्री संजय गुप्ता (मुख्य आयुक्त, दिल्ली सीमा शुल्क – निवारक जोन) और श्री अखिल कुमार खत्री (मुख्य आयुक्त, डीआईसी) उपस्थित रहे।
विश्वास-आधारित अनुपालन की ओर कदम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री योगेंद्र गर्ग ने स्पष्ट किया कि ड्यूटी डेफरमेंट स्कीम एक “ट्रस्ट-बेस्ड कॉम्प्लायंस मॉडल” पर आधारित है, जिसका उद्देश्य आयात प्रक्रियाओं को सरल बनाना और अनावश्यक विलंब को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल कार्गो क्लियरेंस को तेज करती है, बल्कि व्यापार और प्रशासन के बीच विश्वास के अंतर को भी कम करती है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सीबीआईसी का दृष्टिकोण अब नियंत्रण-आधारित प्रणाली से हटकर सहयोगात्मक और पारदर्शी अनुपालन तंत्र की ओर बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार मानकों के अनुरूप वातावरण तैयार किया जा सके।
उद्योग के लिए वित्तीय और परिचालन लाभ
श्री मनीष कुमार ने अपने संबोधन में इस योजना के व्यावसायिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ड्यूटी डेफरमेंट स्कीम उत्पादक आयातकों के लिए कार्यशील पूंजी प्रबंधन को अधिक कुशल बनाती है। आयात शुल्क के तत्काल भुगतान की बाध्यता समाप्त होने से कंपनियां अपने नकदी प्रवाह को बेहतर तरीके से नियोजित कर सकती हैं, जिससे उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह योजना आयात शेड्यूलिंग को सुव्यवस्थित करती है और इन्वेंटरी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाती है, जो विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
ड्यूटी डेफरमेंट स्कीम के तहत पात्र उत्पादक आयातकों को बिना अग्रिम सीमा शुल्क भुगतान के माल की निकासी की अनुमति दी जाती है। आयात शुल्क का भुगतान मासिक आधार पर किया जाता है, जिससे तत्काल वित्तीय दबाव कम होता है।
यह योजना व्यापक रूप से समावेशी है और इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को भी शामिल किया गया है। यह पहल सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय उद्योग को मजबूत करना है।
प्रमुख लाभ
इस योजना के अंतर्गत उद्योग को कई रणनीतिक और परिचालन लाभ प्राप्त होते हैं—
- नकदी प्रवाह में सुधार, जिससे निवेश क्षमता बढ़ती है
- कार्गो क्लियरेंस में तेजी और ड्वेल टाइम में कमी
- आयात योजना और इन्वेंटरी नियंत्रण में दक्षता
- भुगतान अनुशासन को बढ़ावा
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि
- आपूर्ति श्रृंखला की समग्र दक्षता में सुधार
पात्रता और अनुपालन मानदंड
योजना का लाभ उठाने के लिए आयातकों को कुछ निर्धारित मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है—
- वैध आयात-निर्यात कोड (IEC)
- पिछले वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 25 EXIM दस्तावेज (MSME के लिए 10 दस्तावेज)
- जीएसटी अनुपालन, बिना लंबित रिटर्न
- वित्तीय स्थिरता का प्रमाण
- स्वच्छ अनुपालन रिकॉर्ड
यह मानदंड सुनिश्चित करते हैं कि योजना का लाभ केवल उन इकाइयों को मिले जो व्यवस्थित और पारदर्शी व्यापार संचालन का पालन करती हैं।
पूर्णतः डिजिटल आवेदन प्रक्रिया
सीबीआईसी ने आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया है। इच्छुक आयातक AEO India Portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जो 1 मार्च 2026 से सक्रिय है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के भौतिक संपर्क की आवश्यकता नहीं है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होती है।
स्वीकृत आवेदक 1 अप्रैल 2026 से देश के सभी सीमा शुल्क केंद्रों पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। योजना की वैधता 31 मार्च 2028 तक निर्धारित की गई है।