जैविक प्रणालियों से प्रेरित तकनीकों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा न्यूरोमॉर्फिक सेंसर विकसित किया है, जो नमी के प्रति संवेदनशील होने के साथ-साथ मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की नकल कर सकता है। यह सेंसर न केवल पर्यावरणीय संकेतों को समझने में सक्षम है, बल्कि उसी उपकरण में उन्हें प्रोसेस और संग्रहीत भी कर सकता है, जिससे पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स की तुलना में ऊर्जा खपत और डेटा-प्रसंस्करण की आवश्यकताओं में उल्लेखनीय कमी संभव है।
यह शोध जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक प्रमुख स्वायत्त संस्थान है। इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल Journal of Materials Chemistry C में प्रकाशित हुए हैं।

जैविक प्रेरणा और तकनीकी अनुवाद
इस सेंसर के विकास की प्रेरणा उभयचर जीवों, विशेष रूप से क्रिकेट मेंढकों से मिली, जिनका व्यवहार आर्द्रता और प्रकाश जैसे पर्यावरणीय कारकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। वैज्ञानिकों ने इस प्राकृतिक संवेदनशीलता को तकनीकी ढांचे में रूपांतरित करते हुए एक ऐसा उपकरण तैयार किया, जो नमी के स्तर में बदलाव के साथ अपने विद्युत व्यवहार को समायोजित कर सकता है।
यह सेंसर 1डी सुपरमॉलिक्यूलर नैनोफाइबर पर आधारित है, जिन्हें डोनर और एसेप्टर अणुओं के आवेश स्थानांतरण संकुल के माध्यम से विकसित किया गया। इन नैनोफाइबरों को कांच के सब्सट्रेट पर इंटर-डिजिटेटेड स्वर्ण इलेक्ट्रोड के ऊपर स्थापित कर एक सक्रिय उपकरण परत तैयार की गई।
एकीकृत प्रणाली: संवेदन, स्मृति और प्रोसेसिंग
पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में संवेदन, डेटा प्रोसेसिंग और स्मृति के लिए अलग-अलग इकाइयों की आवश्यकता होती है, जिससे ऊर्जा खपत बढ़ती है और डेटा ट्रांसफर में विलंब होता है। इसके विपरीत, यह नया न्यूरोमॉर्फिक सेंसर इन तीनों कार्यों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है।
प्रयोगों के दौरान सेंसर को एक नियंत्रित आर्द्रता कक्ष में रखा गया, जहां विभिन्न स्तरों की नमी के स्पंदनों के प्रति इसकी प्रतिक्रिया का परीक्षण किया गया। परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि सेंसर न केवल नमी में बदलाव को पहचान सकता है, बल्कि पूर्व संकेतों को अस्थायी रूप से “याद” भी रखता है—यह विशेषता जैविक सिनैप्स के व्यवहार से मेल खाती है।
शोधकर्ताओं ने सुविधा (facilitation), अवसाद (depression) और मेटा-प्लास्टिसिटी जैसे सिनैप्टिक गुणों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जो इस उपकरण की उन्नत न्यूरोमॉर्फिक क्षमताओं को दर्शाते हैं।
ऊर्जा दक्षता और उभरते अनुप्रयोग
न्यूरोमॉर्फिक इलेक्ट्रॉनिक्स का महत्व उस समय और बढ़ जाता है जब पारंपरिक कंप्यूटिंग सिस्टम ऊर्जा खपत और डेटा प्रोसेसिंग के बढ़ते दबाव से जूझ रहे हैं, विशेषकर एज कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में।
यह नया सेंसर इस चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है, क्योंकि यह डेटा को स्रोत पर ही प्रोसेस कर सकता है, जिससे क्लाउड या केंद्रीय सर्वरों पर निर्भरता कम हो जाती है। इससे न केवल ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रतिक्रिया समय भी तेज होता है।
प्रकाश और नमी का संयुक्त प्रभाव
इस उपकरण की एक विशेषता यह भी है कि इसकी प्रतिक्रिया केवल नमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकाश से भी प्रभावित होती है। यह व्यवहार क्रिकेट मेंढकों की प्राकृतिक गतिविधियों से मेल खाता है, जो नमी और दिन के प्रकाश दोनों के प्रति संवेदनशील होते हैं। इस प्रकार, यह सेंसर बहु-पर्यावरणीय संकेतों को एकीकृत रूप से समझने की क्षमता रखता है।
भविष्य की संभावनाएं
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी न्यूरोमॉर्फिक उपकरण में सिनैप्टिक व्यवहार की नकल के लिए प्राथमिक उत्तेजना के रूप में आर्द्रता का उपयोग किया गया है। यह उपलब्धि स्मार्ट सेंसर प्रौद्योगिकी के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
भविष्य में यह तकनीक स्मार्ट पर्यावरण निगरानी प्रणालियों, स्वास्थ्य देखभाल उपकरणों, वियरेबल सेंसर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित प्रणालियों में उपयोगी सिद्ध हो सकती है। विशेष रूप से, यह ऊर्जा-कुशल एज-कंप्यूटिंग समाधानों को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
Source: https://pubs.rsc.org/en/content/articlelanding/2026/tc/d5tc03980k